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भारत ने यूएनएचएलडीई के अंतर्गत ऊर्जा परिवर्तन के लिए चार सर्वोत्तम वैश्विक देशों – चिली, डेनमार्क, जर्मनी और यूके को औद्योगिक ऊर्जा परिवर्तन पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया

भारत वैश्विक स्तर पर उन कुछ चुनिंदा देशों में से एक है जिसने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में गुणात्मक बढ़ोत्तरी के साथ-साथ पेरिस जलवायु परिवर्तन (सीओपी 21) की प्रतिबद्धताओं को भी पूरा किया है। ऊर्जा क्षेत्र में विकास की गति को ध्यान में रखते हुए, भारत न केवल इसे प्राप्त करने के लिए कृतसंकल्प है, बल्कि प्रतिबद्ध समय सीमा के अंदर अपनी एनडीसी प्रतिबद्धताओं की सीमा को पार करने के लिए भी तैयार है। ये बातें केंद्रीय ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री, आर.के. सिंह ने आज यहां नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई), भारत सरकार और ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) द्वारा आयोजित किए गए वेबिनार “वैश्विक हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए एक बहुपक्षीय दृष्टिकोण” में अपने मुख्य भाषण में कही।

सभा को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए, आर.के. सिंह ने कहा कि भारत ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में वैश्विक रूप से अग्रणी है। भारत का एनडीसी, 2030 तक कुल बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी को 40% तक बढ़ाना है, लेकिन अगर हम वर्तमान दर से आगे बढ़ते रहे तो 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से लगभग 50% प्राप्त करने में सक्षम बन सकते हैं।

आर.के. सिंह ने आगे कहा कि भारत ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी है और इसका उद्देश्य इस मार्ग में अपना नेतृत्व जारी रखना है। उन्होंने कहा कि हमने 100 गीगावॉट स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाला मील का पत्थर प्राप्त किया जो कि हमारे लिए गर्व की बात है। यह न केवल 2030 तक 450 गीगावॉट प्राप्त करने वाले भारत के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, बल्कि यह और ज्यादा प्राप्त करने और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा परिवर्तन के लिए मार्ग प्रशस्त कर रहे अग्रणी देशों में से एक होने का विश्वास भी उत्पन्न करता है।

आर.के. सिंह ने बताया कि ब्लूमबर्ग द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश करने के लिए भारत को सबसे आकर्षक गंतव्य घोषित किया गया है।

मंत्री ने सूचित किया कि सरकार रिफाइनिंग और उर्वरकों में हरित हाइड्रोजन खरीद दायित्वों के लिए आदेशपत्र 10% से शुरू करने का प्रस्ताव कर रही है, जिसे बाद में बढ़ाकर 20-25% कर दिया जाएगा। समय के साथ अधिक से अधिक मात्रा को जोड़ने से कीमत में कमी आएगी और तब आदेशपत्र की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि हम हैवी मोबलिटी में हरित हाइड्रोजन के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) के साथ आने का भी प्रस्ताव कर रहे हैं और इस्पात जैसे अन्य क्षेत्रों पर भी नजर रखे हुए हैं।

इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राज्य मंत्री, भगवंत खुबा, एमएनआरई सचिव, इंदु शेखर चतुर्वेदी भी उपस्थित थे। वेबिनार में अनुकूल अंतरराष्ट्रीय नीतियों, प्रौद्योगिकी सह-विकास, प्रदर्शनों के लिए एकत्रित किए गए वित्त और निवेश के माध्यम से बाजार का निर्माण करने और तैनाती को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था का निर्माण करने के लिए आवश्यक बहुपक्षीय प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

वेबिनार में एच. ई. जुआन अंगुलो, भारत में चिली के राजदूत, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के समतुल्य; एच. ई. मार्टिन स्ट्रैंडगार्ड, मिशन के उप प्रमुख, राजदूत, द रॉयल डेनिश एम्बेसी; जर्मनी दूतावास, अर्थशास्त्र और वैश्विक मामलों के मंत्री और विभाग के प्रमुख, डॉ. स्टीफन एन कोच; नेटली टॉम्स, आर्थिक, जलवायु और विकास परामर्शदाता, ब्रिटिश उच्चायोग को एक “कंट्री कन्वर्सेशन” दिखाया गया। डॉ. अरुणाभा घोष, सीईओ, सीईईडब्ल्यू द्वारा इसका संचालन किया गया।

“कॉर्पोरेट कन्वर्सेशन” पर आयोजित किए गए एक अन्य सत्र में डेविड सिरेली, कंट्री मैनेजर और सीईओ, स्नैम इंडिया; फ्रैंक वउटर्स, सीनियर वाइस प्रेसिंडेंट – ऊर्जा संक्रमण, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड; और अलका उपाध्याय, एवीपी और प्रमुख, पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी, टाटा सस्टेनेबिलिटी ग्रुप ने श्रोताओं के बीच अपनी महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि साझा की।

भारत यूएन हाई-लेवल डायलॉग ऑन एनर्जी के लिए ऊर्जा परिवर्तन के लिए एक वैश्विक चैंपियन है, जिसका उद्देश्य सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के ऊर्जा संबंधित लक्ष्यों के कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है। इस संदर्भ में, भारत ने ऊर्जा परिवर्तन के चार अन्य वैश्विक सर्वश्रेष्ठ देशों-चिली, डेनमार्क, जर्मनी और ब्रिटेन को विकासात्मक लक्ष्यों के साथ समझौता किए बिना औद्योगिक ऊर्जा परिवर्तन पर चर्चा करने और इस परिवर्तन में हाइड्रोजन की भूमिका पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया है। प्रतिभागी कंपनियों द्वारा भी अपने विचारों और सुझावों को साझा किया गया।

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