भारत ने पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय स्तर पर अद्यतन निर्धारित योगदान (एनडीसी) को संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मलेन (यूएनएफसीसीसी) को सौंपा है और इस बात पर जोर दिया है कि यह 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के उसके दीर्घकालिक लक्ष्य तक पहुंचने की दिशा में एक कदम है।
यूएनएफसीसीसी को सौंपे गये एनडीसी के दस्तावेज के साथ 23 अगस्त को प्रेषित पत्र में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत के एनडीसी उसे किसी क्षेत्र-केंद्रित प्रतिबद्धता के लिए बाध्य नहीं करते।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन अगस्त को संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मलेन (यूएनएफसीसीसी) को सूचना दिए जाने के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर अद्यतन निर्धारित योगदान (एनडीसी) को मंजूरी दी थी। इसमें पिछले साल ग्लासगो सम्मेलन में घोषित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘पंचामृत’ रणनीति को शामिल किया गया।
अद्यतन एनडीसी के अनुसार, भारत अब 2030 तक 2005 के स्तर से अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को 45 प्रतिशत तक कम करने और 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा संसाधनों से लगभग 50 प्रतिशत संचयी विद्युत शक्ति की स्थापित क्षमता प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अद्यतन एनडीसी में लिखा है, “जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने की कुंजी के रूप में ‘लाइफ’- ‘पर्यावरण के लिए जीवनशैली’ के जन-आंदोलन सहित परंपराओं और संरक्षण एवं संयम के मूल्यों पर आधारित जीने के एक स्वस्थ एवं टिकाऊ तौर-तरीकों को आगे बढ़ाने और प्रसारित करने हेतु।’’
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