भारत ने अपनी सैन्य कूटनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त करते हुए आज आसियान देशों और भारतीय सेना की प्रमुख महिला सैन्य अधिकारी के लिए आयोजित पाठ्यक्रम का समापन किया। लैंगिक तटस्थता और महिला सशक्तीकरण के लिए भारतीय सेना के दृष्टिकोण के तहत, संयुक्त राष्ट्र की रुपरेखा पर आधारित यह कार्यक्रम रक्षा मंत्रालय के नेतृत्व में आयोजित किया गया था।
इस तरह के परिवर्तनकारी पाठ्यक्रम की मेजबानी सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता की वकालत करते हुए गहरे अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहन देने की भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के आलोक में यह 39 वीं (एडीएमएम) और एडीएमएम-प्लस बैठक विशेष रूप से प्रासंगिक है।
पाठ्यक्रम को महिला अधिकारियों के बीच नेतृत्व क्षमता, रणनीतिक कौशल और परिचालन क्षमता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पाठयक्रम अंतर-सांस्कृतिक चर्चा और पारस्परिक व्यावसायिक विकास के लिए एक समृद्ध मंच प्रदान करता है। प्रतिभागियों ने इस दौरान गतिशील कार्यशालाओं, सामरिक सिमुलेशन और विशेषज्ञ व्याख्यानों के समृद्ध मिश्रण का अध्ययन किया।
पाठ्यक्रम की संरचना का अभिन्न अंग संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में भारत की ऐतिहासिक विरासत को शामिल करना है। यह पाठ्यक्रम भारत में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र के तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जो विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है और विभिन्न संयुक्त राष्ट्र मिशनों में शांति सैनिकों को प्रशिक्षण और तैनात करने का एक समृद्ध इतिहास है। प्रतिभागियों को संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभ्यास पर एक प्रदर्शन का अवलोकन करने का अनूठा अवसर मिला, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय शांति मिशनों में भारत द्वारा अपनाए जाने वाले कठोर मानकों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।
प्रतिभागियों को शैक्षणिक और सामरिक तत्वों के अलावा, भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत से अवगत कराया गया। उन्होंने आयोजित योग सत्रों में भाग लिया। प्रतिभगियों ने दिल्ली और आगरा में धरोहर स्थलों की यात्राएं भी कीं। उन्हें ‘मेड इन इंडिया’ उपकरणों से भी परिचित कराया गया। यह ‘मेड इन इंडिया’ उपकरण आगामी संयुक्त राष्ट्र मिशनों का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं।
पहले कार्यक्रम के समापन के साथ ही यह पाठ्यक्रम न केवल भारत की विकसित हो रही सैन्य कूटनीति के प्रमाण के रूप में सामने है, बल्कि मजबूत आसियान-भारत संबंधों और शांति स्थापना और भविष्य में वैश्विक स्तर पर रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका के लिए आशा की किरण के रूप में भी तैयार है।
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