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भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा गलियारों में निवेश बढ़ाने का आग्रह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के ‘नए भारत’ के विजन को साकार करने के लिए भारतीय रक्षा उद्योग से ऐसे अत्याधुनिक किफायती उत्पादों/प्रौद्योगिकियों की पहचान और निर्माण करने का आह्वान किया है जो न केवल अपनी जरूरतों, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं को भी पूरा करते हों। वह 27 सितंबर, 2022 को नई दिल्ली में सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के 5वें वार्षिक सत्र को संबोधित कर रहे थे।

राजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि सरकार दोषमुक्‍त सुरक्षा प्रणाली के महत्व को बखूबी समझती है तथा देश को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के सभी आयामों को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्‍होंने कहा, “सुरक्षित और सुदृढ़ राष्ट्र ही सफलता की ऊंचाइयां छू सकता है। कोई राष्ट्र चाहे कितना भी समृद्ध या जानकार क्यों न हो, यदि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो, तो उसकी समृद्धि भी खतरे में पड़ जाती है। भारत को दुनिया के सबसे मजबूत देशों में शुमार करने के लिए हम राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी निजी क्षेत्र को व्‍यापक बदलाव लाने वाला मानते थे और प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार उस विजन को अत्‍यंत उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में रक्षा मंत्रालय द्वारा किए गए अनेक सुधारों ने देश के समग्र विकास के साथ-साथ रक्षा कंपनियों का स्वयं का विकास सुनिश्चित करने के लिए भी सक्षम वातावरण का निर्माण किया है।

निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्‍लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2022-23 में पूंजीगत खरीद बजट का 68 प्रतिशत घरेलू उद्योग के लिए निर्धारित किया गया है, जिसमें से 25 प्रतिशत निजी क्षेत्र के लिए आवंटित किया गया है। इसके अलावा, रक्षा अनुसंधान एवं विकास के बजट का 25 प्रतिशत निजी उद्योग और स्टार्ट-अप के लिए रखा गया है जो भारत में नई रक्षा प्रौद्योगिकियों के नवाचार का मार्ग प्रशस्त करेगा। अन्य उपायों में सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी करना; रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 का अनावरण; सामरिक साझेदारी मॉडल और इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्‍स) पहल के माध्यम से लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक और पनडुब्बियों सहित विशाल रक्षा कार्यक्रम के निर्माण के अवसरों को खोलना शामिल है, जिसने रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों में नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास का वातावरण तैयार किया है।

रक्षा मंत्री ने इंगित किया कि लगातार विकसित हो रहे वैश्विक परिदृश्य ने दुनिया भर में सैन्य उपकरणों की मांग बढ़ा दी है, जिससे देश अपनी सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने उद्योग जगत से भारतीय रक्षा क्षेत्र के मौजूदा स्वर्णिम काल का लाभ उठाने का आग्रह करते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करने के उद्देश्‍य से उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित दो रक्षा गलियारों में निवेश में वृद्धि के माध्यम से अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

राजनाथ सिंह ने कहा, “स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) की हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में, विश्व सैन्य खर्च पहली बार 2 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया। इसमें 2020 की तुलना में 0.7 प्रतिशत और 2012 की तुलना में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आने वाले वर्षों में हमारे सशस्त्र बल भी पूंजीगत खरीद पर पर्याप्त राशि व्‍यय करेंगे। यह दर्शाता है कि दुनिया की सुरक्षा संबंधी जरूरतें बढ़ने वाली हैं। भारत गुणवत्ता और किफायत दोनों ही संदर्भों में उन जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, शिक्षा और अनुसंधान एवं विकास संगठनों को एसआईडीएम के साथ अपने नोडल प्‍वाइंट के रूप में मिल-जुल कर काम करना जारी रखना चाहिए।”

रक्षा मंत्री ने इस तथ्य की सराहना करते हुए कहा कि सरकार की ओर से किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं, क्योंकि घरेलू उद्योग को दिए जाने वाले अनुबंधों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, अनुसंधान और विकास, स्टार्ट-अप, नवाचार और रोजगार में वृद्धि के साथ, 10,000 से अधिक एमएसएमई रक्षा क्षेत्र में शामिल हो गए हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा, “सात-आठ साल पहले, हमारा रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ रुपये का भी नहीं था, जो अब 13,000 करोड़ रुपये को पार कर चुका है। हमने वर्ष 2025 तक 1.75 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें 35,000 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है।”

रक्षा शेयरों में हाल ही में आए उछाल का उल्‍लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि कंपनियों का बढ़ता बाजार मूल्यांकन, राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देने वाली इकाइयों के प्रति बड़े निवेशकों, सेवाओं और राष्ट्र के भरोसे का प्रतिबिंब है।

एसआईडीएम को सरकार और उद्योग के बीच सेतु करार देते हुए राजनाथ सिंह ने कंपनियों से किसी भी तरह के प्रश्न और शिकायत के लिए एसोसिएशन से संपर्क करने का आग्रह करते हुए रक्षा मंत्रालय की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जहां एक ओर उद्योग की अपनी बैलेंस शीट के प्रति जिम्मेदारी है, वहीं राष्ट्र के प्रति भी उसका उत्‍तरदायित्‍व है। राजनाथ सिंह ने उनसे अपनी आपूर्ति श्रृंखला के एमएसएमई और वेंडर्स को समय पर भुगतान करने सहित सभी हितधारकों के हितों का पूरा ध्यान रखने, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देने और कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का भी आह्वान किया।

रक्षा मंत्री ने एसआईडीएम की उन्‍नति की सराहना करते हुए कहा कि इसकी स्थापना के केवल पांच वर्षों में ही, लगभग 500 सदस्य इसमें शामिल हो चुके हैं, जो भारतीय रक्षा उद्योग की प्रगति का संकेतक है। उन्‍होंने दिल्ली के बाहर एसआईडीएम के विस्तार को उद्योग के विश्‍वास के प्रतिबिंब और साथ ही साथ स्थानीय कंपनियों के हितों की रक्षा के प्रति एसोसिएशन के संकल्प के रूप में वर्णित किया, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

एसआईडीएम के 5वें वार्षिक सत्र का आयोजन ‘इंडिया@75: शेपिंग फॉर इंडिया@100’ की थीम पर आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य भारत को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में शीर्ष देशों में शामिल करना है। इस सत्र में रक्षा मंत्रालय, भारतीय सशस्त्र बलों, उद्योग जगत और भारत में विदेशी रक्षा अटैचियों के शीर्ष नेतृत्व, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी, नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल एस एन घोरमडे, थल सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बी एस राजू, एसआईडीएम के अध्यक्ष एसपी शुक्ला मौजूद रहे।

इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने एसआईडीएम चैंपियंस अवार्ड के दूसरे संस्करण के विजेताओं को सम्मानित किया। विजेताओं में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत फोर्ज लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड शामिल रहे, जिन्हें क्षमता संबंधी कमियों को दूर करने के लिए प्रौद्योगिकीय नवाचार, डिजाइन/विकास और परीक्षण के लिए आयात प्रतिस्थापन तथा अवसंरचना जैसी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

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