केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान; प्रधानमन्त्री कार्यालय (पीएमओ), कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत की कोविड सफलता की कहानी को संकट प्रबंधन में एक रोल मॉडल के रूप में दुनिया भर में सराहा जाता है।
आज नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में “महामारी पर आपदा प्रतिरोधी कार्यप्रणाली” पर राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत का कोविड प्रबंधन बेहद सफल रहा। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान, जब दुनिया ने सोचा कि भारत सबसे बड़ा कोविड हॉटस्पॉट होगा, तब हम और मजबूत होकर उभरे तथा 2 वर्ष के भीतर, 2 टीकों के साथ सामने आए और उन्हें दुनिया भर के 50 से अधिक देशों को प्रदान किया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अन्य देशों की तुलना में भारत की कोविड के खिलाफ रणनीति दुनिया के किसी भी अन्य देशों की तुलना में अधिक प्रभावी थी। इस महामारी के कारण हमें अपनी व्यवस्था की कमियों के साथ-साथ उसकी ताकत का भी पता चला। उन्होंने कहा कि महामारी की शुरुआत से ही, प्रधानमंत्री मोदी दिन में दो बार व्यक्तिगत रूप से कोविड प्रबंधन की निगरानी करते थे।
मंत्री ने कहा कि भारत में गहरी और मजबूत अंतर्निहित क्षमता है। कोविड से पहले देश प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के लिए नहीं जाना जाता था। लेकिन विपरीत परिस्थितियों को सद्गुण में बदलते हुए भारत प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का रोल मॉडल बनकर उभरा है यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा दुनिया को दी गई सफलता की सबसे अच्छी कहानियों में से एक है। उन्होंने कहा कि इसने वैश्विक मंच पर हमारा सम्मान बढ़ाया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हर चुनौती के साथ देश मजबूत होकर उभरा है और ऐसा इसलिए है क्योंकि मई 2014 से ही हमारे प्रधानमंत्री देश को विभिन्न आपदाओं के लिए तैयार कर रहे हैं। 2015 के नेपाल भूकंप या सार्क उपग्रह को लॉन्च करने के दौरान भारत द्वारा प्रदान की गई सहायता का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि हम न केवल अपने समुदाय बल्कि हमारे पड़ोसी समुदायों की भी सेवा कर रहे हैं, जो कि हमारे भारतीय लोकाचार में निहित है।
मंत्री महोदय ने कहा कि उस विनाशकारी और अराजक स्थिति में पहले लॉकडाउन के दौरान, गैर सरकारी संगठन, सरकार और कॉरपोरेट्स इस स्थिति से निपटने के लिए एक साथ आए। स्पार्क, पुणे और आरएसएस जनकल्याण पुणे इस समय के दौरान किए गए कार्यों पर केस स्टडी के रूप में प्रकाश डालते हैं जिन्हें आज प्रकाशित किया जाना है। हालांकि इन पुस्तकों में पश्चिमी महाराष्ट्र की केस स्टडीज शामिल हैं और मेरा मानना है कि यह पूरे भारत में जीवीपी मॉडल में किए गए काम का एक छोटा प्रतिनिधित्व है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में केस स्टडी से जो व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है, वह सभी आपदा प्रबंधन केंद्रों/संस्थानों और विश्वविद्यालयों में संदर्भ के रूप में काम आना चाहिए।
मंत्री महोदय ने उल्लेख किया कि कोविड ने न केवल हमें प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटना सिखाया है बल्कि युवाओं में जैव प्रौद्योगिकी के लिए अब तक अनदेखी रुचि पैदा की है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले केवल 50 बायोटेक स्टार्टअप थे, लेकिन अब लगभग 6,000 हैं। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 8 वर्षों में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में 10 अरब (बिलियन) डॉलर से बढ़कर 2022 में 80 अरब (बिलियन) डॉलर से अधिक हो गई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह कहते हुए अपनी बात समाप्त की कि आज के युवा भारत @2047 को उस समय परिभाषित करेंगे जब भारत अपनी स्वतंत्रता शताब्दी मनाएगा क्योंकि उनके पास अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘नए भारत’ के निर्माण में योगदान करने का विशेषाधिकार और अवसर है।
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