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भारत और लिथुआनिया ने आपसी समुद्री संबंधों पर चर्चा की; वर्ष 2022-23 में दोनों देशों के बीच 472 मिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर और लिथुआनिया के विदेश मामलों के उप मंत्री एगिडिजस मिलुनास ने आज नई दिल्ली में बैठक की। इस बैठक में भारत और लिथुआनिया के बीच द्विपक्षीय समुद्री संबंधों को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों मंत्रियों ने भारत और लिथुआनिया के बीच मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों की सराहना की।

इस बैठक के दौरान शांतनु ठाकुर ने लिथुआनिया के विनियस में भारत के रेजिडेंट मिशन के उद्घाटन पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता का एक और उदाहरण है। यह काफी संतुष्टि की बात है कि हालिया वर्षों हमारे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।” साल 2022-23 में भारत और लिथुआनिया के बीच 472 मिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ था।

दोनों मंत्रियों ने लिथुआनिया स्थित क्लेपेडा पत्तन के पूरे साल बर्फ मुक्त रहने के अनोखे लाभ पर चर्चा की। उन्होंने क्षेत्र में आपसी सहयोग के इस अवसर को रेखांकित किया और पत्तन बुनियादी ढांचे के विकास में भारत की विशेषज्ञता व पूर्वी यूरोप में महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों के प्रवेश द्वार के रूप में लिथुआनिया की रणनीतिक भौगोलिक अवस्थिति पर विचार-विमर्श किया।

क्लेपेडा पत्तन 400 मीटर लंबे, 59 मीटर तक चौड़े और 13.8 मीटर के अधिकतम ड्राउट (ड्राफ्ट) वाले पोतों को जगह दे सकता है। क्लेपेडा पत्तन कंटेनर ट्रांसशिपमेंट के लिए अग्रणी बाल्टिक बंदरगाह है। पूर्व के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों से इसकी जमीनी दूरी सबसे कम है। विभिन्न यूरोपीय पत्तनों के लिए मुख्य शिपिंग लाइनें क्लेपेडा से होकर ही गुजरती हैं। इस पत्तन का दो रेलवे स्टेशनों और एक राजमार्ग से संपर्क स्थापित किया गया है, जो क्लेपेडा को कौनास, विनियस और नजदीक के शहरों जैसे कि मिन्स्क, कीव और मॉस्को से जोड़ता है।

भारत अपनी समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने, व्यापार दक्षता बढ़ाने और वैश्विक समुद्री उद्योग में एक प्रमुख देश के रूप में उभरने का प्रयास कर रहा है। इसके तहत भारत, लिथुआनिया के लिए विभिन्न उपक्षेत्रों में निवेश के अनेक अवसर उत्पन्न कर रहा है। इसके तहत पत्तन आधुनिकीकरण (पीपीपी), पत्तन संपर्क, तटीय नौपरिवहन, समुद्री प्रौद्योगिकी, विभिन्न सागरमाला परियोजनाएं और डीकार्बोनाइजेशन पहल शामिल हैं।

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