भारत और ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम) मिलकर भारत-यूके “सकल शून्य (नेट जीरो)’ नवाचार आभासी केंद्र (इनोवेशन वर्चुअल सेंटर) बनाएंगे।
अपने ब्रिटिश समकक्ष ब्रिटेन के मंत्री जॉर्ज फ्रीमैन उपस्थिति में भारत–यूके विज्ञान एवं नवाचार परिषद (इंडिया- यूके साइंस एंड इनोवेशन काउंसिल) की बैठक की अध्यक्षता करते समय यह घोषणा करते हुए, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी त्तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ; प्रधानमन्त्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लंदन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी असाधारण तकनीकी और नवीन क्षमताओं से प्रेरित होकर तेजी से एक आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, जिसे पूरी दुनिया ने विशेष रूप से कोविड वैक्सीन की सफलता की कहानी के बाद, स्वीकार करना शुरू कर दिया है।
दोनों नेताओं ने भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाने का आह्वान किया।
सह-अध्यक्ष मंत्री फ्रीमैन के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और राष्ट्र अब समय पर अपने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने महत्वाकांक्षी ‘रोडमैप 2030’ के माध्यम से दोनों देशों के बीच मजबूत हुए घनिष्ठ सहयोग पर प्रकाश डाला, जो स्वास्थ्य, जलवायु, व्यापार, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा रक्षा में यूके-भारत संबंधों के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है।
भारतीय मंत्री ने अपने ब्रिटिश समकक्ष को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ब्रिटेन (यूके) भारत का दूसरा सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान और नवाचार भागीदार बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि भारत- यूके विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एसएंडटी) सहयोग तीव्र गति से बढ़ रहा है और संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम लगभग शून्य आधार से अब 30 – 40 करोड़ पाउंड के निकट करीब पहुंच गया है।
दोनों मंत्रियों ने एक भारत-यूके ‘सकल शून्य (नेट जीरो)’ नवाचार आभासी केंद्र (इनोवेशन वर्चुअल सेंटर) बनाने के प्रस्ताव की सराहना की, जो दोनों देशों के हितधारकों को एक साथ लाने के लिए एक ऐसा मंच प्रदान करेगा, जिसमें विनिर्माण प्रक्रिया और परिवहन प्रणालियों और नवीकरणीय एवं अक्षय ऊर्जा स्रोत के रूप में हरित हाइड्रोजन को कार्बन रहित बनाने (डीकार्बोनाइजेशन) सहित कुछ केन्द्रित क्षेत्रों में काम किया जाएगा। भारत की शुद्ध शून्य यात्रा के मुद्दे पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा वे केंद्रीय स्तंभ हैं जहां भारत पहले ही भारत सौर गठबंधन, स्वच्छ ऊर्जा मिशन आदि जैसी विभिन्न पहलों का नेतृत्व कर चुका है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 75 वर्षों के दौरान, भारत एक विकासवादी यात्रा से गुजरा है जिसने हमें वैश्विक देशों के बीच एक आर्थिक और राजनीतिक पहचान बनाने में सहायता की है। उन्होंने कहा कि आज जब भारत अपनी आजादी के 75वें वर्ष का उल्लास मना रहा है, तब भारत @100 के लिए अगले 25 वर्षों का रोडमैप जीवन के सभी क्षेत्रों में वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचारों द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है, क्योंकि इसने हमें एक बार फिर याद दिलाया है कि हम सभी एक ग्रह पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी आशा है कि आज हस्ताक्षरित भारत यूके सम्झौयता ज्ञापन (एमओयू) आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार और उसे अधिकतम किए जाने के माध्यम से दीर्घकालिक सतत विकास के लिए दोनों देशों में अनुसंधान और नवाचार का समर्थन करने के लिए एक विशाल तंत्र प्रदान करेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बहुआयामी, बहु-संस्थागत, बहु-एजेंसी सहयोग में ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य और कृषि, जल, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण अध्ययन के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन शामिल हैं जो दोनों देशों में हो रहे हैं। उन्होंने याद किया कि मई 2021 के दौरान आयोजित पिछले भारत यूके आभासी (वर्चुअल) शिखर सम्मेलन के दौरान, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने विज्ञान, शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में एक बढ़ी हुई साझेदारी के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया और अगली मंत्रिस्तरीय विज्ञान और नवाचार परिषद (एसआईसी) की प्रतीक्षा की।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हाल के दिनों में, भारत सरकार अंत: विषयी साइबर भौतिक प्रणालियाँ (इंटरडिसिप्लिनरी साइबर फिजिकल सिस्टम्स – आईसीपीएस) पर राष्ट्रीय मिशन जैसी कई प्रमुख पहलें शुरू की हैं; क्वांटम कम्प्यूटिंग और संचार; सुपरकंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन आदि जैसी कई प्रमुख पहलें शुरू की हैं, जो सहयोग के नए अवसर प्रदान करती हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने उल्लेख किया कि भारत पर्यावरणीय लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन को कम करने और महत्वाकांक्षी शुद्ध शून्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पर्यावरण प्रदूषण और तकनीकी आधारित मार्गों के लिए शमन उपायों के विकास और निगरानी समाधानों हेतु निरंतर प्रयास शामिल हैं।
आर्थिक वृद्धि और विकास के लिए उद्योग- अकादमिक सहयोग के महत्व के बारे में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग नवाचार यूके औद्योगिक अनुसन्धान एवं विकास कार्यक्रम (डीएसटी इनोवेट यूके इंडस्ट्रियल आर एंड डी प्रोग्राम) को पुनर्जीवित करने से भारतीय और ब्रिटिश (यूके) शिक्षाविदों और उद्योग को दोनों देशों की प्रगति एवं आर्थिक विकास के लिए नए उत्पादों/प्रक्रियाओं को एक साथ विकसित करने का अवसर मिलेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत में गहन महासागर अभियान डीप ओशन मिशन) के अंतर्गत महासागरीय जैव विविधता की खोज और संरक्षण की दिशा में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) – नेकटन संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम के साथ-साथ मौसम और जलवायु विज्ञान में एमओईएस और यूके मौसम विभाग (मेट ऑफिस) सहयोग पर संतोष व्यक्त किया, जिसका उद्देश्य दक्षिण एशियाई मानसून प्रणाली में, विभिन्न पैमानों पर मॉडलिंग क्षमताओं में सुधार करना और एक मौसम तक पूर्वानुमान समय- सीमाओं की एक सीमा पर प्राकृतिक खतरों के जोखिम आधारित (एनसेंबल) पूर्वानुमान के लिए उपकरणों और तकनीकों में सुधार करना तथा प्राकृतिक खतरों पर संयुक्त अनुसंधान करना है।
दोनों नेताओं ने पशु फार्मों में होने वाले रोगों एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में बायोटेक्नोलॉजी एंड बायोलॉजिकल साइंसेज रिसर्च काउंसिल – जैव प्रौद्योगिकी विभाग (बीबीएसआरसी-डीबीटी) के बीच और ठोस पृथ्वी खतरों (सॉलिड अर्थ हैजर्ड्स) के क्षेत्र में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय–नार्थ अमेरिकन इलेक्ट्रिक रिलाएबिलिटी कारपोरेशन (एमओईएस – एनईआरसी) कॉल के बीच संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के लिए नए सहयोग का आह्वान किया।
6 जुलाई 2023 को मुंबई में जी 20 अनुसंधान मंत्रियों की बैठक के लिए मंत्री फ्रीमैन को आमंत्रित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत इस वर्ष जी 20 की अध्यक्षता कर रहा है और विज्ञान 20 (एस20), अनुसंधान और नवाचार समूह (आरआईआईजी) और वैज्ञानिक सलाहकारों की बैठकों सहित वैज्ञानिक क्षेत्रों में कई बैठकों का आयोजन कर रहा है। उन्होंने दोनों देशों के वैज्ञानिक समुदाय से इन बैठकों में भाग लेने का आग्रह किया।
डॉ जितेंद्र सिंह ने एसआईसी बैठक के सफल आयोजन के लिए ब्रिटिश मंत्री फ्रीमैन और उनकी टीम को धन्यवाद देते हुए अपनी बात का समापन किया। दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (एसएंडटी) सहयोग की भी समीक्षा की और नई दिल्ली में आयोजित पिछली एसआईसी बैठक के बाद से हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
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