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भारत और डेनमार्क ने IWA वर्ल्ड वाटर कांग्रेस में ‘भारत में शहरी अपशिष्ट जल परिदृश्य’ पर प्रकाश डालते हुए श्वेत पत्र जारी किया

जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, डेनमार्क की पर्यावरण मंत्री ली वर्मेलिन और सहकारिता विकास मंत्री फ्लेमिंग मोलर मोर्टेंसन ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ 12 सितंबर, 2022 को कोपनहेगन में इंटरनेशनल वाटर एसोसिएशन (आईडब्ल्यूए) वर्ल्ड वाटर कांग्रेस और प्रदर्शनी 2022 में ‘भारत में शहरी अपशिष्ट जल परिदृश्य’ पर एक श्वेतपत्र जारी किया।

अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम), नीति आयोग, जल शक्ति मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), इंटरनेशनल एजेंसी इनोवेशन सेंटर डेनमार्क (आईसीडीके) और अकादमिक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (आईआईटीबी) के भागीदारों के साथ शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन पर एक श्वेत पत्र तैयार करने के लिए भारत सरकार के एक बहुविषयक दल का गठन किया गया था।

अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए सभी हितधारकों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, यह श्वेतपत्र समग्र रूप से भारत में अपशिष्ट जल उपचार की वर्तमान स्थिति और भविष्य की उपचार संरचनाओं, सह-निर्माण और सहयोग के लिए सामूहिक रूप से तैयार किए गए संभावित रास्तों को दर्शाता है।

एआईएम-नीति आयोग, आईसीडीके, एनसीएमजी और आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञों द्वारा क्यूरेट किया गया, श्वेतपत्र सफलता की कुछ कहानियों, अपशिष्ट जल उपचार की आवश्यकता, मौजूदा बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकियों में सुधार तथा वृद्धि की गुंजाइश, सार्वजनिक भागीदारी दृष्टिकोण के तरीकों, वित्तपोषण और सह-वित्तपोषण के विकल्प, तेजी से डेटा संग्रह के लिए स्मार्ट टेक्नोलॉजी और भारत में शहरी अपशिष्ट जल उपचार की दक्षता बढ़ाने के लिए शीर्ष निकायों के प्रशिक्षण और साझेदारों के माध्यम से प्रसार और क्षमता निर्माण की जानकारी उजागर करता है।

यह श्वेतपत्र भारत और डेनमार्क के बीच ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और अपशिष्ट जल प्रबंधन और उनके द्विपक्षीय संबंधों पर ध्यान देने के साथ हरित रणनीतिक साझेदारी का परिणाम है।

इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा, “समग्र जल प्रबंधन के महत्व को मान्यता देते हुए, हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पानी से जुड़े विभिन्न कार्यों को एक जगह पर लागर 2019 में जल शक्ति नाम से एकीकृत मंत्रालय का गठन किया। इसने भारत में जल प्रबंधन के लिए अधिक तालमेल और सुसंगतता प्रदान की है और हमने जल क्षेत्र में 2024 तक 140 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। सरकार से बड़े पैमाने पर निवेश के साथ, हमने समुदाय केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें समुदाय के स्वामित्व और भागीदारी को सुनिश्चित करने वाले प्रत्येक कार्यक्रम में समुदाय द्वारा कम से कम 10 प्रतिशत राशि का योगदान दिया जाता है।”

इस बीच, भारत में शहरी अपशिष्ट जल परिदृश्य पर श्वेतपत्र पर चर्चा करते हुए, नीति आयोग में वाटर वर्टिकल, सलाहकार अविनाश मिश्रा ने कहा, “यह श्वेत पत्र भारतीय शहरी अपशिष्ट जल क्षेत्र का एक सीधा विवरण है। हालांकि दुनिया भर में इसमें एक समानता है। भारत का प्राचीन ज्ञान बताता है कि ‘संपूर्ण विश्व एक परिवार है,’ जो आम मुद्दों को हल करने के लिए मानव निर्मित सीमाओं से आगे बढ़ने की आवश्यकता को प्रतिपादित करता है। सामूहिक वैश्विक सोच और ठोस स्थानीय कार्रवाई समस्या से निपटने के लिए रणनीतिक मॉडल होना चाहिए या शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन का अवसर। जब शहर स्मार्ट हो रहे हैं, तो पानी की अनदेखी नहीं की जा सकती।”

भारत-डेनमार्क द्विपक्षीय हरित रणनीतिक साझेदारी के हिस्से के रूप में अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम), नीति आयोग ने डेनमार्क दूतावास के तहत एक इकाई- इनोवेशन सेंटर डेनमार्क (आईसीडीके) और डेनमार्क टेक्नीकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) के साथ साझेदारी में भारत में जल नवाचार चुनौतियां एआईएम- आईसीडीके डिजाइन के तहत पूर्व में योजना बनाई और उसे कार्यान्वित किया।

इन चुनौतियों को भारत के होनहार नवोन्मेषकों की पहचान करने के लिए रखा गया था, जो आईडब्ल्यूए और डेनमार्क टेक्नीकल यूनिवर्सिटी की मेजबानी में अगली पीढ़ी के वैश्विक जल कार्य कार्यक्रम में भारतीय भागीदारी का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

शैक्षणिक संस्थान- आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास में इंटरनेशनल सेंटर फॉर क्लियर वाटर और इनक्यूबेटर पार्टनर्स- एआईसी- संगम और एआईसी एफआईएसई टीमों का मार्गदर्शन करेंगे। भारत की समस्याओं पर काम करने वाली टीमों को जल विशेषज्ञों के एक सावधानीपूर्वक क्यूरेटेड और शानदार पैनल द्वारा मेंटरशिप सहायता प्रदान की गई।

इसके बाद, डेनमार्क के दूतावास ने अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग की साझेदारी से एआईएम- आईसीडीके- 2.0 जल नवाचार चुनौती फिर से आयोजित की।

नेक्स्ट जेनरेशन वाटर एक्शन (एनजीडब्ल्यूए) आईडब्ल्यूए वर्ल्ड वाटर कांग्रेस और प्रदर्शनी 2022 के दौरान और उसके बाद अग्रणी विश्वविद्यालयों और नवाचार केंद्रों से युवा प्रतिभाओं को शामिल करने की महत्वाकांक्षा के साथ एक अंतरराष्ट्रीय पहल है।

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