समुद्री निगरानी और रोक या इंटरडिक्शन क्षमताओं को प्रमुखता से बढ़ावा देते हुए भारतीय तट रक्षक ने भारत सरकार की ड्रोन प्रौद्योगिकी अपनाने की नीति के अनुरूप 10 मल्टीकॉप्टर (वीटीओएल) ड्रोन के लिए पहला अनुबंध संपन्न किया है।
ये ड्रोन चलते जहाजों के साथ ही साथ शोर स्टेशनों, दोनों स्थानों से लॉन्च किए जा सकते हैं और आईसीजी इकाई के निगरानी और सुरक्षा परिचालनों के दौरान ये अपने दायरे के भीतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में समर्थ होंगे। इसके अलावा, ये ड्रोन दिन के साथ-साथ रात में भी तलाश और बचाव (एसएआर) में सहायता करने वाले हैं। आईसीजी ने भारत के समुद्री क्षेत्रों तथा तलाश एवं बचाव के कार्य में लगातार बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए 2025 तक 100 अतिरिक्त ड्रोन शामिल करने की योजना बनाई है।
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