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भारतीय चाय उद्योग को बढ़ावा देने, उभरती चुनौतियों पर ध्‍यान देने और एक वैश्विक ब्रांड का निर्माण करने के लिए कई कदम उठाए गए

भारत ने उत्पादन को बढ़ावा देने, भारतीय चाय के लिए एक उत्‍कृष्‍ट ब्रांड का निर्माण करने और चाय उद्योग से जुड़े परिवारों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

भारत लगभग 1350 मिलियन किलोग्राम उत्पादन के साथ दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक और सबसे बड़ा काली चाय उत्पादक है तथा घरेलू आवश्यकताओं और निर्यात दायित्वों को पूरा करने के लिए आत्मनिर्भर है। भारत काली चाय का सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है और विश्व की कुल चाय खपत का लगभग 18 प्रतिशत उपभोग करता है। भारतीय चाय को विभिन्न गंतव्यों देशों में निर्यात किया जाता है और यह बड़ी संख्या में घरेलू उपभोक्ताओं की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के अतिरिक्‍त चाय का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक है।

भारतीय चाय उद्योग में प्रत्यक्ष रूप से 1.16 मिलियन श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है और समान संख्‍या में लोग इससे अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।

छोटे चाय उत्पादक उभरते हुए क्षेत्र हैं जो कुल उत्पादन में लगभग 52 प्रतिशत का योगदान देते हैं। वर्तमान में, आपूर्ति श्रृंखला में लगभग 2.30 लाख छोटे चाय उत्पादक मौजूद हैं। इस वर्ग के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

चाय बोर्ड के माध्यम से भारत सरकार ने 352 स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), 440 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और 17 किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) के निर्माण में सहायता की थी।

गुणवत्तापूर्ण तुड़ाई, क्षमता निर्माण, त्‍वरित फसल प्रबंधन आदि के लिए एसटीजी के साथ विभिन्न संगोष्ठियों/परस्‍पर वार्ताओं का आयोजन किया जाता है।

प्रूनिंग मशीन और मैकेनिकल हार्वेस्टर की खरीद के लिए सहायता।

उद्यमियों और बेरोजगार युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए लघु चाय कारखानों की स्थापना।

चाय बोर्ड ने विनिर्माताओं और उत्पादकों के बीच आपूर्ति की जाने वाली हरी पत्तियों की कीमत के निर्धारण के लिए मूल्‍य साझाकरण फॉर्मूले के लिए एक निविदा जारी की, जिससे वैज्ञानिक तरीके से बड़ी संख्या में लोग लाभान्वित होंगे। यह अभी प्रक्रियाधीन है। बेहतर मूल्य प्राप्ति और सूचना के मामले में छोटे चाय उत्पादकों की सहायता के लिए एक मोबाइल ऐप “चाय सहयोग” भी विकसित किया जा रहा है।

चाय बोर्ड ने उनकी आजीविका और शिक्षा की आवश्‍यकताओं में सुधार लाने के लिए “छोटे चाय उत्पादकों के बच्चों को शिक्षा वृत्तिका की सहायता” की स्‍कीम तैयार की थी।

वर्ष 2022-23 के दौरान जनवरी, 2023 तक 2845 लोगों को लाभान्वित करते हुए इस घटक के लिए 3.25 करोड़ रुपये का संवितरण किया गया।

भारतीय चाय निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती से प्रतिस्पर्धा करता रहा है और अपने लिए एक स्‍थान बनाने में सक्षम है। 2022-23 के दौरान, विभिन्न भू-राजनीतिक, भू-आर्थिक और लॉजिस्टिक संबंधी चुनौतियों के बावजूद भारतीय चाय निर्यात के 883 मिलियन डॉलर के निर्धारित लक्ष्य का 95 प्रतिशत से अधिक अर्जित करने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्‍त , हाल में प्राप्‍त निर्यातकों के इनपुट के अनुसार, कंटेनरों की उपलब्धता आदि जैसी लॉजिस्टिक संबंधी बाधाओं को दूर कर दिया गया है।

इसमें चाय उद्योग की सहायता के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

बाजार आसूचना रिपोर्ट और चाय के निर्यात में और वृद्धि की संभावनाओं की खोज करने के लिए विदेशों में भारतीय मिशनों की सहायता से विशेष रूप से इराक, सीरिया, सऊदी अरब, रूस आदि जैसे रूढ़िवादी चाय आयातक देशों के संबंध में नियमित अंतरालों पर विभिन्न क्रेता-विक्रेता बैठकें आयोजित की जा रही हैं। मलेशिया के लिए भी बीएसएम था।

चाय बोर्ड के निरंतर अनुनय के आधार पर चाय निर्यात के लिए रोटडेप दर में पहले के 3.60 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में 6.70 रुपये प्रति किलोग्राम रुपये की बढ़ी हुई अधिकतम सीमा के साथ बढ़ोतरी कर दी गई है।

चालू वित्त वर्ष के दौरान दिसंबर, 2022 तक, चाय निर्यात ने 641.34 मिलियन डालर के मूल्य प्राप्ति के साथ 188.76 मिलियन किलोग्राम मात्रा दर्ज की, मात्रा में 33.37 मिलियन किलोग्राम की वृद्धि (21.47 प्रतिशत वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि) और मूल्य में 70.93 मिलियन डालर (12.43 प्रतिशत वृद्धि वर्ष दर वर्ष) की वृद्धि दर्ज की गई।

भारतीय चाय की ब्रांडिंग, उपभोग के लिए इसके स्वास्थ्य़, लाभ आदि के लिए मीडिया अभियानों का व्‍यापक स्‍तर पर उपयोग किया जाता है।

उन सभी महत्वपूर्ण मंचों और कार्यक्रमों में विशिष्‍ट चाय प्रतीक चिन्‍हों को प्रदर्शित किया जाता है जिनमें टीबीआई भाग लेता है और हितधारकों को इन प्रतीक चिन्‍हों के उपयोग के लिए उचित दिशा-निर्देशों का पालन करने की सुविधा प्रदान की जाती है।

दार्जिलिंग चाय भारत के प्रतिष्ठित उत्पादों में से एक है जो पहला जीआई पंजीकृत है। यह दार्जिलिंग जिले के पर्वतीय क्षेत्र में 87 चाय बागानों में फैला हुआ है। चाय बागानों में 70 प्रतिशत से अधिक झाड़ियाँ 50 वर्ष से अधिक पुरानी हैं और इस प्रकार उत्पादकता को प्रभावित करती हैं। वर्तमान में दार्जिलिंग चाय का उत्पादन 6-7 एम कि.ग्रा. की सीमा में है। नेपाल चाय के सस्ते आयात की चुनौती सहित, दार्जिलिंग चाय उद्योग की चिंताओं को दूर करने के लिए चाय बोर्ड द्वारा दार्जिलिंग चाय उद्योग के हितधारकों के साथ समिति गठित की गई है और यह संभावित समाधानों की खोज कर रही है। सस्ते आयातित चाय की गुणवत्ता की सख्‍त जांच के लिए चाय बोर्ड और मंत्रालय द्वारा विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं।

चाय बोर्ड ने “चाय विकास और संवर्धन स्‍कीम, 2021-26” में और संशोधन करने का सुझाव दिया है, जिसमें चाय उद्योग के समग्र लाभ के लिए कई घटक शामिल किए गए हैं। संवितरण और लाभार्थियों की पहचान में पारदर्शिता लाने के लिए “सर्विस प्लस पोर्टल” के तहत एक ऑनलाइन तंत्र कार्यान्वित किया गया है।

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