विश्व प्रसिद्ध ओड़िशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आज शुरू हो रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष यह यात्रा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होकर आषाढ़ शुक्ल की दशमी तक चलती है। इस रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ विराजमान होते हैं। इनके साथ बडे भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भी होती हैं। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा पुरी के मंदिर से निकलते हुए गुंडिचा मंदिर जाती है। इस गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा नौ दिन तक रुकते हैं।
पुरी श्रीमंदिर प्रशासन को इस रथ महोत्सव में करीब 13 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के सुचारू संचालन के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में वर्ष एक सौ अड़तालीस त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें बारह यात्राएं, अट्ठाईस उपयात्राएं और एक सौ आठ पर्व शामिल हैं। उनमें से रथ यात्रा सबसे प्रसिद्ध है। आज अनुष्ठान के कार्यक्रम के अनुसार दोपहर करीब 3 बजे श्रद्धालु रथ खींचेंगे। पुरी मंदिर से शुरू हुई यह यात्रा लगभग 3 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए श्री गुंडिचा मंदिर पर समाप्त होगी। यहां भगवान बलभद्र का तालध्वज पुरी के ग्रैंड मार्ग पर चलेगा। इसके साथ ही सबसे पहले देवी सुभद्रा का दर्पदलन भी पीछे-पीछे चलेगा। तीनों रथों में सबसे बड़ा भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष आगे बढ़ेगा। रथ सूर्यास्त से पहले गुंडिचा मंदिर पहुंच जाएंगे। गुंडिचा मंदिर में देवताओं का नौ दिनों का प्रवास होगा। और वे इसी महीने की 28 तारीख को ‘बहुदा यात्रा’ या वापसी कार उत्सव नामक रथ पर यात्रा पूरी करने के बाद ही मंदिर लौटते हैं।
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