उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) आत्मनिर्भर भारत के विज़न को पूरा करने के लिए सरकार की आधारशिला है। इसका उद्देश्य घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को वैश्विक रूप से स्पर्धी बनाना और मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में घरेलू चैम्पियन बनाना है। इस योजना के पीछे की रणनीति इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देना और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना है।
1 अप्रैल, 2020 को बड़े आकार के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग के लिए पीएलआई योजना अधिसूचित की गई थी। यह योजना मोबाइल फोन और निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों सहित ‘लक्ष्य वर्ग’ के तहत कवर किए गए विनिर्मित वस्तुओं की शुद्ध वृद्धिशील बिक्री पर 4 प्रतिशत से 6 प्रतिशत की प्रोत्साहन राशि देती है। इस योजना के तहत कुल परिव्यय 38,645 करोड़ रुपये है। इस योजना के अंतर्गत 16 कम्पनियों यानी मोबाइल फोन श्रेणी की 5 वैश्विक कम्पनियों (चालान मूल्य 15,000 रुपये और उससे अधिक), 5 घरेलू कम्पनियों और निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों के अंतर्गत 6 कम्पनियों को मंजूरी दी गई थी।
पीएलआई योजना के पहले दौर की सफलता के बाद निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों के लक्ष्य वर्ग के साथ पीएलआई योजना का दूसरा दौर 31/03/2021 तक खोला गया था जिसमें पात्र कम्पनियों को वृद्धिशील बिक्री पर 5 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक 4 वर्ष के लिए प्रोत्साहन दिया गया था। पीएलआई योजना के दूसरे दौर के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारियों द्वारा 16 कम्पनियों को मंजूरी दी गई थी।
पीएलआई योजना की अवधि एक वर्ष यानी 2024-25 से बढ़ाकर 2025-26 कर दी गई है। इस संबंध में 23/09/2021 को अधिसूचना जारी की गई थी। कुल 16 कम्पनियों में से 15 कम्पनियों ने विस्तार का विकल्प चुना।
अधिकार प्राप्त समिति (ईसी) ने आज परियोजना प्रबंधन एजेंसी मेसर्स आईएफसीआई लिमिटेड की सिफारिश के अनुसार बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग के लिए पीएलआई योजना के तहत मेसर्स पैजेट इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड को 53.28 करोड़ रुपये के पहले वितरण को मंजूरी दे दी। पैजेट इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड डिक्सन टेक्नोलॉजिज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड की 100 प्रतिशत सहायक कम्पनी है।
इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय 2021-22 के लिए अपने वितरण दावों को दाखिल करने के लिए अन्य पात्र आवेदकों से सम्पर्क कर रहा है। बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए पीएलआई योजना सर्वाधिक सफल योजना के रूप में उभरी है।
इस योजना से जून, 2022 तक 65,240 करोड़ रुपये के निर्यात सहित 1,67,770 करोड़ रुपये से अधिक का कुल उत्पादन हुआ है। पीएलआई योजना से 28,636 लोगों को रोजगार भी मिला है। पिछले तीन वर्षों में स्मार्ट फोन का निर्यात 139 प्रतिशत बढ़ा है।
आशा की जाती है कि 2025-26 तक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग बढ़कर 300 बिलियन डॉलर हो जाएगी। पीएलआई जैसी योजनाएं भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए एक स्पर्धी स्थान बनाएंगी और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए अधिक घरेलू चैम्पियन बनाएंगी।
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