संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज जोर देकर कहा कि फोन टैपिंग से जासूसी के आरोप पूरी तरह गलत और आधारहीन हैं। लोकसभा में अपने वक्तव्य में अश्विनी वैष्णव ने सभी संसद सदस्यों से आग्रह किया कि वो मामले से जुड़े तथ्यों और तर्कों की जांच करें। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट का आधार यह है कि किसी संगठन ने लीक हुए 50 हजार फोन नम्बर के डेटा का इस्तेमाल किया।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आरोप यह है कि जिन लोगों के फोन नम्बर लीक हुए, उनकी जासूसी की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार जिस भी व्यक्ति का फोन नम्बर इसमें शामिल है, उससे ये नहीं कहा जा सकता कि उसका मोबाइल उपकरण पेगासस से संक्रमित था या उसे हैक करने की कोशिश की गई थी। श्री वैष्णव ने कहा कि तकनीकी रूप से विश्लेषण किए बिना यह कह पाना संभव नहीं है कि मोबाइल उपकरण को हैक करने की कोशिश की गई थी या नहीं।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जिस भी व्यक्ति का फोन नम्बर सूची में शामिल है, उसका यह मतलब नहीं है कि उसकी जासूसी की गई है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि संसद के मॉनसून सत्र की पूर्व संध्या पर इस खबर का एक वेबसाइट पर प्रकाशित होना ही अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा के कड़े नियम हैं, जिसका आसानी से उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
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