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फेस्टिव सीजन में कार की डिलीवरी से पहले जांच जरूरी:7 स्टेप में PDI करने का तरीका समझें, नहीं तो डीलर डिफेक्टेड गाड़ी थमा सकता है

GST की नई दरें 22 सितंबर से लागू होने की वजह से कार की कीमतें 4 साल पहले के बराबर पहुंच गई हैं। इसके अलावा कंपनियां दिवाली डिस्काउंट भी दे रही हैं। ऐसे में अगर आप भी इस फेस्टिव सीजन में नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो डिलीवरी से पहले कुछ सावधानियां रखना जरूरी है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि कार खरीदने से पहले क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए। कार डीलर से कैसे डील करें और शोरूम से कार की डिलीवरी लेने से पहले प्री डिलीवरी इंस्पेक्शन (PDI) क्यों जरूरी है और इसे कैसे किया जाता है… सबसे पहले जानते हैं PDI क्या होता है? PDI यानी प्री डिलीवरी इंस्पेक्शन। यह एक प्रोसेस है, जिसमें कार की डिलीवरी से पहले इंस्पेक्शन फैसिलिटी मिलती है। इसमें कार के इंटीरियर, एक्सटीरियर, इंजन और सभी फीचर्स को चेक किया जाता है कि वे ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। PDI दो तरीके से किया जाता है। PDI क्यों जरूरी, कब और कहां करना चाहिए? PDI करने से पता चल सकता है कि कार में कोई दिक्कत तो नहीं है। कार डीलर को पहले से पता होता है कि कार में क्या प्रॉब्लम है और डिलीवरी से पहले किस तरह कस्टमर से उसे छिपाना है। इसलिए गाड़ी रजिस्टर होने से पहले ही कार का PDI कर लेना चाहिए। कार का PDI ऐसी जगह करना चाहिए जहां रोशनी अच्छी हो। इससे कार के सभी हिस्सों को देखने में आसानी होती है। किसी एक्सपर्ट, मैकेनिक या कारों के बारे में नॉलेज रखने वाले को साथ ले जाना फायदेमंद होगा। एक्सपर्ट न भी मिले तो खुद भी इसे कर सकते हैं। आइए जानते हैं PDI कैसे करते हैं… स्टेप-1 : चेक लिस्ट बनाएं स्टेप-2 : एक्सटीरियर स्टेप-3 : इंटीरियर स्टेप-4 : इंजन, ओडोमीटर और फ्यूल स्टेप-5 : कार के डॉक्युमेंट्स स्टेप-6 : टेस्ट ड्राइव लें स्टेप-7 : इंस्पेक्शन का वीडियो बनाएं सारी चीजें चेक करने के बाद ही उस कार को अपने नाम पर रजिस्टर्ड कराएं। रजिस्ट्रेशन होने के बाद उस कार पर नजर बनाए रखें। कार को वापस सर्विस सेंटर के अंदर न जाने दें। अगर कार को अंदर भेजना ही है तो किसी अन्य व्यक्ति को साथ भेजें। अगर आप और ज्यादा सिक्योर होना चाहते हैं तो पूरे इंस्पेक्शन का एक वीडियो बना लें। कार की डिलीवरी लेने के बाद क्या करें कार खरीदने के बाद उसके इनवॉइस (बिल) को अच्छी तरह से चेक कर लेना चाहिए। कई डीलर शुरू में गाड़ी के एक्स-शोरूम प्राइस पर इंश्योरेंस और RTO चार्ज जोड़कर ऑनरोड प्राइस बता देते हैं। गाड़ी खरीदने के बाद जब हम बिल देखते हैं तो काफी सारे हिडन चार्ज दिखते हैं, जैसे- फाइल चार्जेस, सर्विस चार्जेस, हैंडलिंग चार्जेस और एक्सेसरीज चार्जेस। कुल मिलाकर लगभग 5-10 हजार रुपए के हिडन चार्जेस लगा दिए जाते हैं। बता दें कि सर्विस चार्ज गैरकानूनी है। इस तरह का चार्ज आप अपने बिल में देखते हैं तो तुरंत ऑब्जेक्शन उठाएं या फिर बुकिंग के समय ही डीलर को क्लियर कर दें कि कोई हिडन चार्ज पे नहीं करेंगे। ये जरूरी टिप्स भी जान लें… चलते-चलते जान लेते हैं कार खरीदते समय क्या-क्या सावधानी रखनी चाहिए

Khushi Bhargav

I am Khushi Bhargav a passionate Content Writer at Vikral News, who loves to share informative and engaging content on Trending News, Lifestyle, Entertainment, Current Affairs, and Viral Stories.

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