केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने आज आयोजित किये गए दो प्रमुख तकनीकी कार्यक्रमों, इंडियन एक्सप्रेस डिजीफ्रॉड एंड सेफ्टी समिट 2023 और योरस्टोरी टेकस्पार्क्स 2023 में भाग लिया। राज्यमंत्री ने विस्तृत चर्चा में शामिल होते हुए कृत्रिम बुद्धिमता, तकनीकी नीति विनियमन और देश के आशाजनक भविष्य में भारत की यात्रा पर बल दिया।
राजीव चंद्रशेखर ने टेकस्पार्क्स 2023 कार्यक्रम में योरस्टोरी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और संस्थापक श्रद्धा शर्मा के साथ बातचीत के दौरान बताया कि भारत में पहले से ही उभरते हुए स्टार्टअप इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने में सरकार की काफी गहरी दिलचस्पी है।
सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री ने कहा कि हमारा ध्यान स्टार्टअप्स, नवाचार और कोष की उपलब्धता तथा कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर है। जनवरी में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्टार्टअप्स के लिए भारत में बेहतर मात्रा में जीपीयू क्षमता स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की थी, ताकि हम सभी अपने नवाचार तथा मूलभूत मॉडलों तक पहुंच सकें और उन्हें आगे ला सकें। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से प्रसन्नता व्यक्त की और कहा, “मैं इसके लिए बेहद उत्साहित हूं क्योंकि हम अच्छे से समझते हैं कि हम एआई में क्या हासिल करने जा रहे हैं। इसके अलावा मैं निश्चित रूप से इन स्टार्टअप्स और विस्तृत इकोसिस्टम को एक विशाल क्षमता तथा भारत को आगे बढ़ाने वाली शक्ति के रूप में देखता हूं। हम चाहते हैं कि मेरठ, गाजियाबाद, कोहिमा, श्रीनगर, कोट्टायम, बेलगाम, धारवाड़, विशाखापत्तनम, नागपुर और उससे आगे से यूनिकॉर्न तथा सफल स्टार्टअप सामने आएं। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा कोई कारण नहीं दिखता कि इनमें से किसी भी स्थान के विद्यार्थी और युवा बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली अथवा किसी अन्य शहर के विद्यार्थियों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते।
राजीव चन्द्रशेखर ने भारत को एक ‘बदलते देश’ से ‘नये भारत’ में परिवर्तित करने पर भी चर्चा की, जिसमें भारत को एक विकसित राष्ट्र का दर्जा दिलाने के माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि हम भारत को बदलने से लेकर यह कहने तक पहुंच चुके हैं, यह एक नया भारत है। अब, हमारे पास एक ऐसा प्रधानमंत्री है जो कहता है, ‘मैं इसके स्तर को और भी ऊपर उठाने जा रहा हूं।’ वे हमारे जीवनकाल में ‘विकसित भारत’ का निर्माण करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की कल्पना करते हैं और आज के अनेक युवा अपने जीवनकाल में भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में परिवर्तित हुए देश के तौर पर देखेंगे।
इंडियन एक्सप्रेस से सौम्यरेंद्र बारिक और अनिल ससी के साथ अपनी बातचीत के दौरान राज्य मंत्री ने इंटरनेट विनियमन हेतु भारत के विकसित दृष्टिकोण का उल्लेख किया, जिसमें डिजिटल नागरिकों तथा जवाबदेही मंचों के लिए सुरक्षा एवं विश्वास पर जोर दिया गया।
राजीव चन्द्रशेखर ने कहा कि हमने इंटरनेट की ताकत को पहचान लिया है। इंटरनेट में मौजूद अच्छाई की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘हम तकनीकी-आशावादी रहे हैं,’ और प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, हमने देर से ही सही, प्रौद्योगिकी और इंटरनेट से जुड़ी समस्याओं को स्वीकार किया है, जिनमें आपराधिकता तथा नुकसान भी शामिल है। भारत सरकार के साथ ही दुनिया भर के कई अन्य देशों की सरकारों ने इस बात पर बल दिया है कि सुरक्षा एवं विश्वास का आह्वान पहले से मौजूद किसी भी अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है। राज्यमंत्री ने कहा, यह दावा करना कि सुरक्षा एवं विश्वास को प्राथमिकता देना अन्य अधिकारों को कमजोर करता है, एक गलत व्याख्या है। सुरक्षा व विश्वास सरकार के लिए नहीं हैं; बल्कि,ये डिजिटल नागरिकों के विशाल बहुमत की सुरक्षा के उद्देश्य से की गई पहल है।
राजीव चन्द्रशेखर ने यूके एआई शिखर सम्मेलन में अपने अनुभव के बारे में जानकारी दी और वर्ष 2021 से सरकार के मार्गदर्शक सिद्धांतों पर जोर देते हुए एक सुरक्षित एवं विश्वसनीय इंटरनेट सेवा सुनिश्चित करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
राजीव चन्द्रशेखर ने अपना दृष्टिकोण जाहिर करते हुए कहा कि इंटरनेट सुरक्षित और विश्वसनीय हो; यह विश्वास का एक विषय है और यह हमारा लक्ष्य भी है कि इंटरनेट कानूनी रूप से जवाबदेह हों। उन्होंने कहा कि ये तीन व्यापक सिद्धांत 2021 से हमारे मार्गदर्शक ढांचे रहे हैं और हम उन्हीं सिद्धांतों को एआई पर भी लागू करते हैं। राज्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में, शेष विश्व इसकी गति पकड़ रहा है और बैलेचले पार्क में एआई सुरक्षा शिखर सम्मेलन अनिवार्य रूप से वही बात दोहरा रहा है, जिस पर हमारा देश जोर दे रहा है। उन्होंने बताया, “पिछले दो वर्षों में, माननीय प्रधानमंत्री ने यह सीखने के महत्व पर बल दिया है कि देश के कल्याण को पक्का करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कैसे किया जाए।” उन्होंने कहा, मैं इस धारणा का पूरी तरह से समर्थन करता हूं और इससे सहमत हूं कि एआई मनुष्य के रूप में हमारे समय के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण आविष्कारों में से एक है। राजीव चन्द्रशेखर ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि एआई से जुड़े जोखिमों की बात नवाचार से आगे न बढ़ जाए, जिससे हम डिजिटल अर्थव्यवस्था और हमारे लोगों के लिए इसके संभावित लाभों को नजरअंदाज कर दें।
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