प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुवाहाटी, असम में 3,400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने एम्स, गुवाहाटी और तीन अन्य मेडिकल कॉलेजों को राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने उन्नत स्वास्थ्य देखभाल नवाचार संस्थान (एएएचआईआई) की आधारशिला भी रखी और पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) कार्ड वितरित करके ‘आपके द्वार आयुष्मान’ अभियान की शुरुआत की।
एम्स, गुवाहाटी का शुभारम्भ, असम राज्य और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह देश भर में स्वास्थ्य-अवसंरचना को मजबूत करने की प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है। मई 2017 में इस अस्पताल की आधारशिला भी प्रधानमंत्री ने रखी थी। 1120 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित एम्स गुवाहाटी, 30 आयुष बिस्तरों सहित 750 बिस्तरों की क्षमता वाला एक अत्याधुनिक अस्पताल है। इस अस्पताल से पूर्वोत्तर के लोगों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी और हर साल 100 एमबीबीएस छात्रों को वार्षिक तौर पर प्रवेश मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने देश को तीन मेडिकल कॉलेज अर्थात नलबाड़ी मेडिकल कॉलेज, नलबाड़ी; नागांव मेडिकल कॉलेज, नागांव और कोकराझार मेडिकल कॉलेज, कोकराझार भी राष्ट्र को समर्पित किया, जिन्हें क्रमशः लगभग 615 करोड़ रुपये, 600 करोड़ रुपये और 535 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया गया है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में 500 बिस्तरों वाला शिक्षण अस्पताल संलग्न है, जिनमें आपातकालीन सेवाओं, आईसीयू सुविधाओं, ओटी और डायग्नोस्टिक सुविधाओं सहित ओपीडी/आईपीडी सेवाओं की सुविधा है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज की वार्षिक प्रवेश क्षमता 100 एमबीबीएस छात्रों की होगी।
प्रधानमंत्री द्वारा ‘आपके द्वार आयुष्मान’ अभियान का औपचारिक शुभारंभ, कल्याणकारी योजनाओं के सन्दर्भ में 100 प्रतिशत की पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक लाभार्थी तक पहुंचने के उनके दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक कदम है। प्रधानमंत्री ने तीन प्रतिनिधि लाभार्थियों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) कार्ड भी वितरित किए, जिसके बाद राज्य के सभी जिलों में लगभग 1.1 करोड़ एबी-पीएमजेएवाई कार्ड वितरित किए जायेंगे।
असम उन्नत स्वास्थ्य देखभाल नवाचार संस्थान (एएएचआईआई) का शिलान्यास, स्वास्थ्य-संबंधी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक कदम है। देश में स्वास्थ्य सेवा में उपयोग की जाने वाली अधिकांश प्रौद्योगिकियां आयात और एक अलग संदर्भ में विकसित की जाती हैं, जो भारतीय परिवेश में संचालन के लिए अत्यधिक महंगी और जटिल होती हैं। एएएचआईआई की परिकल्पना उपरोक्त संदर्भ में की गई है और यह इस तरह काम करेगा कि ‘हम अपनी समस्याओं का समाधान खुद ढूंढ़ लें’। एएएचआईआई को लगभग 546 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा और यह दवा तथा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अत्याधुनिक आविष्कारों और अनुसंधान एवं विकास की सुविधा प्रदान करेगा, स्वास्थ्य से संबंधित देश की समस्याओं की पहचान करेगा और उन समस्याओं के समाधान के लिए नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा देगा।
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