प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दुबई में कॉप-28 की एक उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित किया। उन्होंने विश्व नेताओं को भारत के 140 करोड लोगों की ओर से शुभकामनाएं दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत जलवायु न्याय, जलवायु वित्त और ग्रीन क्रेडिट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का निरंतर समर्थन करता है।
प्रधानमंत्री ने सामूहिक प्रयासों पर बल देते हुए कहा कि मानवता के कल्याण के लिए इस मुद्दे पर सभी के हित और सार्वभौमिक भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के विकास मॉडल तथा अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संतुलन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी का घर है लेकिन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में उसकी हिस्सेदारी चार प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। उन्होंने बताया कि भारत अपने नेशनल डिटरमाइंड कंट्रीबुशन-एडीसी लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में बढ रहा है। वह उत्सर्जन घटाने का लक्ष्य 11 वर्ष पहले और गैर खनिज ईंधन का लक्ष्य नौ वर्ष पहले प्राप्त कर लेगा। इसके महत्वाकांक्षी लक्ष्यों में वर्ष 2030 तक 30 प्रतिशत उत्सर्जन घटाने और वर्ष 2070 तक गैर खनिज ईंधन की हिस्सेदारी बढाकर 50 प्रतिशत करने और नेट जीरो उत्सर्जन शामिल है।
प्रधानमंत्री ने ग्रीन क्रेडिट पहल का प्रस्ताव किया। इसमें व्यवसायिक पहल से अलग आम जनता को कार्बन क्रेडिट देने का प्रस्ताव किया गया है। इससे कार्बन उत्सर्जन से जुडे मुद्दों के सम्बंध में आम जनता की भागीदारी बढेगी। उन्होंने विश्व नेताओं से निजी हितों से आगे बढने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसके लिए संतुलित, जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकियों आदि को लेकर संतुलित नीति अपनानी चाहिए।
इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान और संयुक्त राष्ट्र के महा सचिव एंटोनियो गुटेरस ने प्रधानमंत्री का जलवायु परिवर्तन सम्मेलन स्थल पर स्वागत किया।
सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने विश्व के कई नेताओं से बातचीत भी की। इन नेताओं में श्रीलंका के राष्ट्रपति राणिल विक्रमसिंधे, बहरीन के शाह हमाद बिन इसा अल खलीफा, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रूटे, यूनाइटेड अरब अमीरात की प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मक्तूम, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जीयोयेव, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान और जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला शामिल हैं। कॉप-28 सम्मेलन बृहस्पतिवार को आरंभ हुआ और 12 दिसंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन समिट- ट्रांसफॉर्मिंग क्लाइमेट फाइनेंस को संबोधित करते हुए जोर देकर कहा है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की बहुत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को पर्याप्त और पहुंच में जलवायु वित्त उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में सतत विकास और अपनी जी-20 अध्यक्षता के दौरान जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को परिलक्षित किया। उन्होंने इन मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामुहिक प्रयास और एक पृथ्वी एक परिवार एक भविष्य भारत का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के विचार-विमर्श में भारत समेत दक्षिण विश्व के देशों की मामूली भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन देशों पर जलवायु परिवर्तन का गंभीर प्रभाव है। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद जलवायु कार्रवाई में इन देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। प्रधानमंत्री ने कहा कि दक्षिण विश्व के इन देशों को अपनी जलवायु प्रतिबद्धता पूरी करने के लिए जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी की भूमिका आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों को इन देशों के प्रयासों में अधिकतम सहयोग करना चाहिए।
जी-20 में हुए समझौतों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2030 तक अरबों डॉलर की आवश्यकता है। उन्होंने वित्त को उपलब्ध, पहुंच में और सस्ता बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने जलवायु वित्त प्रारूप पहल में महत्वपूर्ण योगदान करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात की सराहना की। उन्होंने क्षति और हानि कोष का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि कोप-28 में जलवायु वित्त और जलवायु कार्रवाई पर ठोस परिणाम सामने आएंगे। प्रधानमंत्री ने जलवायु वित्त पर न्यू कलेक्टिव क्वांटिफाइड गोल, ग्रीन क्लाइमेट फंड और अडेप्टेशन फंड का उल्लेख करते हुए कहा कि बहुस्तरीय विकास बैंकों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सस्ता वित्त उपलब्ध कराना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु निवेश फंड की घोषणा करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात की सराहना की और इसे सकारात्मक बताया।
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