प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अहमदाबाद में नवभारत साहित्य मंदिर द्वारा आयोजित ‘कलम नो कार्निवल’ पुस्तक मेले के उद्घाटन समारोह को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया।
सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘कलम नो कार्निवल’ के भव्य आयोजन पर हार्दिक बधाई दी। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि अहमदाबाद में ‘नव भारत साहित्य मंदिर’ द्वारा शुरू किए गए पुस्तक मेले की परंपरा हर गुजरते साल के साथ समृद्ध होती जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पुस्तक मेला नए और युवा लेखकों के लिए एक मंच बन गया है, और यह गुजरात के साहित्य और ज्ञान के विस्तार में भी मदद कर रहा है। प्रधानमंत्री ने इस समृद्ध परंपरा के लिए नवभारत साहित्य मंदिर और इसके सभी सदस्यों को बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘कलम नो कार्निवल’ हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती भाषाओं में पुस्तकों का एक विशाल सम्मेलन है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब राज्य ने ‘वांचे गुजरात’ अभियान भी शुरू किया था और आज ‘कलम नो कार्निवल’ जैसे अभियान गुजरात के उस संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तक और ग्रंथ, ये दोनों हमारी विद्या उपासना के मूल तत्व हैं। उन्होंने कहा, “गुजरात में पुस्तकालयों की तो बहुत पुरानी परंपरा रही है।” प्रधानमंत्री ने वडोदरा महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ जी के योगदान पर प्रकाश डाला, जिन्होंने अपने क्षेत्र के सभी गांवों में पुस्तकालयों की स्थापना की, गोंडल के महाराजा भगवत सिंह जी जिन्होंने ‘भगवत गोमंडल’ नामक एक विशाल शब्दकोश दिया, और वीर कवि नर्मद जिन्होंने ‘नर्म कोश’ का संपादन किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “गुजरात का इतिहास किताबों, लेखकों, साहित्यिक सृजन की दृष्टि से बहुत समृद्ध रहा है। मैं चाहता हूं कि इस तरह के पुस्तक मेले गुजरात के कोने-कोने में लोगों तक पहुंचे, खासकर युवाओं तक ताकि वे समृद्ध इतिहास के बारे में जान सकें और प्रेरित हो सकें।”
प्रधानमंत्री ने सभी का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान पुस्तक मेला लग रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को पुनर्जीवित करना अमृत महोत्सव के प्रमुख पक्षों में से एक है। प्रधानमंत्री ने कहा, “ हम स्वतंत्रता संग्राम के भुला दिए गए अध्यायों के महत्व को देश के समक्ष प्रस्तुत करना चाहते हैं। ‘कलम नो कार्निवल’ जैसे कार्यक्रम देश में इस अभियान को गति दे सकते हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित पुस्तकों को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए और ऐसे लेखकों को एक मजबूत मंच प्रदान किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, ”मुझे यकीन है यह आयोजन इस दिशा में एक सकारात्मक माध्यम साबित होगा।”
प्रधानमंत्री ने दोहराया कि किसी को भी शास्त्रों, ग्रंथों और पुस्तकों का बार-बार अध्ययन करना चाहिए ताकि वे प्रभावी और उपयोगी बने रहें। उन्होंने आगे विस्तार से बताया कि यह आज के दिन और युग में और भी महत्वपूर्ण हो गया है जहां लोग इंटरनेट की मदद लेते हैं। “तकनीक हमारे लिए निस्संदेह जानकारी का एक महत्वपूर्ण जरिया है, लेकिन यह किताबों और किताबों के अध्ययन का स्थान नहीं ले सकती।” प्रधानमंत्री ने कहा कि जब जानकारी हमारे दिमाग में होती है, तो मस्तिष्क उस जानकारी को गहराई से संसाधित करता है, और यह नये आयामों को जन्म देता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “यह नए शोध और नवाचार के लिए रास्ता खोलता है। इसमें किताबें हमारी सबसे अच्छी दोस्त बन जाती हैं”।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए अपने संबोधन का समापन किया कि किताबें पढ़ने की आदत डालना बेहद जरूरी है, खासकर एक ऐसी दुनिया में जो तेजी से बदल रही है। “ चाहें पुस्तकें वास्तविक रूप में हों अथवा डिजिटल रूप में!”, उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि इस तरह के आयोजन युवाओं के बीच किताबों के लिए आवश्यक आकर्षण पैदा करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे और उनका महत्व समझने में उनकी मदद करेंगे।”
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