प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए गति शक्ति-राष्ट्रीय मास्टर प्लान का शुभारंभ किया, जो शासन की दिशा में एक नए अध्याय की शुरूआत है। एक डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘गतिशक्ति’ बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित कार्यान्वयन के लिए रेलवे और सड़क मार्ग मंत्रालय सहित 16 मंत्रालयों को एक साथ लाएगा।
यह भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, शुष्क/भूमि बंदरगाहों, उड़ान आदि जैसे विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की बुनियादी ढांचा योजनाओं को समाविष्ट करेगा। कनेक्टिविटी में सुधार और भारतीय व्यवसायों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आर्थिक क्षेत्र जैसे कपड़ा उद्योग, फार्मास्युटिकल उद्योग, रक्षा गलियारे, इलेक्ट्रॉनिक पार्क, औद्योगिक गलियारे, मत्स्य पालन उद्योग, कृषि क्षेत्रों को कवर किया जाएगा। इस परियोजना को बीआईएसएजी-एन (भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना विज्ञान संस्थान) द्वारा विकसित इसरो इमेजरी के साथ स्थानिक नियोजन उपकरण सहित विभिन्न प्रौद्योगिकियों का व्यापक लाभ मिलेगा।
मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परिवहन के एक माध्यम से दूसरे माध्यम में लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए एकीकृत और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। यह अवसंरचना के विकास के लिए कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करेगा और लोगों के लिए यात्रा के समय को भी कम करेगा।
मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की परियोजनाएं:
पीएम गतिशक्ति के लक्ष्यों के अनुरूप, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली कई परियोजनाएं चला रहा है। सीएमडी राजीव जलोटा ने कहा, “ट्रस्ट ने एक तरफ कार्गो और जहाजों की जरूरतों और दूसरी तरफ महानगर (मुंबई) और नागरिकों की जरूरतों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।”
मुंबई पोर्ट ट्रस्ट का मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी मास्टर प्लान दो स्तंभों पर आधारित है, अर्थात् माल ढुलाई-संबंधित परियोजनाएं और समुद्री पर्यटन।
I. मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की माल ढुलाई-संबंधित परियोजनाएं
पीओएल क्षमता का विस्तार: 2.2 करोड़ टन प्रति वर्ष की क्षमता वाली सबसे बड़ी कच्चे तेल की जेट्टी का निर्माण मरीन ऑयल टर्मिनल पर किया गया है, जिसमें इसकी निकासी के लिए पाइपलाइन कनेक्टिविटी है। इस परियोजना में पी.ओ.एल (पेट्रोलियम तेल और लुब्रिकेंट) के अधिक तटीय यातायात के लिए अन्य चार जेट्टी शुरू की गई।
बंकरिंग टर्मिनल: इस परियोजना को सालाना मुंबई हार्बर पर पहुंचने वाले 5,000 से अधिक जहाजों का लाभ मिलता है, जो इसकी निकासी के लिए पाइपलाइन कनेक्टिविटी का उपयोग करती है।
एलएनजी पहुंचाने की सुविधा: इस परियोजना के तहत बिना किसी समस्या के प्रति वर्ष 50 लाख टन तक स्वच्छ ऊर्जा के रूप में एलएनजी प्रदान किया जाएगा क्योंकि फ्लोटिंग टर्मिनल समुद्र में होगा और एलएनजी की निकासी राष्ट्रीय ग्रिड के साथ पाइपलाइन कनेक्टिविटी के माध्यम से होगी।
जेएनपीटी और मुंबई के बीच कंटेनरों की बार्जिंग: इस परियोजना के तहत जलमार्ग कनेक्टिविटी के माध्यम से केवल 14 किलोमीटर की दूरी तय करके जेएनपीटी से अधिक कंटेनर प्राप्त किया जाएगा, जिससे 120 किलोमीटर की लंबी सड़क यात्रा और इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण और सड़क जाम की समस्या समाप्त हो जाएगी।
तटीय सुविधाएं:
शेड के साथ इंदिरा डॉक का बर्थ नंबर 10, 11 विशेष रूप से तटीय कार्गो के संचालन के लिए आरक्षित है।
निजी पार्टियों द्वारा एमबीपीटी भूमि पर सीमेंट फ्लाई ऐश की थोक वस्तुओं के लिए अस्थायी साइलों का निर्माण। ईओआई पहले ही आमंत्रित किया जा चुका है।
रेल कनेक्टिविटी में सुधार
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली के लिए समर्पित रेल माल ढुलाई गलियारा हेतू रेल संपर्क में सुधार के लिए, मुंबई बंदरगाह दो मोर्चों पर अपनी रेल परियोजनाओं पर काम कर रहा है। एक ओर इसने एक सरकार को समर्पित, इंडियन पोर्ट रेलवे एंड रोपवे कंपनी लिमिटेड को रेल संपत्ति सौंपकर रेलवे नेटवर्क और संचालन को पुनर्गठित और उन्नत करने की योजना बनाई है। वहीं, दूसरी ओर वडाला से कुर्ला तक पोर्ट माल ढुलाई के लिए एक समर्पित रेल लाइन बिछाई जा रही है। इससे हार्बर लाइन पर उपनगरीय रेल यात्रियों को राहत मिलेगी।
II. मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की समुद्री पर्यटन परियोजनाएं
इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल (आईसीटी): मुंबई इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल न केवल मुंबई, बल्कि पूरे भारत के लिए समुद्री पर्यटन के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण और महत्त्वाकांक्षी परियोजना है, जो कि बल्लार्ड पियर एक्सटेंशन बर्थ पर 500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बन रहा है। इस टर्मिनल का उपयोग न केवल क्रूज जहाजों के लिए, बल्कि शहर के लोगों द्वारा भी किया जाएगा क्योंकि इसमें फुटकर स्टॉल, रेस्तरां, आराम करने के लिए जगह और कई अन्य सुविधाएं होंगी।
प्रिंस एंड विक्टोरिया डॉक वॉल पर एक किलोमीटर लंबा मुंबई पोर्ट वाटरफ्रंट: इस एकीकृत जल परिवहन केंद्र में शहर के लोगों के लिए छुट्टियाँ मनाने और घूमने के लिए सभी आधुनिक सुविधाएँ होंगी। इसमें रो-पैक्स टर्मिनल है और यहां पर समुद्र के किनारे के रेस्तरां, एम्फीथिएटर, घरेलू क्रूज टर्मिनल, मरीना, फ्लोटिंग रेस्तरां, हार्बर क्रूज, वाटर टैक्सी आदि की सुविधाएँ होंगी।
रो-पैक्स टर्मिनल: यह यात्रियों/पर्यटकों की आवाजाही के लिए जलमार्गों का उपयोग करने और सड़क यातायात को कम करने का एक आदर्श उदाहरण है। मुंबई और मांडवा के बीच रो-पैक्स सेवाओं से इन दो महत्त्वपूर्ण जगहों को जोड़ने वाले एक नए यात्री/पर्यटक परिवहन साधन की शुरुआत हो गई है। इसका नवी मुंबई के नए आगामी हवाई अड्डे से जोड़ने के लिए विस्तार किया जाएगा। रोपैक्स जहाज चल रहा है, जो सड़क मार्ग और जलमार्ग के मल्टीमॉडल परिवहन के संयोजन वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।
सेवरी से एलीफेंटा के बीच रोपवे: समुद्र के ऊपर लगभग आठ किलोमीटर का दुनिया का सबसे लंबा रोपवे लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मोड में बनाया जाएगा। यह परियोजना शहर की आबादी के लिए नई यात्रा सुविधा प्रदान करेगी, साथ ही जहाजों, समुद्री तेल टर्मिनल, और आगामी मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक इत्यादि जैसी समुद्री सुविधाओं का सुंदर दृश्य प्रदान करेगी।
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