नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और नेट जीरो के विजन को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल वर्चुअल माध्यम से 300 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र का शिलान्यास करेंगे।
कोयला मंत्रालय के तहत एक अग्रणी नवरत्न सीपीएसई एनएलसी इंडिया लिमिटेड नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की सीपीएसई योजना के हिस्से के रूप में, राजस्थान के बीकानेर जिले के बरसिंगसर में 300 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित कर रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य सरकारी संस्थाओं को सस्ती बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। विशेष रूप से, एनएलसीआईएल देश में 1 गीगावॉट सौर क्षमता की उपलब्धि हासिल करने वाला पहला सीपीएसई है। कंपनी ने प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (आईआरईडीए) द्वारा शुरू की गई सीपीएसई योजना चरण- II ट्रेंच- III में 300 मेगावाट की सौर परियोजना क्षमता हासिल की है।
भारत में निर्मित उच्च दक्षता वाले बाइफेशियल मॉड्यूल सहित अत्याधुनिक तकनीक से लैस, यह सौर परियोजना प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है। इसके द्वारा पैदा की गई बिजली को बरसिंगसर ताप विद्युत केन्द्र की पहले से मौजूद विद्युत पारेषण लाइनों के माध्यम से पारेषित किया जाएगा। इस परियोजना का लक्ष्य सालाना लगभग 750 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन करना है, जिससे इसके जीवनकाल में लगभग 18,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को निष्प्रभावी किया जा सकेगा।
इस परियोजना के लिए राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के साथ अगले 25 वर्षों के लिए 2.52 रुपये प्रति यूनिट के प्रतिस्पर्धी दर पर बिजली उपयोग समझौता किया गया है। इस परियोजना को सितंबर 2024 तक शुरू करने की योजना है, जिसमें परियोजना चरण के दौरान अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 600 व्यक्तियों और संचालन एवं रखरखाव चरण के दौरान 100 कर्मियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। इसके अलावा, यह परियोजना राजस्थान को नेट ज़ीरो वाले भविष्य को हासिल करने की दिशा में देश की यात्रा में योगदान करते हुए अपने नवीकरणीय खरीद दायित्व को पूरा करने में सक्षम बनाएगी।
एनएलसीआईएल वर्तमान में 250 मेगावाट क्षमता वाले बरसिंगसर ताप विद्युत केन्द्र (बीटीपीएस) को संचालित करता है, जो राजस्थान को किफायती बिजली प्रदान करता है। बीटीपीएस पर्यावरण के अनुकूल सर्कुलेटिंग फ्लुइडाइज्ड बेड कम्बशन तकनीक का उपयोग करता है और इसे 2.1 एमटीपीए वाले बरसिंगसर खदान द्वारा ईंधन प्रदान किया जाता है। इस खदान के असाधारण प्रदर्शन को देखते हुए कोयला मंत्रालय द्वारा उसे प्रतिष्ठित फाइव स्टार रेटिंग से सम्मानित किया गया है।
सतत ऊर्जा के प्रति कोयला मंत्रालय की प्रतिबद्धता राष्ट्रीय विकास के साथ-साथ राष्ट्र के लिए एक हरित एवं अधिक सुदृढ़ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का उदाहरण है।
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