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प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए गवर्नेंस सुधार कामकाजी महिलाओं को अनुकूल वातावरण देते हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए गवर्नेंस सुधार कामकाजी महिलाओं के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहे हैं। कार्मिक मंत्रालय द्वारा उठाए गए अनेक कदमों के बारे में डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि कार्मिक प्रशिक्षण विभाग ने केंद्र सरकार की नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें पारिवारिक जीवन तथा पेशे के बीच संतुलन प्रदान करने के ठोस प्रयास किए हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बाल देखभाल अवकाश (सीसीएल) का उदाहरण देते हुए कहा कि 730 दिनों के सीसीएल मंजूरी को जारी रखते हुए कुछ नए उपाय भी किए गए हैं। ये उपाय ऐसे हैं, जैसे बाल देखभाल अवकाश पर गए कर्मचारी को उचित सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति से मुख्यालय छोड़ने की अनुमति दी जा सकती है, जब कर्मचारी सीसीएल पर है तो अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) का लाभ उठाया जा सकता है और वह विदेश यात्रा पर भी जा सकता है। इसके लिए पहले से उचित सक्षम अधिकारियों से मंजूरी प्राप्त करने की शर्त है। इसके अतिरिक्त सीसीएस(अवकाश) नियम-1972 के नियम 43सी के प्रावधानों के अंतर्गत बाल देखभाल अवकाश के लिए न्यूनतम अवधि को अनिवार्य 15 दिन से घटाकर 5 दिन कर दिया गया है और बाल देखभाल अवकाश का लाभ उठाने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए दिव्यांग बच्चे के मामले में 22 वर्ष की सीमा को समाप्त कर दिया गया है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने प्रमुखता से कहा कि 1 जुलाई, 2022 से बाल देखभाल के लिए दिव्यांग महिला कर्मचारियों को 3 हजार रुपए प्रतिमाह की दर से विशेष भत्ता प्रदान किया गया है, जिसमें डीए में 50 फीसदी की वृद्धि पर 25 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न की जांच से संबंधित विशेष अवकाश का प्रावधान किया गया है और पीड़ित महिला कर्मचारी 90 दिनों की छुट्टी प्राप्त कर सकती है। यह छुट्टी जांच लंबित रहने के दौरान दी जाएगी और इस नियम के अंतर्गत पीड़ित महिला सरकारी कर्मचारी को दी गई छुट्टी को अवकाश खाते से नहीं हटाया जाएगा।

मृत-जन्म या जन्म के तुरंत बाद बच्चे की मृत्यु के कारण संभावित भावात्मक आघात को ध्यान में रखते हुए, जिसका मां के जीवन पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है, अब केंद्र सरकार की महिला कर्मचारी को 60 दिन का विशेष मातृत्व अवकाश देने का निर्णय लिया गया है। यह जन्म के तुरंत बाद बच्चे की मृत्यु/मृत जन्म मामले में दिया जाएगा।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कोविड-19 की पूरी अवधि के दौरान ही महिला अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ओएम के माध्यम से किए गए विशेष प्रावधान जैसे- रोस्टर/स्केलेटल स्टाफ और गर्भवती कर्मचारियों को रोस्टर के लिए छूट दी गई थी और घर से काम करने की अनुमति थी।

पेंशन भोगी कल्याण विभाग में महिला केंद्रित सुधारों की चर्चा करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने हाल के एक ओएम का उल्लेख किया, जिसमें एक तलाकशुदा बेटी जिसके मामले में उसके माता-पिता की मृत्यु के बाद तलाक की डिक्री जारी की गई थी, पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र होगी, यदि तलाक की याचिका माता-पिता की मृत्यु से पहले दायर की गई हो। इसी प्रकार एनपीएस के अंतर्गत कवर किए गए लापता कर्मचारियों के परिवार अब एफआईआर दर्ज करने के 6 महीने के भीतर पारिवारिक पेंशन प्राप्त कर सकते हैं और 7 वर्ष तक इंतजार नहीं कर सकते हैं, जिसके बाद कर्मचारी को मृत माना जाता है। सरकारी कर्मचारी की मृत्यु 7 वर्ष की सेवा पूरी करने से पहले होने के मामले में परिवार को पहले 10 वर्षों के लिए अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत की बढ़ी हुई दर पर और उसके बाद अंतिम वेतन के 30 प्रतिशत की दर से पारिवारिक पेंशन देय होगी।

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