प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में उच्च स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सर्दी के आगामी मौसम को देखते हुए विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ती वायु गुणवत्ता के मुद्दे के समाधान में हितधारकों की तत्परता का आकलन किया गया।
इस बैठक में धान की पराली जलाने, वाहन उत्सर्जन, सड़क और निर्माण धूल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और डीजल जनरेटर (डीजी) सेट सहित विभिन्न स्रोतों से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए जारी प्रयासों के मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित किया गया। डॉ. मिश्रा ने सर्दी के महीनों के दौरान बिगड़ती वायु गुणवत्ता को कम करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों द्वारा ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के सख्त और समय पर कार्यान्वयन के गंभीर महत्व पर जोर दिया।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने धान के भूसे उत्पादन के बारे में विवरण प्रस्तुत किया। पंजाब में 19.52 मिलियन टन और हरियाणा में 8.10 मिलियन टन भूसे के उत्पादन का अनुमान लगाया गया। दोनों राज्यों ने इस साल पराली जलाने पर रोक लगाने की प्रतिबद्धता प्रकट की है। पंजाब ने अपने 11.5 मिलियन टन धान के भूसे को इन-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के माध्यम से और बाकी को एक्स-सीटू तरीकों से प्रबंधित करने की योजना बनाई है। इसी तरह हरियाणा 3.3 मिलियन टन का इन-सीटू प्रबंधन करेगा और शेष के लिए एक्स-सीटू तरीकों का उपयोग करेगा। पंजाब में 24,736 कस्टम हायरिंग सेंटरों (सीएचसी) द्वारा समर्थित 1.50 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनें उपलब्ध होंगी, जबकि हरियाणा में 6,794 सीएचसी द्वारा समर्थित 90,945 सीआरएम मशीनें हैं।
इसके अलावा, एनसीआर क्षेत्र में 11 थर्मल पावर संयंत्रों में अन्य ईंधन के साथ 2 मिलियन टन धान के भूसे को जलाया जाएगा। इस बैठक में को-फायरिंग लक्ष्यों को पूरा करने के लिए थर्मल संयंत्रों की नियमित निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया गया, साथ ही गैर-अनुपालन के लिए दंड लगाने पर भी बल दिया गया।
औद्योगिक प्रदूषण के संबंध में, सीएक्यूएम ने बताया कि एनसीआर क्षेत्र के 240 औद्योगिक क्षेत्रों में से 220 अब गैस बुनियादी ढांचे से सुसज्जित हैं, शेष क्षेत्रों को जल्द ही गैस से जोड़ा जाएगा। निर्माण और विध्वंस (सी एंड डी) गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण की निगरानी वेब पोर्टल के माध्यम से की जा रही है, जिसमें 500 वर्ग मीटर से अधिक की परियोजनाओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य है।
डॉ. मिश्रा ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को अपनी कार्य योजनाओं की प्रतिबद्धता के अनुरूप पराली जलाने की प्रथा को खत्म करने के उद्देश्य से कार्य योजनाओं की सख्ती से निगरानी करने और उन्हें लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने धान के भूसे के आर्थिक उपयोग को बढ़ाने के लिए सीआरएम मशीनों के पूर्ण उपयोग, एक्स-सिटू प्रबंधन के लिए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और ब्रिकेटिंग एवं पेलेटिंग कार्यों में छोटे उद्योगों का समर्थन करने की आवश्यकता पर बल दिया। उचित दंड और रिकॉर्ड प्रविष्टियों के साथ उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त प्रवर्तन कार्रवाइयों पर भी प्रकाश डाला गया।
प्रधान सचिव ने एनसीआर क्षेत्र के राज्यों के मुख्य सचिवों से क्षेत्र में अपनी ई-बस सेवाएं बढ़ाने का भी अनुरोध किया। पीएम ई-बस सेवा योजना का लक्ष्य हमारे देश में ई-बसों को 10,000 ई-बसों तक बढ़ाना है। राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों को अपने ई-बसों के बेड़े को बढ़ाने के लिए योजना का विवेकपूर्ण उपयोग करने का लक्ष्य रखना चाहिए।
उन्होंने एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए इसके भावनात्मक मूल्य का उपयोग शहर को हरा-भरा बनाने में किया जाना चाहिए।
पटाखों से प्रदूषण के संदर्भ में, राज्य सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने के लिए कहा गया। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय से बायोमास के संग्रह में तेजी लाने और संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) संयंत्रों के निर्माण में तेजी लाने का आग्रह किया गया।
इस बैठक में कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन, दिल्ली पुलिस आयुक्त और पर्यावरण, कृषि, बिजली, पेट्रोलियम, सड़क परिवहन, आवासन और शहरी कार्य और पशुपालन मंत्रालयों के प्रमुख अधिकारियों के साथ-साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी), और पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के मुख्य सचिव और उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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