पोलैंड: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वारसॉ में भारतीय सामुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “आज का भारत सबसे जुड़ना चाहता है, आज का भारत सबके विकास की बात करता है। आज का भारत सबके साथ है, सबके हित की सोचता है। हमें गर्व है कि आज दुनिया भारत को विश्व बंधु के रूप में सम्मान दे रही है। जिनको कहीं जगह नहीं मिली उनको भारत ने अपने दिल और अपनी ज़मीन दोनों जगह स्थान दिया है।”
प्रधानमंत्री ने कहा, 2 दशक पहले जब गुजरात में भीषण भूकंप आया था तब जामनगर भी उसकी चपेट में आ गया था। तब पोलैंड मदद के लिए पहुंचने वाले सबसे पहले देशों में से एक था। भारत जामसा मेमोरियल यूथ एक्शन प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, 45 साल बाद भारत का कोई प्रधानमंत्री पोलैंड आया है। ऐसे कई देश हैं जहां दशकों तक भारत का कोई प्रधानमंत्री पहुंचा नहीं है। लेकिन अब परिस्थितियां दूसरी हैं। दशकों तक भारत की नीति थी कि सारे देशों से समान दूरी बनाए रखो। आज के भारत की नीति है सारे देशों से समान रूप से नजदीकी बनाओ।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत और पोलैंड के समाज में अनेक समानताएं हैं। एक बड़ी समानता लोकतंत्र की भी है। भारत के लोगों का लोकतंत्र पर अटूट भरोसा है। ये भरोसा हमने हाल के चुनावों में भी देखा है। हम भारतीय विविधता को जीना भी जानते हैं और उत्सव मनाना भी जानते हैं। इसलिए हर सोसाइटी में हम आसानी से घुल मिल जाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “पिछले दस साल में हमने भारत में 300 से ज्यादा नए मेडिकल कॉलेज बनाए। पिछले दस साल में भारत में मेडिकल सीटें दो गुणा हो चुकी हैं। इन दस सालों में हमने मेडिकल सिस्टम में 75,000 नई सीटें जोड़ी हैं। आने वाले 5 साल में हम मेडिकल सिस्टम में 75,000 नई सीटें और जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। वो दिन दूर नहीं है जब हम दुनिया को कहेंगे कि ‘हील इन इंडिया’।
प्रधानमंत्री ने कहा, “दुनिया के किसी भी देश में संकट आए, भारत पहला देश होता है जो मदद के लिए हाथ बढ़ाता है…जब कोविड आया, तो भारत ने कहा ‘मानवता सबसे पहले’। भारत बुद्ध की विरासत वाली धरती है जो युद्ध नहीं शांति की बात करती है।ये युद्ध का युग नहीं है। ये उन चुनौतियों से निपटने के लिए एकजुट होने का समय है जिनसे मानवता को सबसे बड़े खतरे हैं। इसलिए भारत कूटनीति और संवाद पर बल दे रहा है।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत और पोलैंड की सामाजिक सुरक्षा समझौते पर सहमती बनी है…भारत का दृष्टिकोण वैश्विक है, भारत की संस्कृति वैश्विक है। हमारे पूर्वजों ने हमें ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का मंत्र दिया है…हम पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं।”
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