Categories: News-Headlines

पूरे देश में अबतक लगभग 24 करोड़ मवेशियों और भैंसों को खुरपका और मुंहपका रोग के खिलाफ टीका लगाया गया

खुरपका और मुंहपका रोग टीकाकरण अभियान के दूसरे चरण में, पूरे देश में अबतक 25.8 करोड़ मवेशियों की लक्षित आबादी (राज्यों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार) में से लगभग 24 करोड़ मवेशियों और भैंसों को कवर किया गया है यानी 95 प्रतिशत से ज्यादा सार्वभौमिक कवरेज तक पहुंचा गया है, जो की हर्ड इम्यूनिटी स्तर से बहुत ज्यादा है। इस मील के पत्थर की प्राप्ति पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी), भारत सरकार, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार/प्रशासन के अथक प्रयासों और महत्वपूर्ण रूप से पशुपालकों के समर्थन से संभव हो सकी है।

यह कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा 100% वित्तपोषित है जो एफएमडी के खिलाफ टीकों की खरीद करता है और राज्यों को आपूर्ति करता है और टीकाकरण शुल्क, सहायक उपकरण, जागरूकता निर्माण, कोल्ड चेन अवसंरचना आदि भी प्रदान करता है, जिससे राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को अभियान मोड में टीकाकरण करने में सक्षम बनाया जा सके। पशुपालकों को अपने पशुओं का टीकाकरण कराने के लिए विभिन्न सूचनाओं, शिक्षा एवं संचार के माध्यम से संवेदनशील और जागरूक बनाया जाता है और इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए निकटतम पशुधन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं/पशु चिकित्सकों से संपर्क करने का अनुरोध किया जाता है। डीएएचडी और ज्यादा पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं/पैरावेटों को प्रशिक्षित करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ सहयोग भी कर रहा है।

यह उम्मीद की जा रही है कि इस प्रकार के निरंतर प्रयासों के माध्यम से देश में खुरपका और मुंहपका रोग को नियंत्रित करने और अंततः इसका उन्मूलन करने वाले लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकेगी, जो कि पशुधन किसानों/रखवालों की आय बढ़ाने और पशुधन उत्पादों में भारतीय व्यापार को बढ़ावा देने में भी मददगार साबित होगा।

भारत में खुरपका और मुंहपका रोग (एफएमडी) पशुधन की एक प्रमुख बीमारी है विशेष रूप से मवेशियों और भैंसों के लिए और दूध के उत्पादन में कमी होने से पशुपालकों को बहुत आर्थिक नुकसान होता है। इस समस्या से निपटने के लिए, पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने 2019 में राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी) की शुरुआत की जो अब पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम का एक हिस्सा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य टीकाकरण के माध्यम से खुरपका और मुंहपका रोग (एफएमडी) को नियंत्रित करना है, जिससे इसका उन्मूलन 2030 तक किया जा सके। इसके परिणामस्वरूप, घरेलू उत्पादन में वृद्धि होगी और अंततः पशुधन उत्पादों के निर्यात में भी वृद्धि होगी। वर्तमान में इस कार्यक्रम के अंतर्गत सभी मवेशियों और भैंसों का टीकाकरण किया जा रहा है।

Leave a Comment

Recent Posts

1 जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा “खेत बचाओ अभियान”

केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा है कि “खेत बचाओ अभियान” सिर्फ जागरूकता… Read More

9 hours ago

गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में सीमा संबंधी विषयों पर बैठक की अध्यक्षता की

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा (IPB) से लगे… Read More

9 hours ago

JEE Advanced 2026 के नतीजे घोषित, उम्मीदवारों के लिए रैंक, स्कोर और कटऑफ से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई।

JEE Advanced 2026 Result: रिजल्ट, रैंक और कटऑफ को लेकर बड़ी अपडेट देश की सबसे… Read More

9 hours ago

This website uses cookies.