प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सुबह 11 बजे लचित बरफुकन की 400वीं जयंती के उपलक्ष्य में वर्ष भर चलने वाले उत्सव के समापन समारोह को संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री का गुमनाम नायकों को उचित तरीके से सम्मानित करने का निरंतर प्रयास रहा है। इसी भावना के अनुरूप देश वर्ष 2022 को लचित बरफुकन की 400वीं जयंती वर्ष के रूप में मना रहा है। इस उत्सव का उद्घाटन इस वर्ष फरवरी में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा गुवाहाटी में किया गया था।
लचित बरफुकन (24 नवंबर, 1622 – 25 अप्रैल, 1672) असम के अहोम साम्राज्य की शाही सेना के प्रसिद्ध सेनापति थे, जिन्होंने मुगलों को हराकर औरंगजेब के अधीन मुगलों की लगातार बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को सफलतापूर्वक रोक दिया था। लचित बरफुकन ने 1671 में लड़ी गई सरायघाट की लड़ाई में असमिया सैनिकों को प्रेरित किया और मुगलों को एक करारीव अपमानजनक हार स्वीकार करने को बाध्य किया। लचित बरफुकन और उनकी सेना की वीरतापूर्ण लड़ाई हमारे देश के इतिहास में प्रतिरोध की सबसे प्रेरक सैन्य उपलब्धियों में से एक है।
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