उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के संयुक्त सचिव पंकज कुमार की अध्यक्षता में आज नेटवर्क योजना समूह (एनपीजी) की 89वीं बैठक हुई। इस बैठक में सड़क, रेलवे और मेट्रो क्षेत्रों में बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं का आकलन किया गया। इस बैठक में पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस एनएमपी) के अनुरूप मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
एनपीजी ने एकीकृत मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक एवं सामाजिक नोड्स के लिए अंतिम-मील कनेक्टिविटी और इंटरमॉडल समन्वय के पीएम गतिशक्ति सिद्धांतों के अनुरूप आठ परियोजनाओं (चार सड़क, तीन रेलवे और एक मेट्रो) का आकलन किया। इन पहलों से लॉजिस्टिक क्षमता में वृद्धि, यात्रा के समय में कमी और क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच)
मेघालय में दारुगिरी से डालू खंड तक पक्की सड़क के साथ दो लेन
इस परियोजना में मेघालय में एनएच-62 (नया एनएच-217) के दारुगिरी से डालू खंड के साथ पक्की सड़क के साथ मौजूदा सड़क को दो लेन वाले राजमार्ग में विकसित करना शामिल है। यह 136.11 किलोमीटर लंबा खंड पूर्वी गारो हिल्स, दक्षिण गारो हिल्स और पश्चिमी गारो हिल्स से होकर गुजरता है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को काफी बढ़ाता है। अपनी रणनीतिक स्थिति को देखते हुए, यह गलियारा सीमा पार व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए आवश्यक है।
गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच ब्रह्मपुत्र नदी पर चार लेन की सुरंग संपर्क सड़क का निर्माण
इस परियोजना में एक प्रमुख नदी के नीचे भारत की पहली सड़क सुरंग का निर्माण शामिल है। ब्रह्मपुत्र के नीचे चार लेन की सुरंग यात्रा के समय को 6.5 घंटे से घटाकर सिर्फ़ 30 मिनट कर देगी, जिससे दूरी 240 किलोमीटर से घटकर 34 किलोमीटर रह जाएगी। यह ट्विन-ट्यूब, एकतरफ़ा पानी के नीचे की सुरंग अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से कनेक्टिविटी बढ़ाएगी।
कलियाबोर-नुमालीगढ़ खंड के मौजूदा कैरिज वे को चार लेन तक चौड़ा करना
इस परियोजना का उद्देश्य असम में कलियाबोर-नुमालीगढ़ खंड (एनएच-37/एनएच-715) पर मौजूदा राजमार्ग को दो लेन से चार लेन में अपग्रेड करना है। नागांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों में 85.67 किलोमीटर को कवर करते हुए, इस परियोजना में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता की रक्षा के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर और वन्यजीव क्रॉसिंग जैसे वन्यजीव-अनुकूल उपाय शामिल हैं।
जैसलमेर बाईपास लिंक रोड के साथ म्याजलार से जैसलमेर तक पक्की सड़क सहित दो लेन का निर्माण और उन्नयन
राजस्थान में 138.177 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में एनएच-11 और एनएच-70 के साथ ब्राउनफील्ड एवं ग्रीनफील्ड खंड शामिल हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार, पर्यटन को बढ़ावा देना, फैसिलिटी डिफेंस मूवमेंट और सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है।
रक्षा मंत्रालय (एमओआर)
बदलापुर-कर्जत तीसरी और चौथी लाइन का विस्तार
32.460 किलोमीटर लंबी ब्राउनफील्ड परियोजना मुंबई-पुणे-सोलापुर-वाडी-चेन्नई कॉरिडोर पर यात्रियों की बढ़ती संख्या और माल ढुलाई की भीड़ की समस्या का समाधान करती है। प्रमुख यात्री केंद्रों और माल ढुलाई पारगमन बिंदुओं के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने वाली इस परियोजना से बदलापुर, वांगनी, शेलू, नेरल, भिवपुरी और कर्जत जैसे शहरों को लाभ होगा।
नेरगुंडी में फ्लाईओवर के साथ नेरगुंडी से कटक तक चौथी लाइन का निर्माण
ओडिशा में 15.99 किलोमीटर लंबी ब्राउनफील्ड रेलवे बुनियादी ढांचागत परियोजना का उद्देश्य मौजूदा रेल लाइनों पर भीड़भाड़ कम करना, माल ढुलाई को सुगम बनाना तथा पारादीप बंदरगाह, तालचेर कोयला क्षेत्रों और प्रमुख इस्पात एवं बिजली उद्योगों की सेवा करने वाले प्रमुख गलियारे पर सुचारु परिचालन सुनिश्चित करना है।
हरिदासपुर से पारादीप तक दोहरीकरण लाइन का निर्माण
ओडिशा में 74.09 किलोमीटर लंबी ब्राउनफील्ड परियोजना से माल ढुलाई क्षमता और लॉजिस्टिक्स क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे तालचेर कोयला क्षेत्रों से पारादीप बंदरगाह तक निर्बाध कोयला ढुलाई की सुविधा मिलेगी और साथ ही अंगुल-झारसुगुड़ा क्लस्टर में औद्योगिक विस्तार को भी समर्थन मिलेगा।
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए)
राजकोट मेट्रो रेल परियोजना
राजकोट मेट्रो परियोजना एक ग्रीनफील्ड शहरी परिवहन पहल है जिसका उद्देश्य गुजरात के राजकोट में भीड़भाड़ को कम करना और परिवहन का एक स्थायी तरीका प्रदान करना है। 41.11 किलोमीटर को कवर करते हुए, यह परियोजना मौजूदा शहरी बुनियादी ढांचे के साथ सहज रूप से एकीकृत है, जिससे क्षेत्रीय रेल, सिटी बस सेवाओं और ऑटो व साइकिल रिक्शा जैसे मध्यवर्ती सार्वजनिक परिवहन के साथ मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित होती है।
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप ये बुनियादी ढांचागत परियोजनाएं कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएंगी, लॉजिस्टिक्स में सुधार करेंगी और क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय आर्थिक विकास में योगदान देंगी।
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