Categories: News-Headlines

नीति आयोग ने “मोटर वाहन उद्योग: वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी सशक्त बनाना” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की

नीति आयोग ने “ऑटोमोटिव उद्योग: वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी का सशक्तिकरण” शीर्षक से अंतर्दृष्टिपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट को नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने डॉ. वी.के. सारस्वत, सदस्य, नीति आयोग, डॉ. अरविंद विरमानी, सदस्य, नीति आयोग और बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम, सीईओ, नीति आयोग ने पेश किया। यह रिपोर्ट भारत के ऑटोमोटिव क्षेत्र का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें अवसरों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया और वैश्विक ऑटोमोटिव बाजारों में भारत को एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करने के लिए रूपरेखा तैयार की गई है।

वैश्विक और भारतीय ऑटोमोटिव परिदृश्य

2023 में, वैश्विक ऑटोमोबाइल उत्पादन लगभग 94 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया। वैश्विक ऑटोमोटिव घटक बाजार का मूल्य 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसमें निर्यात हिस्सेदारी लगभग 700 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई। भारत चीन, अमेरिका और जापान के बाद चौथा सबसे बड़ा वैश्विक उत्पादक बन गया है, इसका वार्षिक उत्पादन लगभग 6 मिलियन वाहनों का है। भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र ने विशेष रूप से छोटी कार और उपयोगिता वाहन खंडों में एक मजबूत घरेलू और निर्यात बाजार उपस्थिति हासिल की है। ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों और इसके लागत-प्रतिस्पर्धी कार्यबल द्वारा समर्थित, भारत खुद को ऑटोमोटिव विनिर्माण और निर्यात के लिए एक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।

ऑटोमोटिव सेक्टर में उभरते रुझान

ऑटोमोटिव उद्योग इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की ओर एक परिवर्तनकारी बदलाव से गुजर रहा है, जो टिकाऊ गतिशीलता के लिए बढ़ती उपभोक्ता मांग, कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए नियामक दबाव और बैटरी प्रौद्योगिकी में प्रगति से प्रेरित है। ईवी की बिक्री वैश्विक स्तर पर बढ़ी है, जिसने ऑटोमोटिव विनिर्माण परिदृश्य को नया रूप दिया है।

यूरोप और अमेरिका जैसे क्षेत्रों में बैटरी विनिर्माण केंद्र उभर रहे हैं, जो ईवी उत्पादन के लिए आवश्यक लिथियम और कोबाल्ट खनन से सम्बंधित उद्योगों में निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं। ये विकास पारंपरिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बदल रहे हैं और सहयोग और प्रतिस्पर्धा के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।

समानांतर में, उद्योग 4.0 का उदय ऑटोमोटिव विनिर्माण को बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें उत्पादन प्रक्रियाओं को बेहतर बना रही हैं, उत्पादकता में सुधार कर रही हैं, लागत कम कर रही हैं और अधिक लचीलापन सक्षम कर रही हैं। ये डिजिटल प्रगति न केवल विनिर्माण को अनुकूलित कर रही हैं, बल्कि स्मार्ट कारखानों और कनेक्टेड वाहनों के इर्द-गिर्द केंद्रित नए व्यवसाय मॉडल को भी बढ़ावा दे रही हैं।

भारत के ऑटोमोटिव क्षेत्र के सामने चुनौतियां

वैश्विक स्तर पर चौथा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल उत्पादक होने के बावजूद, भारत की वैश्विक ऑटोमोटिव घटक व्यापार में मामूली हिस्सेदारी (लगभग 3 प्रतिशत) है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर है। ऑटोमोटिव घटकों में वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा इंजन घटकों, ड्राइव ट्रांसमिशन और स्टीयरिंग सिस्टम द्वारा संचालित होता है, लेकिन इन उच्च परिशुद्धता वाले क्षेत्रों में भारत की हिस्सेदारी केवल 2-4 प्रतिशत पर कम बनी हुई है। भारत के ऑटोमोटिव क्षेत्र को परिचालन लागत, अवसंरचनात्मक अंतराल, मध्यम वैश्विक मूल्य श्रृंखला एकीकरण, अपर्याप्त अनुसंधान एवं विकास व्यय आदि के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जो वैश्विक मूल्य श्रृंखला में इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता में बाधा डालते हैं।

विकास के लिए प्रस्तावित हस्तक्षेप

नीति आयोग की रिपोर्ट में ऑटोमोटिव क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के उद्देश्य से कई रणनीतिक राजकोषीय और गैर-राजकोषीय हस्तक्षेपों की रूपरेखा दी गई है। हस्तक्षेपों को उनकी जटिलता और विनिर्माण परिपक्वता के आधार पर ऑटोमोटिव घटकों की चार श्रेणियों में संरचित किया गया है, अर्थात उभरते और जटिल, पारंपरिक और जटिल, पारंपरिक और सरल और उभरते और सरल।

राजकोषीय हस्तक्षेप

परिचालन व्यय (ऑपेक्स) सहायता: विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना, उपकरण, डाई और बुनियादी ढांचे के लिए पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पर ध्यान केंद्रित करना।

कौशल विकास: विकास को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण प्रतिभा पाइपलाइन बनाने की पहल।

अनुसंधान एवं विकाससरकार द्वारा सुगम आईपी हस्तांतरण और ब्रांडिंग: उत्पाद विभेदीकरण में सुधार करने और आईपी हस्तांतरण के माध्यम से एमएसएमई को सशक्त बनाने के लिए अनुसंधान, विकास, अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।

क्लस्टर विकास: आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए अनुसंधान एवं विकास और परीक्षण केंद्रों जैसी सामान्य सुविधाओं के माध्यम से फर्मों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।

गैर-राजकोषीय हस्तक्षेप

उद्योग 4.0 को अपनाना: दक्षता में सुधार के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों और उन्नत विनिर्माण मानकों के एकीकरण को प्रोत्साहित करना।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक बाजार पहुंच का विस्तार करने के लिए संयुक्त उद्यमों, विदेशी सहयोग और मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को बढ़ावा देना।

व्यापार करने में आसानी: विनियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, कर्मचारी घंटे का लचीलापन, आपूर्तिकर्ता खोज और विकास और ऑटोमोटिव फर्मों के लिए व्यावसायिक स्थितियों में सुधार करना।

2030 के लिए विजन

नीति आयोग का 2030 तक भारत के ऑटोमोटिव क्षेत्र के लिए विजन महत्वाकांक्षी है, फिर भी इसे हासिल किया जा सकता है। रिपोर्ट में देश के ऑटोमोटिव कंपोनेंट उत्पादन को 145 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने की परिकल्पना की गई है, जिसमें निर्यात 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 60 बिलियन डॉलर हो जाएगा। इस वृद्धि से लगभग 25 बिलियन डॉलर का व्यापार अधिशेष होगा और वैश्विक ऑटोमोटिव मूल्य श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जो 3% से बढ़कर 8% हो जाएगी।

इसके अतिरिक्त, इस वृद्धि से 2-2.5 मिलियन नए रोजगार अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र में कुल प्रत्यक्ष रोजगार 3-4 मिलियन तक पहुंच जाएगा।

Leave a Comment

Recent Posts

FIU-IND और PFRDA ने सूचना साझाकरण और समन्वय को बढ़ाने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए

भारत में धन शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा… Read More

6 hours ago

धन-शोधन और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए भारत की वित्तीय खुफिया इकाई और SEBI ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारत में धन-शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में… Read More

6 hours ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने डेलीगेशन लेवल की बातचीत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने डेलीगेशन लेवल की… Read More

8 hours ago

आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लखनऊ सुपर जायंट्स को पांच विकेट से हराया

आईपीएल क्रिकेट में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लखनऊ सुपर जायंट्स को पांच विकेट से हरा… Read More

10 hours ago

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नई दिल्ली में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य समूह की पहली बैठक 2026 की मेजबानी की

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने नई दिल्ली में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य… Read More

10 hours ago

NHAI ने इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ईटीसी) प्रणाली में डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए सभी फास्टटैग जारीकर्ता बैंकों को निर्देश जारी किए

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) प्रणाली में डेटा की सटीकता… Read More

10 hours ago

This website uses cookies.