नीति आयोग ने गौशालाओं की आर्थिक व्यवहार्यता को सुधारने पर विशेष दृष्टिकोण तथा जैव उर्वरकों के उत्पादन और संवर्धन विषय पर कार्यबल की रिपोर्ट जारी की है। नीति आयोग ने गौशालाओं को आर्थिक रुप से व्यवहार्य बनाने के उपायों, आवारा पशुओं की समस्या तथा कृषि और उर्जा क्षेत्र में गौ-मूत्र और गोबर के प्रभावी उपयोग के लिए सुझाव देने के लिए इस कार्यबल का गठन किया था। रिपोर्ट में गौशालाओं के संचालन की लागत और अन्य मुद्दों तथा बायो सीएनजी संयंत्रों और फॉस्फेट युक्त जैव-उर्वरक संयंत्र स्थापित करने पर निवेश की अनुमानित लागत के बारे में बताया गया है। नीति आयोग के सदस्य(कृषि) प्रोफेसर रमेश चंद्र ने कार्यबल के सदस्यों की उपस्थिति में इस रिपोर्ट को जारी किया। प्रोफेसर रमेश चंद्र ने कहा कि पिछले पचास वर्षों में रासायनिक उर्वरक और जैव उर्वरक के इस्तेमाल में काफी असंतुलन आ गया है। रासायनिक उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल से मृदा की गुणवत्ता, भोजन की गुणवत्ता, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
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