नीति आयोग ने आज कार्बन संकलन, उपयोग और भंडारण-सीसीयूएस नीति के ढांचे और भारत में इसके लागू करने की व्यवस्था का शुभारंभ किया। इससे सम्बन्धित रिपोर्ट की शुरूआत नई दिल्ली में नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के.बेरी ने विद्युत सचिव आलोक कुमार, सदस्य नीति आयोग डॉक्टर वी. सारस्वत और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में की। यह रिपोर्ट ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र के विभिन्न पक्षों से प्राप्त बहुमूल्य सूचना के आधार पर तैयार की गयी है।
इससे पहले सरकार ने अपस्ट्रीम ईएण्डपी कंपनियों के लिए 2030 सीसीयूएस रोड मैप से सम्बन्धित प्रारूप नीति को देश में सभी पक्षों से सुझाव लेने के लिए सार्वजनिक किया था।
सीसीएयू नीति ढांचे का उद्देश्य भारत में कार्बन संकलन, उपयोग और भंडारण से सम्बन्धित अनुसंधान और विकास में तेजी लाने के लिए एक व्यावहारिक ढांचा विकसित और लागू करना है।
भारत, चीन और अमरीका के बाद तीसरा सबसे अधिक कार्बन डायक्साइड उत्सर्जन करने वाला देश है जो प्रति वर्ष 2 दशमल 6 गिगा टन उत्सर्जन करता है। भारत के लिए अपने कार्बन उत्सर्जन समाप्त करने का लक्ष्य हासिल करने के वास्ते कार्बन संकलन, उपयोग और भंडारण अत्यंत आवश्यक है।
ग्लास्गो में पिछले वर्ष प्रदूषण से सम्बन्धित सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2070 तक जीरो उत्सर्जन हासिल करने समेत जलवायु परिवर्तन में बेहद कमी लाने के पंचामृत की घोषणा की थी। भारत सरकार 2050 तक कार्बन डायक्साइड उत्सर्जन को आधा करने के लिए कृत्त संकल्प है।
इस अवसर पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के.बेरी ने कहा कि 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य बनाने के लिए सीसीयूएस की महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका रहेगी।
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