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धर्मेंद्र प्रधान ने भारतीय सांकेतिक भाषा के लिए पीएमईविद्या डीटीएच 24×7 चैनल नंबर 31 का शुभारंभ किया

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली में भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) के लिए पीएमईविद्या डीटीएच 24×7 चैनल नंबर 31 का शुभारंभ किया। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी भी इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और उच्च शिक्षा विभाग के सचिव संजय कुमार, एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार ए श्रीजा तथा भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) की अध्यक्ष डॉ. शरणजीत कौर ने भी भाग लिया।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में मान्यता प्राप्त दिव्यांगता की आयु 7 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने के परिवर्तनकारी प्रभाव का भी उल्लेख किया, जिससे कानूनी ढांचा अधिक व्यापक हो गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्लयूएसएन) की शिक्षा को प्राथमिकता दी है, जो अधिक समावेशी शिक्षा प्रणाली की ओर बदलाव को दर्शाता है।

भारतीय सांकेतिक भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि संचार हेतु ध्वनि ही एकमात्र माध्यम नहीं है; सांकेतिक भाषा जैसे वैकल्पिक माध्यम भी सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भारतीय सांकेतिक भाषा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने और इसे व्यापक रूप से अपनाने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में श्रवण बाधित लोगों की सहायता के लिए अधिक से अधिक लोगों को भारतीय सांकेतिक भाषा सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे रोजगार के अवसर सृजित करने में भी मदद मिलेगी।

धर्मेंद्र प्रधान ने नृत्य एवं नाटक जैसी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में भारतीय सांकेतिक भाषा के प्रभाव की ओर भी ध्यान दिलाया और साथ ही दिव्यांग समुदाय में मौजूद अपार संभावनाओं को उजागर करने के उद्देश्य से असाधारण व्यक्तियों के उदाहरण दिए। उन्होंने चैनल 31 को संचार को सुगम बनाने और इस क्षमता को उन्मुक्त करने तथा समाज को अधिक समावेशी एवं प्रगतिशील बनाने के लिए एक सेतु बताया।

केंद्रीय मंत्री ने हितधारकों से चैनल 31 को लोकप्रिय बनाने और विश्व के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा के प्रवेशद्वार के रूप में पूरे भारत में इसकी पहुंच सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मानक स्थापित करता है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह पहल संवैधानिक अधिकारों के प्रति भारत की वचनबद्धता की पुष्टि करती है और सभी नागरिकों के लिए शिक्षा व संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित करती है।

धर्मेंद्र प्रधान ने इस बात पर जोर देते हुए अपने भाषण का समापन किया कि भारतीय सांकेतिक भाषा में वैश्विक मानक स्थापित करने और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने तथा भारत को अधिक समावेशी भविष्य की ओर ले जाने की क्षमता निहित है।

जयंत चौधरी ने अपने संबोधन में इस महत्वपूर्ण पहल की सराहना की और इसे समावेशिता की दिशा में देश की विकास यात्रा में एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने पीएम ईविद्या टीम को उनके सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी। जयंत चौधरी ने बताया कि दिव्यांगजन अधिनियम की जगह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम लाया जा चुका है, जो अधिकार-उन्मुख ढांचा विकसित करने पर सरकार के फोकस को दर्शाता है। उन्होंने स्कूली बच्चों में दिव्यांगता की पहचान करने के महत्व पर जोर दिया ताकि उन्हें उचित सहायता मिल सके, जिससे उनके सीखने के परिणामों या पढ़ाई छोड़ने की दरों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। केंद्रीय राज्य मंत्री ने भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) के लिए क्षेत्रीय भाषाओं को मानकीकृत करने के प्रयास की भी सराहना की, जिसमें अब तक 10,000 से अधिक शब्दों को मानकीकृत किया गया है। उन्होंने सभी से चैनलों की सदस्यता लेने और भाषा सीखने का प्रयास करने का आग्रह किया। जयंत चौधरी ने बिना किसी कलंक के श्रवण दोष को दूर करने के लिए उपकरणों का उपयोग करने के महत्व पर प्रकाश डाला, जिससे श्रवण दिव्यांगता वाले व्यक्ति सभी के साथ समान रूप से भाग ले सकें।

संजय कुमार ने अपने संबोधन में इस नई एवं अभिनव पहल की सराहना की और इस बात पर प्रकाश डाला कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पांच स्तंभों में से दो अर्थात समावेशिता व सुलभता के साथ कैसे संरेखित है। उन्होंने एनसीईआरटी के प्रशस्त ऐप के माध्यम से 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के सफल वर्गीकरण की ओर इशारा किया और भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) को एक भाषा के रूप में मान्यता देने के महत्व पर जोर दिया। संजय कुमार ने श्रवण बाधित समुदाय के साथ प्रभावी संचार की सुविधा और प्रगति को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने धर्मेन्द्र प्रधान के प्रति आभार व्यक्त किया कि माननीय मंत्री जी ने मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया कि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे और सभी बच्चों को स्कूल प्रणाली में शामिल किया जाए। संजय कुमार ने भारतीय सांकेतिक भाषा-आधारित विषय-वस्तु विकसित करने के लिए क्षेत्रीय संस्थानों द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्य पर भी टिप्पणी की और कहा कि इस विषय-वस्तु को चैनल में शामिल किया जाएगा, ताकि इसे दर्शकों के लिए आकर्षक एवं लाभकारी बनाया जा सके।

यह महत्वपूर्ण पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों का सहयोग करती है, जो अधिक समावेशी शैक्षिक वातावरण को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा को बढ़ावा देने की सिफारिश करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पैरा 4.22 में कहा गया है कि भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) को पूरे देश में मानकीकृत किया जाएगा और श्रवण बाधित विद्यार्थियों के उपयोग के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की पाठ्यक्रम सामग्री विकसित की जाएगी। जहां तक ​​संभव एवं प्रासंगिक होगा, स्थानीय सांकेतिक भाषाओं का सम्मान किया जाएगा और उन्हें पढ़ाया भी जाएगा।

भारतीय सांकेतिक भाषा को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक विशेष पीएम ई-विद्या चैनल की संकल्पना राष्ट्रीय शिक्षा नीति को एक भाषा के साथ-साथ एक स्कूल विषय के रूप में बढ़ावा देने के लिए की गई है, ताकि बड़ी आबादी को भाषा सीखने की सुविधा मिल सके। यह 24×7 चैनल स्कूली बच्चों (केन्द्रीय एवं राज्य पाठ्यक्रम), शिक्षकों, अध्यापक प्रशिक्षकों तथा अन्य हितधारकों के लिए कैरियर मार्गदर्शन, कौशल प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य, कक्षावार पाठ्यचर्या सामग्री, संचार कौशल के क्षेत्र में शिक्षण सामग्री का प्रसार करेगा और साथ ही सभी के लिए हिंदी, अंग्रेजी जैसी मौखिक भाषाओं की तरह सांकेतिक भाषा को एक भाषा विषय के रूप में बढ़ावा देगा। यह सामग्री यूट्यूब पर भी उपलब्ध होगी।

कार्यक्रम में श्रवण बाधित (एचआई) बच्चों, श्रवण बाधित उपलब्धि प्राप्त कर्ताओं, विशेष शिक्षकों, आईएसएल प्रमाणित दुभाषियों और श्रवण बाधित समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए काम करने वाले संगठनों ने भाग लिया। इस दौरान मंत्रियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने आईएसएलआरटीसी, एनसीईआरटी, विद्यांजलि तथा एनआईओएस द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टालों का भी दौरा किया। कार्यक्रम के दौरान एचआई के छात्रों ने सांकेतिक भाषा में राष्ट्रगान गाया और एक नाटक भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में एचआई के सफल छात्रों पर एक लघु फिल्म भी दिखाई गई।

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