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देश में 146 जलाशयों की लाइव भंडारण स्थिति 59.503 बीसीएम, कुल संग्रहण 83.816 अरब घन मीटर होने का अनुमान

केंद्रीय जल आयोग देश के 146 जलाशयों की लाइव भंडारण स्थिति की साप्ताहिक आधार पर निगरानी कर रहा है। इन जलाशयों में से 18 जलाशय पनबिजली परियोजनाओं के हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 34.960 बीसीएम है। 146 जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 178.185 बीसीएम है जो देश में सृजित की गई अनुमानित भंडारण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 69.11 प्रतिशत है। दिनांक 13.07.2023 के जलाशय भंडारण बुलेटिन के अनुसार इन जलाशयों में उपलब्ध भंडारण 59.503 बीसीएम है जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 33 प्रतिशत है। हालाँकि पिछले वर्ष इसी अवधि के लिए इन जलाशयों में उपलब्ध संग्रहण 69.726 बीसीएम था और पिछले 10 वर्षों का औसत संग्रहण 53.904 बीसीएम था। 13.07.2023 के बुलेटिन के अनुसार 146 जलाशयों में उपलब्ध लाइव स्टोरेज पिछले वर्ष की इसी अवधि के लाइव स्टोरेज का 85 प्रतिशत और पिछले दस वर्षों के औसत स्टोरेज का 110 प्रतिशत है।

कुल भंडारण की स्थिति पूरे देश में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में कम है लेकिन पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के औसत भंडारण से बेहतर है।

देश में उपलब्ध लाइव स्टोरेज

दिनांक 13.07.2023 के जलाशय भंडारण बुलेटिन के अनुसार 146 जलाशयों के लिए उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर देश का कुल भंडारण 257.812 बीसीएम के मुकाबले 83.816 बीसीएम होने का अनुमान लगाया गया है।

विस्तृत विश्लेषण

सामान्य भंडारण का मतलब है पिछले दस वर्षों का औसत भंडारण, सामान्य भंडारण के करीब का मतलब है जहां कमी सामान्य से 20 प्रतिशत तक है, कमी वाले भंडारण का मतलब है जहां कमी सामान्य से 20 प्रतिशत से अधिक और 60 प्रतिशत तक है, अत्यधिक कमी का मतलब है जहां कमी सामान्य से 60 प्रतिशत से अधिक है।

गंगा, सिंधु, पेन्नार और कन्याकुमारी के बीच पूर्व की ओर बहने वाली नदियों, लूनी, नर्मदा, तापी, साबरमती, गोदावरी और महानदी सहित कच्छ और सौराष्ट्र की पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में सामान्य से बेहतर भंडारण उपलब्ध है तथा कावेरी, माही, पेन्नार और ब्रह्मपुत्र में सामान्य के करीब है। सुबर्णरेखा, बराक और अन्य, ब्राह्मणी और बैतरनी, महानदी और पेन्नार के बीच पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ, कृष्णा, तापी से ताड़ी तक पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ और ताड़ी से कन्याकुमारी तक पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में कमी, और अत्यधिक कमी किसी में नही है।

पिछले वर्ष की तुलना में अधिक भंडारण वाले जलाशयों की संख्या 49 है और पिछले दस वर्षों के औसत से अधिक भंडारण वाले जलाशयों की संख्या 68 है। पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत या उसके बराबर या कम भंडारण वाले जलाशयों की संख्या 10 है। पिछले दस वर्षों के औसत के संदर्भ में 20 प्रतिशत से कम या उसके बराबर 08 है। पिछले वर्ष के संदर्भ में 50 प्रतिशत से कम या उसके बराबर भंडारण वाले जलाशयों की संख्या 35 है और पिछले दस वर्षों का औसत 24 है।

पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में बेहतर भंडारण प्रतिशत वाले राज्य हैं- हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़।

पिछले वर्ष की इसी अवधि के बराबर भंडारण प्रतिशत वाला राज्य है- गुजरात।

पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में कम भंडारण प्रतिशत वाले राज्य हैं- पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, नागालैंड, बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, एपी एंड टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु ।

क्षेत्रवार भंडारण स्थिति

उत्तरी क्षेत्र

उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान राज्य शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में 10 जलाशय हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 19.663 बीसीएम है। दिनांक 13.07.2023 के जलाशय भंडारण बुलेटिन के अनुसार इन जलाशयों में उपलब्ध कुल भंडारण 12.554 बीसीएम है जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 64 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान भंडारण 26 प्रतिशत था और इसी अवधि के दौरान पिछले दस वर्षों का औसत भंडारण इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 35 प्रतिशत था। इस प्रकार चालू वर्ष के दौरान भंडारण पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में बेहतर है और इसी अवधि के दौरान पिछले दस वर्षों के औसत भंडारण से भी बेहतर है।

पूर्वी क्षेत्र

पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, नागालैंड और बिहार राज्य शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में 21 जलाशय हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 20.091 बीसीएम है। दिनांक 13.07.2023 के जलाशय भंडारण बुलेटिन के अनुसार इन जलाशयों में उपलब्ध कुल भंडारण 4.307 बीसीएम है जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 21 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान भंडारण 20 प्रतिशत था और इसी अवधि के दौरान पिछले दस वर्षों का औसत भंडारण इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 27 प्रतिशत था। इस प्रकार चालू वर्ष के दौरान भंडारण पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में बेहतर है, लेकिन पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के औसत भंडारण से कम है।

पश्चिमी क्षेत्र

पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात और महाराष्ट्र राज्य शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में 49 जलाशय हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 37.130 बीसीएम है। दिनांक 13.07.2023 के जलाशय भंडारण बुलेटिन के अनुसारे इन जलाशयों में उपलब्ध कुल भंडारण 12.070 बीसीएम है जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 33 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान भंडारण 41 प्रतिशत था और इसी अवधि के दौरान पिछले दस वर्षों का औसत भंडारण इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 28 प्रतिशत था। इस प्रकार चालू वर्ष के दौरान भंडारण पिछले वर्ष के भंडारण से कम है लेकिन इसी अवधि के दौरान पिछले दस वर्षों के औसत भंडारण से बेहतर है।

केन्द्रीय क्षेत्र

मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में 26 जलाशय हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 48.227 बीसीएम है। दिनांक 13.07.2023 के जलाशय भंडारण बुलेटिन के अनुसार इन जलाशयों में उपलब्ध कुल भंडारण 19.055 बीसीएम है जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 40 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान भंडारण 37 प्रतिशत था और इसी अवधि के दौरान पिछले दस वर्षों का औसत भंडारण इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 33 प्रतिशत था। इस प्रकार चालू वर्ष के दौरान भंडारण पिछले वर्ष के भंडारण से बेहतर है और इसी अवधि के दौरान पिछले दस वर्षों के औसत भंडारण से भी बेहतर है।

दक्षिणी क्षेत्र

दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, एपी एंड टीजी (दोनों राज्यों में 2 संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु राज्य शामिल हैं। सीडब्ल्यूसी की निगरानी में 40 जलाशय हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 53.074 बीसीएम है। दिनांक 13.07.2023 के जलाशय भंडारण बुलेटिन के अनुसार इन जलाशयों में उपलब्ध कुल भंडारण 11.517 बीसीएम है जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 22 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान भंडारण 52 प्रतिशत था और इसी अवधि के दौरान पिछले दस वर्षों का औसत भंडारण इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 29 प्रतिशत था। इस प्रकार, चालू वर्ष के दौरान संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के संग्रहण से कम है और पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के औसत संग्रहण से भी कम है।

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