आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) के सचिव मनोज जोशी ने आज राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में 14 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के अतिरिक्त 126 शहरों में ‘स्वनिधि से समृद्धि’ योजना का शुभारंभ किया।
‘स्वनिधि से समृद्धि’, पीएमस्वनिधि की एक अतिरिक्त योजना है जो 4 जनवरी 2021 को चरण-1 में 125 शहरों में शुरू किया गया था, जिसमें लगभग 35 लाख स्ट्रीट वेंडर और उनके परिवार को शामिल किया था। साथ ही 22.5 लाख की योजनाओं की मंजूरी दी गई है, जिसमें प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना के तहत 16 लाख बीमा लाभ और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत 2.7 लाख पेंशन लाभ शामिल है।
चरण-1 की सफलता को ध्यान में रखते हुए एमओएचयूए ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए कुल 20 लाख योजना स्वीकृतियों के लक्ष्य के साथ 28 लाख स्ट्रीट वेंडर और उनके परिवारों को कवर करने के उद्देश्य से देश के अतिरिक्त 126 शहरों में इस योजना का विस्तार शुरू किया है। बचे शेष शहरों को धीरे-धीरे इस योजना से जोड़ा जाएगा।
एमओएचयूए ने 1 जून 2020 से प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्म निर्भर निधि (पीएम स्वानिधि), एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना लागू कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य स्ट्रीट वेंडर्स को कम ब्याज दर और आसान शर्तों पर काम करने के लिए पूंजी ऋण प्रदान करना है। इस योजना ने सफलतापूर्वक 30 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को फायदा पहुंचाया है जैसा कि माननीय प्रधानमंत्री ने कल्पना की थी, इस योजना का उद्देश्य न केवल रेहड़ी-पटरी वालों को ऋण देना है, बल्कि उनका समग्र विकास और आर्थिक उत्थान भी करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेहड़ी-पटरी वालों को उनके समग्र विकास और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने के लिए ‘स्वनिधि से समृद्धि’ कार्यक्रम शुरू किया गया था।
एमओएचयूए के सचिव ने आज अपने संबोधन में कहा कि इस योजन के कार्यान्वयन से वित्त वर्ष 2020-21 में कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, यह योजना रेहड़ी-पटरी वाले परिवारों को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने में सफल रहा है। साथ ही उनके जीवन और आजीविका के जोखिम में पड़ने से बचाया है। मनोज जोशी ने भाग लेने वाले केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों से शहरों के रेहड़ी-पटरी वालों के समग्र विकास की दिशा में प्रयास करने और इस कार्यक्रम को एक बार फिर सफल बनाने का आग्रह किया।
एमओएचयूए के अतिरिक्त सचिव, संजय कुमार ने उल्लेख किया कि यह योजना दो तरह से सफल हुई है: एक, स्ट्रीट वेंडर्स और उनके परिवारों का एक केंद्रीय डेटाबेस विभिन्न सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के आधार पर बनाया गया है। दूसरा, रेहड़ी-पटरी वाले परिवारों तक कल्याणकारी योजनाओं के सुरक्षा का विस्तार करने के लिए विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के बीच अपनी तरह का पहला अंतर-मंत्रालयी मंच स्थापित किया गया है।
कार्यक्रम के तहत, भारत सरकार की 8 कल्याणकारी योजनाओं के लिए उनकी पात्रता का आकलन करने और पात्र योजनाओं की मंजूरी के लिए पीएमस्वानिधि लाभार्थियों और उनके परिवारों की सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग की जाती है। इन योजनाओं में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जन धन योजना, भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम (बीओसीडब्ल्यू), प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना, राष्ट्रीय, खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) पोर्टेबिलिटी लाभ-एक राष्ट्र एक राशन कार्ड (ओएनओआरसी), जननी सुरक्षा योजना, और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के तहत पंजीकरण शामिल हैं। इस योजना के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) कार्यान्वयन भागीदार है।
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