संचार मंत्रालय के तहत दूरसंचार विभाग ने भारतीय टेलीग्राफ (अवसंरचना सुरक्षा) नियम- 2022 तैयार किया है। डिजिटल अवसंरचना और सेवाएं तेजी से देश के विकास और कल्याण के प्रमुख सहायक व निर्धारकों के रूप में उभर रही हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने एक लचीली, सुरक्षित, सुलभ व सस्ती डिजिटल संचार अवसंरचना और सेवाओं की स्थापना के माध्यम से नागरिकों व उद्यमों की संचार संबंधित जरूरतों को पूरा करने की परिकल्पना की है।
सरकार/टीएसपी/आईपी ने मिलकर दूरसंचार क्षेत्र से संबंधित चिंता के विभिन्न मुद्दों के लिए अखिल भारतीय दूरसंचार अवसंरचना नेटवर्क की स्थापना की है। आम तौर पर विभिन्न एजेंसियां उत्खनन गतिविधियों का परिचालन करती हैं। इस दौरान जमीन के नीचे स्थित मौजूदा उपयोगिताओं (यूटिलिटी) के बारे में एजेंसियों की जानकारी की कमी या इन परिसंपत्तियों की स्वामित्व वाली एजेंसियों के साथ समन्वय की कमी के कारण इन परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचता है।
इन नुकसानों से उपयोगिता परिसंपत्ति मालिकों को आर्थिक हानि के साथ-साथ व्यापार में नुकसान और जनता को असुविधा भी होती है। अकेले दूरसंचार क्षेत्र में हर साल लगभग 10 लाख ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) को नुकसान होता है। इससे हर साल लगभग 3000 करोड़ रुपये का आर्थिक हानि होती है।
इसके अनुरूप मौजूदा दूरसंचार अवसंरचना की सुरक्षा के मुद्दों का समाधान करने के लिए नियमों/विनियमों/नीति की जरूरत उत्पन्न हुई। इसके लिए सरकार ने भारतीय टेलीग्राफ (अवसंरचना सुरक्षा) नियम- 2022 तैयार किया है। इसे 3 जनवरी, 2023 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया है।
इन नियमों और एप की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
कोई भी व्यक्ति किसी संपत्ति के उत्खनन या इसके कानूनी अधिकार का उपयोग करना चाहता है, जिससे दूरसंचार अवसंरचना को नुकसान होने की आशंका है, इसके लिए वह उत्खनन को शुरू करने से पहले सामान्य पोर्टल के माध्यम से लाइसेंसधारी को नोटिस देगा।
इसकी जानकारी में कानून का उपयोग करने वाले व्यक्ति का नाम व पता, एजेंसी का विवरण, संपर्क विवरण, उत्खनन शुरू करने की तारीख व समय, उत्खनन का विवरण व स्थान और इस उत्खनन की जरूरत के कारण शामिल होंगे।
लाइसेंसधारी जल्द से जल्द टेलिग्राफ अवसंरचना को नुकसान से बचाने को लेकर समन्वय के लिए एहतियाती उपायों सहित अपनी स्वामित्व/नियंत्रित/प्रबंधित दूरसंचार अवसंरचना का विवरण, जिस जगह का वह उत्खनन करना चाहता है, उसके नीचे/ऊपर/साथ वाली परिसंपत्ति का विवरण सामान्य पोर्टल के माध्यम से प्रदान करें।
उत्खनन करने वाले/उपयोगिता परिसंपत्ति के मालिकों को एसएमएस, ईमेल और इन-एप अधिसूचना के माध्यम से सूचित किया जाएगा और एप से ही ‘क्लिक टू कॉल’ की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
खुदाई या उत्खनन करने वाला व्यक्ति लाइसेंसधारी द्वारा उपलब्ध कराए गए एहतियाती उपायों पर उचित कार्रवाई करेगा।
अगर कोई लाइसेंसधारी निर्धारित अवधि के भीतर विवरण प्रदान नहीं करता है, तो खुदाई या उत्खनन करने का कानूनी अधिकार रखने वाला व्यक्ति परिसंपत्ति की खुदाई या उत्खनन करने के लिए स्वतंत्र होगा।
इसके अलावा कोई भी व्यक्ति, जिसने दूरसंचार अवसंरचना को नुकसान पहुंचाने वाली किसी परिसंपत्ति की खुदाई/उत्खनन किया है, वह दूरसंचार प्राधिकरण को नुकसान शुल्क का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
इन नुकसानों का आकलन परिसंपत्ति को फिर से सही करने के लिए होने वाले व्ययों के आधार पर किया जाएगा।
एक बार परिसंपत्ति स्वामित्व वाली एजेंसियां प्रधानमंत्री गतिशक्ति एनएमपी मंच पर जीआईएस निर्देशांक के साथ अपनी मौजूद परिसंपत्तियों का मानचित्रण कर लेती हैं, तो इससे उत्खनन शुरू होने से पहले संबंधित स्थल पर मौजूद उपयोगिता संपत्तियों के बारे में जानना संभव होगा।
लाभ (केंद्र और राज्य सरकारों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए):
कई उपयोगिताओं को अवांछित नुकसान और उनकी बहाली से संबंधित व्ययों से बचाया जा सकता है। इस तरह सरकार के लिए व्यवसायों और इनसे संबंधित कर हानि के संबंध में हजारों करोड़ रुपये की बचत होगी।
लाभ (नागरिकों के लिए):
एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से बार-बार होने वाले ब्रेकडाउन के कारण नागरिकों को होने वाली असुविधा को कम किया जा सकता है।
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