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दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित चार-दिवसीय राष्ट्रीय आरोग्य मेला आज संपन्न हुआ

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित चार-दिवसीय राष्ट्रीय आरोग्य मेला आज संपन्न हो गया। इस समापन समारोह के मुख्य अतिथि आयुष तथा महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री डॉ. मुंजपरा महेंद्रभाई थे।

यह कार्यक्रम आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध एवं होम्योपैथी के लाभों एवं सिद्धांतों को प्रदर्शित करने वउनके बारे में जागरूकता पैदा करने, समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़ी कार्यप्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने, चिकित्सकों, विशेषज्ञों एवं उत्साही लोगों के बीच सहयोग व ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देने तथाआयुष प्रणालियों से संबंधित उत्पादों व सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए व्यवसाय जगतएवं विक्रेताओं को स्थान प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

इस अवसर पर, डॉ. मुंजपरा महेंद्रभाई ने कहा कि यह राष्ट्रीय आरोग्य मेला एकजुटहोने और आयुष के सभी पहलुओं को गहराई से अवगत होने से संबंधित है। बाजार, वैज्ञानिक समुदाय, जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों, नवप्रवर्तकों, स्टार्ट-अप, खरीदारों और विक्रेताओं की उपस्थिति ने इस मेले को सफल बनाया है। उन्होंने कहा कि आयुष के विभिन्न पहलुओं पर हुई पैनल चर्चाओं ने इसका महत्व बढ़ाया है। उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है किइस राष्ट्रीय आरोग्य मेले में, हम सभी ‘अमृत काल’ में एक व्यापकअसर पैदा करने वाले आयुषकी अंतर्दृष्टि से अच्छी तरह परिचित हुए हैं।”

केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा कि पिछले दस वर्षों के दौरान देश ने यह देखा है कि कैसे भारत सरकार ने एक संपूर्ण सरकार का दृष्टिकोण अपनाते हुए और आयुष मंत्रालय एवं भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को ध्यान में रखते हुए, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओंकी आपूर्ति में समग्र स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी है। आयुष मंत्रालय आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान खोजने हेतु एकीकृत स्वास्थ्य के बारे में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकरघनिष्ठता से काम कर रहा है।

पूरन चंद्र गुप्ता स्मारक ट्रस्ट द्वारा आयुष मंत्रालय के सहयोग से 1 फरवरी, 2024 से लेकर4 फरवरी, 2024 तक नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियममें आयोजित राष्ट्रीय आरोग्य मेले में आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी सहित भारत की समृद्ध उपचार परंपराओं का एक गतिशील संगम दिखाई दिया। यह चार-दिवसीय कार्यक्रम देश की विविध संस्कृति और स्वास्थ्य सेवा में ऐतिहासिक विरासत के जीवंत प्रमाण के रूप में कार्य करता है। यह समग्र कल्याण पर जोर देते हुए, चिकित्सा की पारंपरिक प्रणाली का उत्सव मनाने और उन्हें प्रदर्शित करने के एक मंच के रूप में आगे बढ़ता है।

‘कल्याण कार्यशालाएं व सेमिनार, आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, प्राकृतिक चिकित्सा और होम्योपैथी से जुड़ी प्रदर्शनियां, मुफ्त स्वास्थ्य परामर्श, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि इस आयोजन के कुछ प्रमुख आकर्षण थे।

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