“रोगों की निगरानी, रोगों की रोकथाम, नियंत्रण और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एनसीडीसी की क्षेत्रीय शाखाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ये शाखाएं अविलंब निगरानी, त्वरित पहचान और रोगों पर नजर रखने और इस प्रकार आरंभिक हस्तक्षेपों को समर्थ बनाते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहन देंगी।” ये विचार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 6 राज्यों- (आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश) में एनसीडीसी की शाखाओं की आभासी रूप से आधारशिला रखते हुए प्रकट किए।
डॉ. मांडविया ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देशभर में स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूती प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। दृष्टिकोण “टोकन” से “समग्र यानी टोटल” में परिवर्तित हो चुका है, जिसमें राज्य सबके लिए गुणवतापूर्ण, किफायती और सुगम स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए सहयोगपूर्ण और सहकारी संघवाद की भावना के साथ हमारे साझेदार हैं।” डॉ. मांडविया ने कहा कि देशभर में स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाना प्रधानमंत्री का विजन है। भारत सरकार ने प्रधानमंत्री-आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के अंतर्गत राज्यों में विभिन्न बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 64,000 करोड़ रुपए की राशि को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में फैली कोविड-19 महामारी ने हमें संक्रामक रोगों के उभरने और उनके दोबारा सिर उठाने के महत्व को दर्शाया है जो न केवल स्थानीय स्तर पर प्रकोप का कारण बनते हैं, बल्कि महामारी का रूप भी धारण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एनसीडीसी शाखाएं बीमारियों की समयबद्ध निगरानी और उप पर नजर रखने में राज्यों की सहायता करेंगी। उन्होंने कहा कि इससे आरंभ में चौकस किया जा सकेगा, जिससे फील्ड से एकत्र किए गए प्रमाण के आधार पर समय पर हस्तक्षेप किया जा सकेगा। राज्यों की शाखाएं अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी की मदद से आंकड़ों और सूचना को वास्तविक समय के आधार पर साझा करते हुए नई दिल्ली स्थित एनसीडीसी मुख्यालय के साथ तालमेल कायम करेंगी। एनसीडीसी की शाखाएं अद्यतन दिशा-निर्देशों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण सिद्ध होंगी ताकि सटीक वैज्ञानिक आधार वाली सूचना का सुगमता से प्रसार किया जा सके।
वर्तमान में, एनसीडीसी की राज्यों में आठ शाखाएं हैं जो एक अथवा कुछ रोगों पर ध्यान देती हैं, इन्हें पुनरुद्देशित किया जाएगा और एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर), बहु-क्षेत्रीय और कीटविज्ञान संबंधी जांच आदि से संबंधित एकीकृत रोग निगरानी गतिविधियों के लिए नई शाखाओं को जोड़ा जा रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एनसीडीसी प्रयोगशाला ब्लॉक-1, आवासीय परिसर और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के एनआरएल का भी उद्घाटन किया। एनसीडीसी प्रयोगशाला ब्लॉक में सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित बैक्टीरियल, वायरल, फंगल और परजीवी रोगों से संबंधित अत्याधुनिक परीक्षण और रेफरल प्रयोगशालाएं निहित होंगी। यह प्रयोगशाला 50 उच्च क्षमता वाली प्रयोगशालाओं से सुसज्जित है जिनमें 30 बायो सेफ्टी लेबल 3 प्रयोगशालाएं, 5 आरटी-पीसीआर प्रयोगशालाएं और 15 अन्य प्रयोगशालाएं शामिल हैं। इन प्रयोगशालाओं को न केवल परीक्षण सुविधाएं प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा, बल्कि ये देश भर में प्रयोगशालाओं के पूरे नेटवर्क को व्यावहारिक प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और गुणवत्ता आश्वासन सेवाएं भी प्रदान करेंगी।
इस आभासी कार्यक्रम में विदेश एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री वी. मुरलीधरन, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. तानाजी राव सावंत, अरुणाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री आलो लिबांग, सांसद शशि थरूर, उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, विधायक राजेश्वर सिंह, विधायक ताना हाली तारा और अन्य गण्यमान्य हस्तियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव राजेश भूषण, डीजीएचएस, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के डॉ. प्रो. अतुल गोयल और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अपर सचिव लव अग्रवाल भी उपस्थित थे।
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