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डॉ. भारती प्रवीण पवार ने इबोला वायरस रोग पर वन इंडिया एफईटीपी रोडमैप दस्तावेज़ और सीडी अलर्ट का अनावरण किया

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीन पवार ने हाल ही में रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर, सिगरा, वाराणसी में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वी के पॉल की उपस्थिति में दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के क्षेत्रीय महामारी विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, रोग निगरानी और स्वास्थ्य आपातकालीन प्रबंधन में कार्यरत डॉक्टरों के बीच महामारी विज्ञान के क्षेत्र में कौशल और दक्षताओं का निर्माण करना है।

महामारी विज्ञान योग्यता निर्माण की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉ. पवार ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, भारत के समर्थन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ और ‘भव्य काशी-दिव्य काशी’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए प्रकोप निगरानी और प्रतिक्रिया के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यबल को भारत में मजबूत करना होगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि “यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कोविड प्रबंधन को मजबूत करने में काफी कारगर साबित होगा। इस सम्मेलन में होने वाली पैनल चर्चा और जो नतीजे सामने आएंगे, वे नीति योजना तैयार करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने आगे कहा, “सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जो देश भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यबल के कौशल निर्माण को मजबूत और बढ़ावा देगा”। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी तरह की महामारी से निपटने के लिए एक मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यबल नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।

डॉ. पवार ने कार्यक्रम में इबोला वायरस रोग पर वन इंडिया एफईटीपी रोडमैप दस्तावेज़ और सीडी अलर्ट का अनावरण किया।

आयुष्मान भारत मिशन के तहत की गई पहलों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. पवार ने कहा कि आयुष्मान भारत- स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, टीबी, फाइलेरिया, कालाजार, डेंगू, मलेरिया आदि की जांच की जा रही है, जबकि टेली-परामर्श सेवा उपलब्ध है। इसे कोविड-19 के बाद से भी प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि “प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश भर में 5 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं, जो देश के किसी भी राज्य में 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का लाभ उठा सकते हैं”। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि “आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पहल के तहत आधुनिक लैब तैयार की जा रही हैं और आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत स्वास्थ्य रिकॉर्ड केवल मोबाइल पर उपलब्ध कराया जा रहा है”।

उन्होंने सामुदायिक स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सभी सीएचओ और आशा कार्यकर्ताओं के लिए आभार व्यक्त किया और उनकी प्रशंसा की।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल ने उपेक्षित बीमारियों (एनटीडी) के उन्मूलन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “भारत को दक्षिण पूर्व एशिया में आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यबल विकास में क्षेत्रीय नेता के रूप में स्थापित करने और प्रदर्शित करने के लिए सम्मेलन कोविड महामारी के दौरान भारत सरकार की रणनीतिक योजनाओं और प्रतिक्रियाओं के सफल कार्यान्वयन पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।”

भारत सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के नेतृत्व में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (आईसीएमआर-एनआईई), चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और रोग नियंत्रण केंद्र, भारत द्वारा आयोजित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) यूएसए के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) इस कार्यक्रम का समन्वय करने वाला सर्वोच्च निकाय है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रधानमंत्री के स्किल इंडिया विजन की तर्ज पर तैयार किया गया है। यह कार्यक्रम यूएस सीडीसी के सहयोग से वर्ष 2012 से 2020 तक लागू किया गया था। कोविड-19 महामारी के दौरान इसकी उपयोगिता को देखते हुए वर्ष 2021 से यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, भारत सरकार के माध्यम से पूरी तरह से वित्त पोषित है और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय भारत सरकार द्वारा समर्थित है।

कार्यक्रम में अमेरिका, जापान, नेपाल, बांग्लादेश और फिलीपींस के प्रतिनिधि शामिल हैं, जिनमें देश के 17 राज्यों के डॉक्टर, महामारी विशेषज्ञ और वैज्ञानिक शामिल हैं। वर्तमान में एनसीडीसी में 25 से अधिक अधिकारी इस प्रशिक्षण में हिस्सेदारी कर रहे हैं। तीन दिवसीय सम्मेलन में अधिकांश राज्य स्वास्थ्य विभागों, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और क्षेत्रीय महामारी विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रम के 300 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। प्रतिनिधियों के पास राष्ट्रीय/राज्य/जिला स्तर पर व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुभव है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य), उत्तर प्रदेश सरकार के पार्थ सारथी शर्मा, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल, एनसीडीसी के प्रधान सलाहकार डॉ. सुजीत कुमार सिंह और भारत में डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि डॉ. रोडेरिको एच ओफ्रिन भी उपस्थित थे।

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