विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि सुरक्षा परिषद में सुधारों की शुरूआत अफ्रीका महाद्वीप की आवाज कारगर ढंग से सुने जाने के साथ होनी चाहिए। वे क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संगठनों के बीच सहयोग के बारे में सुरक्षा परिषद की उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। डॉ जयशंकर ने विस्तारित सुरक्षा परिषद में अफ्रीका से स्थाई प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि अफ्रीका के साथ भारत की भागीदारी 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बताये गए 10 मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार संचालित है। विदेशमंत्री ने कहा कि भारत अफ्रीका की प्राथमिकताओं, उसके हितों और उसकी आकांक्षाओं के अनुसार उसके लिए काम करता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत का यह मानना है कि वैश्विक व्यवस्था में अफ्रीका का उदय अनिवार्य है।
डॉ जयशंकर ने कहा कि सुरक्षा परिषद को शांति और सुरक्षा के मामलों में संबद्ध देशों द्वारा अपनाये गए क्षेत्रीय दृष्टिकोण का सम्मान करना चाहिए और उसे साझा चुनौतियों का समाधान करने के लिए क्षेत्रीय संगठनों के साथ सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र महासचिव के इस आह्वान का समर्थन करता है कि आतंकरोधी अफ्रीकी प्रयासों का समर्थन किया जाए। उन्होंने कहा कि अफ्रीका में शांति स्थापना मिशन स्पष्ट और सुविचारित कार्यनीति के अनुसार चलाए जाने चाहिए।
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