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टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग सेंटर (टीईसी) ने ‘कोड ऑफ प्रैक्टिस फॉर सेक्योरिंग कंज्यूमर इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी)’ जारी की

संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग सेंटर (टीईसी) ने उपभोक्ता इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) उपकरणों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से वैश्विक मानकों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप एक आधारभूत आवश्यकता के रूप में “कोड ऑफ प्रैक्टिस फॉर सेक्योरिंग कंज्यूमर इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी)” नाम की एक रिपोर्ट जारी की है। ये दिशानिर्देश उपभोक्ता आईओटी उपकरणों एवं इकोसिस्टम को सुरक्षित करने के साथ-साथ इससे संबंधित कमजोरियों के प्रबंधन में मदद करेंगे। यह रिपोर्ट आईओटी उपकरणों के निर्माताओं, सेवा प्रदाताओं / सिस्टम इंटीग्रेटर्स और एप्लिकेशन डेवलपर्स आदि के उपयोग के लिए है।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) दुनिया भर में बेहद तेजी से उभरती हुई तकनीकों में से एक है, जोकि समाज, उद्योग और उपभोक्ताओं के लिए व्यापक लाभकारी अवसर प्रदान करती है। इस तकनीक का उपयोग कनेक्टेड उपकरणों की सहायता से बिजली, मोटर वाहन, सुरक्षा एवं निगरानी, दूरस्थ स्वास्थ्य प्रबंधन, कृषि, स्मार्ट होम और स्मार्ट सिटी आदि जैसे विभिन्न कार्यक्षेत्रों में स्मार्ट बुनियादी ढांचे के निर्माण में किया जा रहा है। सेंसर, संचार प्रौद्योगिकियों (सेलुलर और गैर-सेलुलर), एआई/एमएल, क्लाउड/एज कंप्यूटिंग इत्यादि जैसी विभिन्न प्रौद्योगिकियों में हालिया प्रगति से आईओटी लाभान्वित हुई है।

अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2026 तक वैश्विक स्तर पर 26.4 बिलियन आईओटी उपकरण उपयोग में लाए जा सकते हैं। इसमें से लगभग 20 प्रतिशत उपकरण सेलुलर प्रौद्योगिकियों पर आधारित होंगे। उपभोक्ता और उद्यम आईओटी उपकरणों का अनुपात 45 प्रतिशत:55 प्रतिशत का हो सकता है।

दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा जारी राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति (एनडीसीपी) 2018 के अनुसार, वर्ष 2022 तक पांच बिलियन कनेक्टेड उपकरणों के लिए एक इकोसिस्टम बनाया जाना है। इसलिए, यह उम्मीद की जाती है कि वर्ष 2022 तक भारत में पांच बिलियन का लगभग 60 प्रतिशत यानी तीन बिलियन कनेक्टेड उपकरण मौजूद हो सकते हैं।

आईओटी उपकरणों की पूर्वानुमानित वृद्धि को देखते हुए, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आईओटी से जुड़े अंतिम बिंदु संरक्षा एवं सुरक्षा संबंधी मानकों तथा दिशानिर्देशों का पालन करें ताकि उपयोगकर्ताओं और इन आईओटी उपकरणों को जोड़ने वाले नेटवर्क की सुरक्षा की जा सके। दैनिक जीवन में उपयोग किए जा रहे उपकरणों / नेटवर्क की हैकिंग से कंपनियों, संगठनों, राष्ट्रों और इन सबसे भी ऊपर आम लोगों को नुकसान होगा। इसलिए, आईओटी इकोसिस्टम को एंड-टू-एंड यानी उपकरणों से लेकर अनुप्रयोगों तक सुरक्षित करना बेहद महत्वपूर्ण होगा।

दूरसंचार विभाग के अंतर्गत टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग सेंटर (टीईसी) विविध हितधारकों के साथ भागीदारी करते हुए आईओटी के क्षेत्र में काम कर रहा है और इसने सोलह तकनीकी रिपोर्टें जारी की हैं।

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