भारत की जी20 अध्यक्षता में शेरपा ट्रैक के तहत आयोजित जी20-मुख्य वैज्ञानिक सलाहकारों की दूसरी गोलमेज बैठक (जी20-सीएसएआर) आज गुजरात के गांधीनगर में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक का समापन सभी जी20 देशों और आमंत्रित देशों की आपसी सहमति से तैयार परिणाम दस्तावेज और अध्यक्ष के सार के साथ हुआ।
समावेशी और कार्य-उन्मुख तरीके से वैश्विक विज्ञान सलाह तंत्र को लेकर तालमेल बनाने की दिशा में जी20-सीएसएआर एक प्रयास है, जिससे तथ्यपूर्ण नीति निर्माण को सक्षम बनाया जा सके। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान सलाह को मजबूत किया जा सके।
दिनभर चली चर्चा के दौरान जिन प्राथमिकताओं वाले क्षेत्रों पर बात की गई, उनमें (क) बेहतर तरीके से बीमारियों की रोकथाम, नियंत्रण और महामारी से निपटने की तैयारियों के लिए वन हेल्थ के तहत अवसरों का लाभ उठाना (ख) वैज्ञानिक ज्ञान तक पहुंच का विस्तार करने के लिए वैश्विक प्रयासों को एकजुट करना (ग) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में समानता, विविधता, समावेशी दृष्टिकोण एवं पहुंच के साथ ही ज्ञात एवं अज्ञात उभरती प्राथमिकताएं सुनिश्चित करना और (घ) एक समावेशी, सतत और कार्रवाई-उन्मुख वैश्विक विज्ञान सलाह तंत्र तैयार करना शामिल था।
जी20-सीएसएआर बैठक में जी-20 के सदस्य देशों, आमंत्रित देशों और दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों- डब्ल्यूएचओ और यूनेस्को के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भागीदारी की। इस बैठक का नेतृत्व भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने किया। उन्होंने जी20 देशों और आमंत्रित देशों की ओर से जी20-सीएसएआर पहल को एक सतत व्यवस्था के रूप में आकार देने के तरीकों पर चर्चा करने को लेकर व्यक्त की गई प्रतिबद्धता की सराहना की।
जी20-सीएसएआर की बैठक को संबोधित करते हुए प्रोफेसर सूद ने कहा, “यह पहल एक समावेशी और सुदृढ़ वैश्विक विज्ञान सलाह तंत्र बनाने के मूल सिद्धांतों पर आधारित है, जो सबको सामूहिक और समान रूप से लाभान्वित करेगी तथा हमारे साझा विज़न को प्रतिबिंबित करेगी। इस पहल के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हितधारकों से मिल रहे जबरदस्त समर्थन को देखना प्रसन्नता भरा है।”
“बीमारियों की बेहतर रोकथाम, नियंत्रण और महामारी की तैयारी के लिए ‘वन हेल्थ’ में अवसरों का लाभ उठाना” – अपनी इस थीम के अंतर्गत, जी20 देशों ने वन हेल्थ के नज़रिए से मानव, पशु, पौधों और पर्यावरण के लिए सामूहिक रूप से अंतर्निर्भर स्वास्थ्य खतरों को संबोधित करने का महत्त्व सिद्ध किया। इन देशों ने रोग नियंत्रण से जुड़े ज्ञान और प्रौद्योगिकियों के लिए सहयोग और क्षमता विकास हेतु वर्चुअल स्थान तलाशने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इस क्षेत्र में सहयोग को सुगम करने के लिए ‘वन हेल्थ संस्थानों’ के बीच संपर्क और निरंतर जुड़ाव की भी सिफारिश की गई।
अपनी थीम “विद्वतापूर्ण वैज्ञानिक ज्ञान तक पहुंच का विस्तार करने के लिए वैश्विक प्रयासों का समन्वय” के अंतर्गत, जी20 देशों ने इस बात पर विचार किया कि जी20 सदस्य देशों के अंदर और बाहर समुदायों के लिए सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित, उपयुक्त विद्वतापूर्ण वैज्ञानिक ज्ञान तक तत्काल और सार्वभौमिक पहुंच को सुगम करने की ज़रूरत है। सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित अनुसंधान प्रकाशनों तक तत्काल और निःशुल्क पहुंच प्रदान करने के लिए दृष्टिकोण विकसित करने का महत्त्व माना गया।
“विज्ञान और प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम में विविधता, समानता, समावेश और पहुंच (डीईआईएंडए)” थीम के अंतर्गत, जी20 देशों ने पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने सुझाव दिया कि सांस्कृतिक रूप से प्रेरक और स्थानीय रूप से प्रासंगिक साक्ष्य-आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए इन प्रणालियों को समकालीन विज्ञान के बराबर देखा जाना चाहिए। समावेशन से जुड़े नीतिगत विमर्श में भाषाओं और ज्ञान प्रणालियों की बहुलता को पहचानने पर महत्त्व दिया गया।
चौथी थीम “एक समावेशी, निरंतर और कार्रवाई-उन्मुख वैश्विक विज्ञान सलाह तंत्र का सृजन” में आगे बढ़ने के तरीकों पर बातचीत करते हुए, जी20 देशों ने सर्वसम्मति से तय किया कि निरंतर जुड़ाव के लिए एक मजबूत, प्रासंगिक और प्रभावी तंत्र बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। इसमें प्रमुख विज्ञान सलाहकारों और उनके नामांकित समकक्षों को साथ लाया जाएगा तथा समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके तहत प्रभावी वैश्विक विज्ञान परामर्श की मांग की जाएगी, और समान वैश्विक सामाजिक लाभ को प्राप्त करने के लिए मौजूदा ज्ञान विषमताओं को दूर किया जाएगा।
जी20 देशों का लक्ष्य आगे की चर्चाओं और विचार-विमर्श के लिए मार्ग प्रशस्त करने के लिए जी20-सीएसएआर मंच का उपयोग करना है, जहां सदस्य और अंतर्राष्ट्रीय संगठन बहु-विषयी मुद्दों पर एकजुट हो सकते हैं, दो या अधिक संगठनों को विज्ञान सलाह प्रदान करने और विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए विज्ञान कूटनीति का उपयोग कर सकते हैं।
भारत की अध्यक्षता में हाल ही में शुरू की गई जी20-सीएसएआर पहल का उद्देश्य स्वैच्छिक ज्ञान और संसाधनों को साझा करने के लिए जगह बनाना है। लक्ष्य समावेशिता, विविधता, एक-दूसरे पर निर्भरता, पारदर्शिता, अद्वितीय विशेषज्ञता और सामूहिक हित के आधार पर विज्ञान सलाह प्रक्रिया में सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों का आदान-प्रदान करना है।
जी20-सीएसएआर की उद्घाटन बैठक 28 से 30 मार्च, 2023 तक रामनगर, उत्तराखंड में आयोजित की गई थी। तब से, परिणाम दस्तावेज़ और अध्यक्ष के सार पर समझौते पर पहुंचने के लिए चार अंतर-सत्रीय बैठकें, छह साइड इवेंट और कई द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
जी20-सीएसएआर पहल को आगे बढ़ाने के लिए बैटन ब्राजील को सौंप दी गई है।
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