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चुनाव आयोग ने 111 और पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सूची से हटाया और चुनाव चिन्ह आदेश (1968) के अंतर्गत लाभों को वापस लिया

निर्वाचन आयोग ने पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) द्वारा उचित परिपालनों को सुनिश्चित करने के लिए 25 मई 2022 को एक आदेश जारी किया। यह आदेश निर्वाचन आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय के साथ मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री राजीव कुमार की अध्यक्षता में आयोग की हुई बैठक के बाद जारी किया गया। इस आदेश में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के प्रासंगिक अनुच्छेद 29ए तथा 29सी का उचित परिपालनों के लिए कार्रवाई प्रारंभ करें।

25 मई 2022 को 87 अस्तित्वहीन पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों को सूची से हटाए जाने के बाद दूसरे चरण में आयोग ने आज (20 जून 2022) 111 अतिरिक्त पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त दलों को निर्वाचन आयोग के रजिस्टर की सूची से हटाने का निर्णय लिया। इन 111 पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों ने अनुच्छेद 29ए (4) और अनुच्छेद 29ए (9) का परिपालन नहीं किया था। अनुच्छेद 29ए (4) में पंजीकरण के लिए आवश्यक पत्र-व्यवहार का पता देने का प्रावधान है और अनुच्छेद 29ए (9) में पत्र व्यवहार के पते में किसी तरह के परिवर्तन की जानकारी आयोग को देने का प्रावधान है। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने बताया है कि सत्यापन पर ऐसे पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त राजनीतिक दल अस्तित्व में नहीं पाए गए हैं या 25.05.2022 के आयोग के आदेश के अनुसार इन राजनीतिक दलों को भेजे गए पत्र डाक विभाग ने बिना प्राप्ति के वापस कर दिया है। आयोग ने यह निर्णय भी लिया कि इससे असंतुष्ट कोई भी दल संबंधित निर्वाचन अधिकारी/निर्वाचन आयोग से इस आदेश के जारी होने के 30 दिन के भीतर अस्तित्व के सभी साक्ष्यों/अन्य कानूनी तथा नियामक परिपालनों के साथ संपर्क कर सकते हैं। इन नियामक परिपालनों में प्रत्येक वर्ष का ऑडिट किया गया एकाउंट, योगदान रिपोर्ट, व्यय रिपोर्ट, वित्तीय लेन-देन (बैंक खाता सहित) के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता सहित दलों के पदाधिकारियों की अद्यतन जानकारी शामिल है। ऐसे पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों की अलग की गई सूची वर्तमान कानूनी ढांचे के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारियों तथा सीबीडीटी को भेजी जाएगी। इसके अतिरिक्त राजस्व विभाग को गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में शामिल 3 पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी और आपराधिक कार्रवाई के लिए संदर्भ भेजा गया है। वित्त वर्ष 2017-18, 2018-19 तथा 2019-20 में योगदान रिपोर्ट प्रस्तुत न करने के लिए क्रमशः- 1897, 2202 तथा 2351 पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों की एक सूची भी आईटी अधिनियम 1961 के प्रासंगिक प्रावधानों के साथ पढ़े गए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अनुसार सभी परिणामजनक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। अधिनियम के अनुच्छेद 29 सी के अंतर्गत अधिदेशित योगदान रिपोर्ट प्रस्तुत किए बिना आयकर में छूट प्राप्ति का दावा करने वाले 66 पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों की सूची भी राजस्व विभाग के साथ साझा की गई है।

25 मई 2022 को प्रारंभ यह कार्रवाई जारी रहेगी और व्यवस्थित रूप से इसका पालन किया जाएगा।

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