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ग्रिड पैमाने पर भंडारण, क्षमता बढ़ाने और चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक और पीएलआई योजना की आवश्यकता है: आर.के. सिंह

केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर. के. सिंह ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति और आगे की राह पर अपना दृष्टिकोण, व्यापार और निवेशक समुदाय के साथ साझा किया। आज, 20 जून, 2023 को नई दिल्ली में “द इकोनॉमिक टाइम्स” एनर्जी लीडरशिप समिट एंड अवार्ड्स’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ऊर्जा क्षेत्र में भारत के भविष्य के चार स्तंभों – ऊर्जा पहुंच, ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा स्थायित्व और ऊर्जा सुरक्षा, पर अथक रूप से काम कर रही है।

मंत्री ने बताया कि चूंकि नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण महंगा है, इसलिए सरकार पंप वाली जल विद्युत परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक नीति लेकर आई है। “पंप वाली हाइड्रो परियोजनाओं की विशाल क्षमता स्थापित की जा रही है। साथ ही, हमें ग्रिड भण्डारण के लिए बैटरी बनाने की जरूरत है। हमें ग्रिड पैमाने पर भंडारण के लिए एक और पीएलआई योजना की आवश्यकता है, ताकि हम अपनी क्षमता बढ़ा सकें और चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति प्राप्त कर सकें। हम यह सुनिश्चित करने के लिए भंडारण की क्षमता बढ़ाते रहेंगे, ताकि मांग बढ़ती रहे और निवेश होता रहे।“

केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने कहा कि देश ने नवीकरणीय ऊर्जा में बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। “आज, हमारी ऊर्जा क्षमता का 42% गैर-जीवाश्म-ईंधन से प्राप्त होता है। हमने 2030 तक इसे 50% तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन हम 2030 तक गैर-जीवाश्म-ईंधन से 65% क्षमता हासिल कर लेंगे। हम हर साल 50 जीडब्ल्यू क्षमता बढ़ाएंगे। हम सबसे तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा गंतव्य देश के रूप में उभरे हैं।“ आर.के. सिंह ने कहा कि हालांकि, हम सबसे तेज गति से नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का निर्माण कर रहे हैं, हम अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक तापीय क्षमता को बढ़ाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। “ऊर्जा परिवर्तन की हमारी गति दुनिया में सबसे तेज होगी, लेकिन हम अपनी ऊर्जा जरूरतों से समझौता नहीं करेंगे। 2030 में, मैं 800 जीडब्ल्यू को पार करने की क्षमता देखता हूं और यह वृद्धि सामान्य दर पर आधारित है।“

मंत्री ने श्रोताओं को याद दिलाया कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन लगभग 2 टन है, जबकि विश्व स्तर पर प्रति व्यक्ति औसत लगभग 6 टन है। पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और दुनिया की 17% आबादी का निवास-स्थल होने के बावजूद, वैश्विक उत्सर्जन में भारत का ऐतिहासिक योगदान केवल 4% रहा है। मंत्री ने कहा कि हम ऊर्जा परिवर्तन की आवश्यकता को महत्व देते हैं, क्योंकि सरकार भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ पृथ्वी सौंपने की आवश्यकता में विश्वास करती है। कम कार्बन नहीं, बल्कि नेट ज़ीरो की ओर बढ़ने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि हम वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में और वृद्धि का जोखिम नहीं उठा सकते हैं।

मंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2-3 दशकों तक मौजूदा दर से बढ़ती रहेगी और हम इस वृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते रहेंगे। मंत्री ने कहा कि हम अधिक से अधिक चार्जिंग स्टेशन जोड़ रहे हैं, हम ऊर्जा के विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। मंत्री ने देश के लिए हरित हाइड्रोजन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता को रेखांकित किया। “हमें सम्मिश्रण के लिए कोयले के आयात को कम करने की आवश्यकता है। हमें कोयला वाले क्षेत्रों से अपने लोजिस्टिक्स को मजबूत करने और अपने कोयला भंडार का दोहन करने की जरूरत है, जिसके लिए हम कोयला ब्लॉकों की नीलामी कर रहे हैं, ताकि आयात पर हमारी निर्भरता कम हो सके। हमारे ऊर्जा स्रोतों में भी बदलाव किया जाना है, जिसके लिए हरित हाइड्रोजन एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र है और एक बड़ा अवसर भी है। हमने वर्ष 2030 तक कम से कम 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मंत्री ने सोडियम आयन जैसी तकनीकों का उपयोग करते हुए आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में करीब 100 गीगावॉट बैटरी भंडारण क्षमता स्थापित की जायेगी, जिसमें से करीब 50 गीगावॉट निर्यात के लिए उपलब्ध होगी।

मंत्री ने कहा कि 2014 के बाद से, भारत ने कुल बिजली उत्पादन क्षमता में 184 गीगावॉट से अधिक की वृद्धि की है और कुल स्थापित क्षमता 417 गीगावॉट हो गयी है, जबकि अधिकतम मांग 221 गीगावॉट तक पहुंच गई है। उन्होंने आगे कहा, “हाल के दिनों में अधिकतम मांग में तेजी आई है और यह वृद्धि जारी रहेगी, लेकिन हमारे पास अभी पर्याप्त स्थापित क्षमता है।” बिजली मंत्री ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता 22.5 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 23.5 घंटे हो गई है। हमारा लक्ष्य इसे 24 घंटे तक ले जाना है।’

विद्युत् मंत्री ने जोर देकर कहा कि 2013 से अब तक, देश ने पारेषण लाइन में 1.8 लाख से अधिक सर्किट किलोमीटर की वृद्धि की है, जिसके तहत पूरे देश को एक ग्रिड से जोड़ा गया है, जो एक राष्ट्रीय नियंत्रण केंद्र के साथ एक आवृत्ति पर संचालित होता है। उन्होंने कहा कि पिछले 8 वर्षों में अंतर-क्षेत्रीय क्षमता में 74,300 मेगावाट की वृद्धि हुई है। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई), एकीकृत विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस) और ‘सौभाग्य’ के माध्यम से वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए 2.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। 2,900 नए सब स्टेशन निर्मित किये गए, 3,900 सब स्टेशन अपग्रेड किए गए और 8.73 लाख सर्किट किमी एचटी और एलटी लाइनें जोड़ी/बदली गईं, जिसके परिणामस्वरूप एक मजबूत वितरण प्रणाली तैयार हुई है।

मंत्री ने कहा कि सरकार ने बिजली क्षेत्र में कारोबार करने के तरीके में भी बदलाव किये हैं। “हमने ‘सामान्य नेटवर्क पहुँच’ पेश किया हैं, अब कोई भी पारेषण प्रणाली से जुड़ सकता है, ताकि बिजली की खरीद और बिक्री, स्थान को बिना ध्यान में रखते हुए, की जा सके।”

विद्युत् मंत्री ने याद दिलाया कि 2014 में, लगभग 18,500 गाँव और बस्तियाँ बिजली आपूर्ति से वंचित थीं, लेकिन सरकार ने हर गाँव और हर घर तक ऊर्जा पहुँचाने का फैसला किया और ऐसा करने में सफल रही।

विद्युत् मंत्री ने बिजली क्षेत्र में हुए सुधारों – कैसे ऊर्जा ऑडिट स्थापित किया गया, किस प्रकार वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की विरासत बकाया राशि को कम किया गया और घाटे में चलने वाली संस्थाओं को ऋण प्रदान करने के लिए विवेकपूर्ण मानदंडों को कैसे संशोधित किया गया आदि पर भी प्रकाश डाला।

अपने संबोधन के समापन में, मंत्री ने रेखांकित किया कि ऊर्जा स्रोतों में बदलाव के लक्ष्य के लिए हमें अफ्रीका में उन लाखों लोगों तक ऊर्जा पहुंच प्रदान करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है, जिनके पास ऊर्जा आपूर्ति की सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन इस दिशा में काम कर रहा है, लेकिन भारत को छोड़कर कोई अन्य देश मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है। “किफायती कीमत पर ऊर्जा की उपलब्धता आने वाले समय में एक प्रश्न बनी रहेगी; बाजार संरचना भी एक मुद्दा है; हमें उन लोगों की सहायता करने में सक्षम होना चाहिए, जिनके पास ऊर्जा तक पहुंच की सुविधा नहीं है। हमें एक व्यवस्था स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि अफ्रीका के देशों को निवेश प्राप्त हो सके। हम सभी को एक साथ आने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का निर्माण शुरू करने की आवश्यकता है, हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हरित हाइड्रोजन सफल हो, ताकि ऊर्जा स्रोतों में बदलाव किया जा सके; हमें व्यापार में बाधाओं का निर्धारण नहीं करना चाहिए।

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