केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज कर्नाटक के बेंगलुरु में ‘नशीली दवाओं की तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा’ पर क्षेत्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में 5 दक्षिणी राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति में जब्त किए गए 9,298 किलोग्राम मादक पदार्थों, जिसका मूल्य 1,235 करोड़ रुपये है, को नष्ट किया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी और कर्नाटक सरकार के बीच शिवमोगा में यूनिवर्सिटी का नया कैंपस खोलने संबंधी समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षर हुए।
अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने नशा मुक्त भारत बनाने के लिए नशीली दवाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के तहत 01 जून, 2022 से शुरू हुए 75 दिवसीय अभियान के दौरान 75,000 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अब तक जब्त की गई कुल 5,94,620 किलोग्राम नशीली दवाओं, जिसका मूल्य 8,409 करोड़ रुपये है, को नष्ट किया जा चुका है, जो लक्ष्य से कई गुना अधिक है।नष्ट की गई कुल नशीली दवाओं में से 3,138 करोड़ रुपये मूल्य की 1,29,363 किलोग्राम जब्त की गई दवाओं को अकेले एनसीबी ने नष्ट किया है।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर, गृह मंत्रालय नेमादक पदार्थों पर कार्रवाई करने के लिए एक त्रि-आयामी सूत्र अपनाया है।इस त्रि-आयामी सूत्र में संस्थागत संरचनाओं को मजबूत करना, नशीली दवाओं की रोकथाम से जुड़ी सभी एजेंसियों का सशक्तिकरण एवं उनके बीच समन्वय करना और एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाना शामिल है।उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी कीसमस्याकेन्द्र या किसी एक राज्य की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय समस्या है और इससे निपटने के प्रयास भी राष्ट्रीय एवं एकीकृत होने चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई सिर्फ किसी एक सरकार की लड़ाई नहीं जन-जन की लड़ाई है।उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए नियमित रूप से जिला-स्तरीय और राज्य-स्तरीय NCORD की बैठक आयोजित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया और कहा कि ऐसा किए बिना नशे के खिलाफ लड़ाई को जनआंदोलन बनाना संभव नहीं है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क पर नकेल कसने के लिएइससे जुड़े मामलों में इसके स्रोत से लेकर गंतव्य तक गहन जांच की जानी चाहिए और किसी भी मामले को आइसोलेशन में नहीं देखा जाना चाहिए। अमित शाह ने बताया कि वर्ष 2006-2013 के बीच कुल 1257 मामले दर्ज किए गए, जो 2014-2022 के बीच 152 प्रतिशत बढ़कर 3172 हो गए।जबकि, इसी अवधि के दौरान गिरफ्तारियों की कुल संख्या 1362 से 260 प्रतिशत बढ़कर 4888 हो गई।इसी तरह, 2006-2013 के दौरान 1.52 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गएजिसकी मात्रा 2014-2022 के दौरान दोगुनी होकर 3.30 लाख किलोग्राम हो गई। वर्ष2006-2013 के दौरान 768 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए।वर्ष 2014-2022 के दौरानइसमें 25 गुना बढ़ोतरी हुई और 20,000 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए।
अमित शाह ने कहा कि देश से ड्रग्स को ख़त्म करने के लिए मोदी सरकार के अभियान के चार प्रमुख स्तंभ हैं: ड्रग्स का Detection, नेटवर्क का Destruction, दोषियों का Detention और नशा करने वालों का Rehabilitation। उन्होंने कहा किसभी राज्यों को मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए NCORD पोर्टल और NIDAAN प्लेटफॉर्म का समुचित उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में गठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मजबूत करना भी समय की मांग है ताकि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक कार्रवाई की जा सके।इसके अलावा एनडीपीएस अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को भी सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि मोदी सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ ‘Whole of Government Approach’ अपनाया है और सभी विभागों व एजेंसियों के बीच कोऑपरेशन, कोऑर्डिनेशन और कोलैबोरेशन बढ़ाकर नशामुक्त भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।इसके अलावा उन्होंने कहा कि तटीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों पर फोकस बढ़ाने की ज़रूरत है और दक्षिणी समुद्री मार्ग में चौकसी और बढ़नी चाहिए।
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