Categories: News-Headlines

खुदरा बाजारों में खाद्य तेल की कीमतों में 5 रुपये से 20 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी गिरावट

भारत खाद्य तेलों के सबसे बड़े आयातकों में शुमार है क्योंकि देश का उत्पादन घरेलू मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं है। मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए देश को मुख्य रूप से आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। देश में खाद्य तेलों की कुल खपत का करीब 56-60 फीसदी आयात करना पड़ता है। वैश्विक उत्पादन में कमी और निर्यातक देशों द्वारा निर्यात शुल्कों या करों में बढ़ोतरी किए जाने के कारण खाद्य तेलों की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि की प्रवृति देखी गई है इसलिए, खाद्य तेलों की घरेलू कीमतें आयातित तेलों की कीमतों से निर्धारित होती हैं।

चूंकि घरेलू कीमतें अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के रुझान से नियंत्रित होती हैं, इसलिए देश में खाद्य तेलों के दाम पिछले एक साल से काफी उच्च स्तर पर रहे हैं, जोकि सरकार के लिए चिंता का एक प्रमुख कारण रहा है। कीमतों पर लगाम लगाने और अभूतपूर्व महंगाई से जूझ रहे उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। पिछले एक साल से खाने के तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए कच्चा पाम तेल, कच्चा सोयाबीन तेल और कच्चा सूर्यमुखी तेल पर बेसिक ड्यूटी यानी आधारभूत शुल्क 2.5 फीसदी से घटाकर शून्य कर दी गई है। इन तेलों पर कृषि उपकर कच्चे पाम तेल के लिए 20 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी और कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल के लिए 5 फीसदी कर दिया गया है।

शुल्कों में की गई उपर्युक्त कटौती के बाद कच्चे पाम तेल पर कुल आयात शुल्क अब 7.5 फीसदी और कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर 5 फीसदी है। आरबीडी पामोलिन तेल पर आधारभूत शुल्क हाल ही में 17.5 प्रतिशत से घटाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया है। रिफाइंड सोयाबीन और रिफाइंड सूर्यमुखी तेल पर आधारभूत शुल्क 32.5 फीसदी से घटाकर 17.5 फीसदी कर कर दिया गया है। कटौती से पहले, सभी प्रकार के कच्चे खाद्य तेलों पर कृषि अवसंरचना उपकर 20 फीसदी था। कटौती के बाद प्रभावी आयात शुल्क कच्चे पाम तेल पर 8.25 फीसदी, जबकि कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूर्यमुखी तेल में प्रत्येक पर 5.5 फीसदी है।

पाम तेल, सूरजमुखी तेल और सोयाबीन तेल पर आयात शुल्क को युक्तिसंगत बनाने के अलावा, एनसीडीईएक्स पर सरसों तेल में वायदा कारोबार को निलंबित कर दिया गया है और तेल व तिलहनों पर स्टॉक सीमा लगा दी गई है। अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी की कीमतें उच्च स्तर पर होने के बावजूद, केंद्र सरकार द्वारा किए गए हस्तक्षेपों के साथ-साथ राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी के कारण खाद्य तेलों की कीमतों में कमी आई है। हालांकि, खाद्य तेल की कीमतें पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अधिक हैं लेकिन अक्टूबर के बाद से गिरावट की प्रवृत्ति देखी जा रही है। वहीं, सरकार आयात पर निर्भरता कम करने के लिए द्वितीयक खाद्य तेलों, विशेष रूप से चावल की भूसी के तेल यानी राइस ब्रान ऑयल का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है।

विभाग नियमित रूप से तेल उद्योग संघों और बाजार के अग्रणी कारोबारियों के साथ बातचीत कर रहा है और उन्हें अधिकतम खुदरा कीमत यानी एमआरपी में कटौती करने के लिए मनाया गया है जिससे अंतिम उपभोक्ताओं को शुल्क में कमी का लाभ मिलेगा। देशभर के 167 मूल्य संग्रह केंद्रों के रुझान के अनुसार, देश के प्रमुख खुदरा बाजारों में खाद्य तेल की कीमतों में 5 रुपये से 20 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी गिरावट आई है। अदानी विलमर और रुचि इंडस्ट्रीज सहित प्रमुख खाद्य तेल कंपनियों ने कीमतों में 15-20 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। जिन अन्य कंपनियों ने खाद्य तेलों की कीमतों में कटौती की है, उनमें जेमिनी एडिबल्स एंड फैट्स इंडिया, हैदराबाद, मोदी नेचुरल्स, दिल्ली, गोकुल री-फॉयल एंड सॉल्वेंट, विजय सॉल्वेक्स, गोकुल एग्रो रिसोर्सेज और एन.के. प्रोटींस शामिल हैं।

विभिन्न खाद्य तेलों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया हालिया कदम सोयामील को लेकर है। सोयामील प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत है और पशुधन के चारे में इसका लगभग 30 फीसदी योगदान है। सोयामील को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की अनुसूची में शामिल करके इस पर स्टॉक सीमा लगा दी गई है जो 23 दिसंबर, 2021 से जून 2022 तक रहेगी। इससे कीमतों में नरमी आएगी और आपूर्ति में सुधार होगा। सरकार ने दिसंबर 2022 तक एक वर्ष की अवधि के लिए सभी आवश्यक वस्तुओं में वायदा कारोबार को भी निलंबित कर दिया है।

सरकार ने खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए कुछ दीर्घकालिक और मध्यम अवधि की योजनाएं भी शुरू की हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को विशेष रूप से केंद्र में रखकर हाल ही में खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन-पाम ऑयल (एनएमईओ-ओपी) एक नई केंद्र प्रायोजित योजना शुरू की गई है। खाद्य तेलों के आयात पर अत्यधिक निर्भरता के कारण, खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रयास करना महत्वपूर्ण था, जिसमें पाम तेल का बढ़ता क्षेत्र और उत्पादकता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कुल मिलाकर, आयात शुल्क में कटौती और जमाखोरी आदि पर अंकुश लगाने के लिए स्टॉक सीमा लगाने जैसे अन्य कदमों से सभी खाद्य तेलों की घरेलू कीमतों में नरमी लाने में मदद मिली है और उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली है।

Leave a Comment

Recent Posts

1 जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा “खेत बचाओ अभियान”

केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा है कि “खेत बचाओ अभियान” सिर्फ जागरूकता… Read More

12 hours ago

गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में सीमा संबंधी विषयों पर बैठक की अध्यक्षता की

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा (IPB) से लगे… Read More

12 hours ago

JEE Advanced 2026 के नतीजे घोषित, उम्मीदवारों के लिए रैंक, स्कोर और कटऑफ से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई।

JEE Advanced 2026 Result: रिजल्ट, रैंक और कटऑफ को लेकर बड़ी अपडेट देश की सबसे… Read More

12 hours ago

This website uses cookies.