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क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा समुदाय जैसे ही समुद्री सूचना साझाकरण कार्यशाला 2023 (MISW23) के लिए एकत्र हुआ

क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा समुदाय जैसे ही समुद्री सूचना साझाकरण कार्यशाला 2023 (एमआईएसडब्ल्यू23) के लिए एकत्र हुआ, भारत का गुरुग्राम इसका केंद्र बन गया। सूचना संलयन केंद्र- हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) द्वारा 14 सितंबर से 16 सितंबर, 2023 आयोजित होने वाली यह कार्यशाला हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) और जिबूती आचार संहिता/जेद्दा संशोधन (डीसीओसी/जेए) के 31 देशों को एक मंच पर ले आई है।

महासागर की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्देशन: महासागर मानवता की जीवनधारा है और समुद्री व्यापार वैश्विक वाणिज्य की आधारशिला है। हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) का महत्व इसकी भौगोलिक सीमाओं से कहीं अधिक दूरी तक फैला हुआ है; यह आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में कार्य करता है और यह महाद्वीपों के बीच तालमेल और भू-राजनीतिक गतिशीलता के मंच के रूप में भी कार्य करता है। समुद्री सुरक्षा न केवल आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह भू-राजनीतिक संतुलन के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। समकालीन चुनौतियां, समुद्री सुरक्षा और संरक्षा के लिए वैश्विक और क्षेत्रीय हितधारकों के बीच एकीकृत प्रतिबद्धता, सहयोगात्मक रणनीतियों और निर्बाध सूचना आदान-प्रदान की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। इस महत्वपूर्ण जरूरत को मान्यता देते हुए, सूचना संलयन केंद्र- हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर), गुरुग्राम का 22 दिसंबर, 2018 को उद्घाटन किया गया था। इसका उद्देश्य क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और संरक्षा को बढ़ाना है। आईएफसी-आईओआर का वर्तमान में कैप्टन रोहित बाजपेयी नेतृत्व कर रहे हैं। यह एक विशेष केंद्र है, जहां भागीदार देशों के अंतर्राष्ट्रीय संपर्क अधिकारी (आईएलओ) समुद्री सुरक्षा और संरक्षा की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सहयोग करते हैं। वर्तमान में बारह देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली, जापान, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, इंग्लैंड और अमेरिका के आईएलओ को इस केंद्र में नियुक्त किया गया है। यह शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध आईओआर सुनिश्चित करने के लिए आईएफसी-आईओआर 42 अन्य समुद्री सुरक्षा निर्माणों और अन्य 25 भागीदार देशों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करता है।

एमआईएसडब्ल्यू के साथ तालमेल स्थापित करना

‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (एसएजीएआर)’ के भारतीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए, आईएफसी-आईओआर कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित करता है, जिनमें समुद्री सूचना साझाकरण कार्यशाला (एमआईएसडब्ल्यू) एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। एमआईएसडब्ल्यू का उद्घाटन संस्करण 2019 में आयोजित किया गया था। एमआईएसडब्ल्यू विश्व में समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में कामकाजी स्तर के पेशेवरों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए एक गतिशील मंच है। यह सद्भाव कायम करने के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करता है और समुद्री सुरक्षा और संरक्षा के लिए खतरों से उत्पन्न विभिन्न प्रकार की चुनौतियों के लिए साझा और समन्वित प्रतिक्रिया के लिए पेशेवरों को एकजुट भी करता है। समुद्र में समुद्री डकैती और सशस्त्र लूटपाट से लेकर तस्करी के सामान, अनियमित और अवैध मानव प्रवास और अन्य समुद्री घटनाओं के खतरे आज स्वाभाविक रूप से अंतर्राष्ट्रीय हैं और ये वैश्विक समुद्री वाणिज्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित करते हैं।

एमआईएसडब्ल्यू 23 के लिए पाठ्यक्रम की रूपरेखा

एमआईएसडब्ल्यू 23 का 14 से 16 सितंबर, 2023 तक आयोजन निर्धारित है। यह साझेदार राष्ट्रों और क्षेत्रीय निर्माणों के साथ जुड़ाव को बढ़ावा देने के बारे में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है। इस कार्यशाला का विषय “सतत भविष्य के लिए समुद्री सुरक्षा को आगे बढ़ाना” है, जो भाग लेने वाले देशों के साझाविजन को समाहित करता है। यह संस्करण 31 देशों और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के प्रतिनिधियों का स्वागत करता है और इसका उद्देश्य सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भागीदार देशों के बीच तालमेल, सहयोग और सूचना साझा करने को बढ़ावा देना है। भारतीय नौसेना के उप प्रमुख वायस एडमिरल संजय महेंद्रू इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे और तीन दिन तक चलने वाली गहन चर्चा और ज्ञान के आदान-प्रदान का मंच उपलब्ध होगा। कार्यशाला के इस संस्करण की योजना विशेष रूप से हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) और जिबूती आचार संहिता/जेद्दा संशोधन (डीसीओसी/जेए) देशों के सदस्यों के लिए बनाई गई है।

कार्यशाला के विषय

कार्यशाला के दौरान, प्रख्यात वक्ता आईओआर में समकालीन अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा चुनौतियों, मौजूदा समुद्री खतरे के परिदृश्य से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सूचना साझा करने की आवश्यकता, समुद्री सुरक्षा में प्रौद्योगिकी और नवाचार के महत्व तथा एक लचीली समुद्री सुरक्षा वास्तुकला की दिशा में राष्ट्रीय प्रयासों की अनुरूपता सहित पहले दिन विषयगत प्रशिक्षण सत्रों में भागीदारी करेंगे। दूसरा दिन एक परिदृश्य-आधारित समुद्री सुरक्षा अभ्यास के लिए समर्पित होगा, जो प्रतिभागियों के लिए सहयोग और सूचना साझा करने के मूल्य पर प्रकाश डालेगा और समुद्री सुरक्षा और संरक्षा के खतरों का मुकाबला करने के लिए आकस्मिक योजनाओं की तैयारी को प्रोत्साहित करेगा। कार्यशाला के तीसरे दिन, विशेष रूप से डीसीओसी/जेए देशों के लिए अपनी सूचना साझा करने नेटवर्क (आईएसएन) के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को परिष्कृत करने के लिए एक समर्पित कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

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