मीडिया में ऐसी भ्रामक और गुमराह करने वाली खबरें आती रही हैं, जिनमें दावा किया गया है कोविड-19 से मरने वालों की संख्या बहुत अधिक है। ये खबरें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के आंकड़ों के आधार पर दी गई हैं। मीडिया रिपोर्टों में एचएमआईएस और जन्म-मृत्यु पंजीयन प्रणाली (सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम – सीआरएस) के आंकड़ों की तुलना करके गलत नतीजे निकाले गये हैं। ऐसी सभी रिपोर्टें गुमराह करने वाली और गलत हैं, जिनकी कोई ठोस बुनियाद नहीं है।
एचएमआईएस में दर्ज मृत्यु की संख्या का हवाला देते हुये मीडिया रिपोर्टों में तो यहां तक कह दिया गया है कि “अन्य जानकारियों के अभाव में, इन मौतों को भी कोविड-19 से होने वाली मृत्यु माना जाना चाहिये।” मीडिया रिपोर्टों में खुद कहा गया है कि “2,50,000 से अधिक मौतों का कारण पता नहीं है।” बिना किसी आधार के हर मौत को कोविड-19 से होने वाली मृत्यु मान लेना सरासर गलत है और ऐसे नतीजे निकालना कल्पना की उड़ान भर है। यह सिर्फ अंदाजे पर बताया गया है, जिसकी कोई ठोस बुनियाद नहीं है।
यह बात फिर दोहराई जाती है कि कोविड के आंकड़ों के प्रबंधन के मामले में केंद्र सरकार पूरी पारदर्शिता से काम कर रही है और कोविड-19 सम्बंधी मृत्यु को दर्ज करने के लिये उसके पास पहले से एक सटीक व मजबूत प्रणाली मौजूद है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे इस विशिष्ट प्रणाली में लगातार आंकड़ों को अपडेट करते रहें। मृत्यु की संख्या में कोई गड़बड़ी न होने पाये, इसके लिये भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर) ने सभी मौतों को सही-सही दर्ज करने के लिये “भारत में कोविड-19 सम्बंधी मृत्यु को उचित तरीके से दर्ज करने के लिये दिशा-निर्देश” जारी किये हैं। ‘मॉर्टेलिटी कोडिंग’ के सम्बंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सिफारिश किये गये आसीडी-10 के आधार पर कोविड-19 से होने वाली मौतों को दर्ज किया जाता है, जिसके बारे में आईसीएमआर का निर्देश है।
औपचारिक संपर्कों, वीडियो कॉन्फ्रेंसों और केंद्रीय टीम की तैनाती के जरिये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया गया है कि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों के आधार पर होने वाली मौतों को सही-सही दर्ज करें। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय नियमित रूप से इस बात पर जोर देता रहता है कि रोजाना जिलेवार होने वाली मृत्यु पर नजर रखी जाये और सटीक जानकारी दी जाये।
यह तथ्य सबको पता है कि कोविड-19 महामारी जैसे बड़े और लंबे चलने वाले स्वास्थ्य संकट के दौरान मृत्यु दर्ज करने में अंतर आ जाता है। दूसरी बात यह कि मौतों पर बेहतर शोध अध्ययन भी प्रायः घटना के बाद ही किया जाता है, जब भरोसेमंद स्रोतों से मृत्यु सम्बंधी आंकड़े उपलब्ध हो जाते हैं। इन अध्ययन का तौर-तरीका बिलकुल सटीक होता है। आंकड़ों के स्रोत भी निर्धारित होते हैं तथा मृत्यु के बारे में अंदाज भी सही तरह लगाया जा सकता है।
आईपीएल क्रिकेट में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लखनऊ सुपर जायंट्स को पांच विकेट से हरा… Read More
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने नई दिल्ली में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य… Read More
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) प्रणाली में डेटा की सटीकता… Read More
जनगणना के तहत मकानों की गिनती का पहला चरण आज से कई राज्यों में शुरू… Read More
अमरीका ने रूस या ईरान से तेल की खरीद पर प्रतिबंधों में कोई और छूट… Read More
हिंद महासागर पोत (आईओएस) सागर 14 अप्रैल 2026 को मालदीव के माले से छह दिवसीय… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment