कोयला मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। दोनों मंत्रालयों के बीच सचिव स्तर की संयुक्त बैठक के दौरान, यह निर्णय लिया गया कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तकनीकी, नीति और क्षमता निर्माण सहायता प्रदान करेगा और कोयला मंत्रालय भूमि, पूंजी प्रदान करेगा और सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को लागू करेगा।
कोयला मंत्रालय, कोल इंडिया लिमिटेड के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों-नैवेली लिग्नाइट कारपोरेशन लिमिटेड-एनएलसीआईएल और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड-एससीसीएल ने पहले ही पंचामृत लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए नेट जीरो योजना शुरू कर दी है। 1600 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता स्थापित की गई है। 500 मेगावाट की अन्य सौर परियोजनाओं पर काम विभिन्न चरणों में जारी है।
उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया कि कोयला कंपनियों के पास डी-कोयला और अधिशेष भूमि है और ऐसी भूमि को निजी निवेशकों को हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं की स्थापना के लिए दिया जा सकता है। कोयला लोक उद्यम विभाग-सीपीएसई के पास खुली खदानों में डी-कोयला और ओपन कास्ट माइंस है, जहां प्राकृतिक रूप से उपलब्ध जल भंडारण जलाशय और औसत 100 मीटर ऊंचाई का शीर्ष है। शीर्ष जलाशय के निर्माण से ऐसी डी-कोयला खदानों को पंप भंडारण परियोजनाओं में बदला जा सकता है। ऐसी परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए तेजी से काम करने का निर्णय लिया गया।
कोयला सीपीएसई के पास पहले से ही अतिरिक्त विशाल भूमि है, जिसका उपयोग सौर परियोजनाओं की स्थापना के लिए किया जा सकता है। इसलिए, कोयला धारक क्षेत्रों में लगभग 85 आवासीय कॉलोनियां हैं जिनमें लगभग 50,000 आवास हैं। पूर्ण मूल्यांकन करने और मिशन मोड में सभी सरकारी भवनों और घरों की छत पर सौर ऊर्जा से कवर करने का निर्णय लिया गया।
यह भी निर्णय लिया गया कि आईआईटी रूड़की, भारतीय सौर ऊर्जा निगम और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) से जुड़ी अन्य संसाधन एजेंसियों के माध्यम से उपयुक्त ज्ञान साझेदारी भी की जाएगी।
कोयला मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सीपीएसई, वर्ष 2030 तक लगभग 12गीगावाट की उत्पादन क्षमता तैयार करेंगे। कोयला मंत्रालय 300 एकड़ से अधिक भूमि के लगभग 10 टुकड़ों की पहचान करने की प्रक्रिया में है ताकि निजी निवेशकों को नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की नीति के तहत हरित हाइड्रोजन परियोजनाएं स्थापित करने की पेशकश की जा सके।
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