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कोयला सचिव ने एनसीएल के प्रदर्शन की समीक्षा की; 50 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र की आधारशिला रखी

कोयला मंत्रालय के सचिव डॉ. अनिल कुमार जैन ने कहा है कि नॉर्दर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) स्थायी कोयला खनन को बढ़ावा देने की इच्छुक है और ये इस कोयला मिनीरत्न की हालिया पहलों में भी झलक रहा है। संयुक्त सचिव विस्मिता तेज के साथ डॉ. जैन कंपनी के व्यापक प्रदर्शन का आकलन करने के लिए एनसीएल के दौरे पर थे।

एनसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए डॉ. जैन ने देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कोयला उत्पादन को बढ़ाने और टिकाऊ तरीके से उनका परिवहन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पर्यावरण पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए खनन प्रक्रिया में नवीन साधनों को अपनाने का आह्वान किया और टीम एनसीएल से व्यापार विविधीकरण रणनीतियों को अपनाने का आग्रह किया। इस मौके पर एनसीएल के सीएमडी भोला सिंह, डीटी (पी एंड पी), सीवीओ और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

डॉ. अनिल कुमार जैन ने निगाही क्षेत्र में 50 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र की आधारशिला भी रखी। यह संयंत्र 129.35 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा जिसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 94 मिलियन यूनिट प्रति वर्ष होगी और इससे कार्बन उत्सर्जन में प्रति वर्ष 78020 टन की कमी आएगी। यहां उत्‍पादित बिजली का उपयोग एनसीएल द्वारा परिचालन और अन्य उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। नेट जीरो के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ये कंपनी भविष्‍य में अक्षय ऊर्जा स्रोतों से 273 मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगी।

डॉ. जैन ने निगाही ओपन कास्ट कोयला खदान का दौरा किया और खदान के संचालन का निरीक्षण किया। उन्होंने जयंत क्षेत्र में चल रहे फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (कोल हैंडलिंग प्लांट) की जगह का भी निरीक्षण किया। एनसीएल 3100 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश के साथ ऐसी 9 फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम कर रही है। इनमें से दो परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं। 2023-24 तक इन एफएमसी परियोजनाओं के पूरा होने के साथ, एनसीएल पर्यावरण अनुकूल और मशीनीकृत तरीके से उत्पादित कोयले की पूरी खेप को भेजने में सक्षम होगा।

डॉ. अनिल कुमार जैन और संयुक्त सचिव विस्मिता तेज ने इस यात्रा के दौरान कोयला उपभोक्ताओं यानी प्रमुख बिजली उत्पादन कंपनियों सहित इस कंपनी के विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत की।

एनसीएल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सिंगरौली तथा सोनभद्र जिले में स्थित अपनी 10 बेहद मशीनीकृत ओपनकास्ट खदानों से सालाना 122 मिलियन टन से ज्यादा कोयले का उत्पादन करती है।

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