प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों (यूटी) में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस), समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस), प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण-पीएम पोषण [पूर्ववर्ती मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम)] और भारत सरकार की अन्य कल्याण योजनाओं (ओडब्ल्यूएस) में 2024 तक चरणबद्ध रूप से फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।
चावल के फोर्टिफिकेशन की पूरी लागत (लगभग 2,700 करोड़ रुपये प्रति वर्ष) जून, 2024 तक इसके पूर्ण कार्यान्वयन होने तक खाद्य सब्सिडी के हिस्से के रूप में भारत सरकार द्वारा वहन की जाएगी।
इस पहल के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित तीन चरणों की परिकल्पना की गई है:
चरण- I: मार्च, 2022 तक पूरे भारत में आईसीडीएस और पीएम पोषण को कवर करना जो कार्यान्वयन के अधीन है।
चरण- II: उपर्युक्त चरण I के साथ-साथ मार्च 2023 तक सभी आकांक्षी और स्टंटिंग की समस्या से व्यापक रूप से प्रभावित जिलों (कुल 291 जिलों) में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) और अन्य कल्याण योजनाएं (ओडब्ल्यूएस)।
चरण- III: उपर्युक्त चरण II के साथ-साथ मार्च 2024 तक देश के शेष जिलों को कवर करना।
कार्यान्वयन के व्यापक प्रयासों के हिस्से के रूप में, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग राज्य सरकार/केंद्र-शासित प्रदेश, संबद्ध मंत्रालयों/विभाग, डेवलपमेंट पार्टनर्स, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों आदि जैसे सभी संबंधित हितधारकों के साथ इको-सिस्टम से जुड़ी सभी गतिविधियों का समन्वय कर रहा है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य की एजेंसियां पहले से ही फोर्टिफाइड चावल की खरीद में लगे हुए हैं और अब तक आपूर्ति एवं वितरण के लिए लगभग 88.65 एलएमटी फोर्टिफाइड चावल की खरीद की जा चुकी है।
प्रधानमंत्री ने 75वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2021) पर अपने संबोधन में चावल के फोर्टिफिकेशन के बारे में एक घोषणा की थी ताकि देश के हर गरीब व्यक्ति को कुपोषण से मुक्ति और महिलाओं, बच्चों, स्तनपान कराने वाली माताओं आदि में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए पोषण प्रदान किया जा सके, जो उनके विकास में बड़ी बाधा है।
इससे पहले, 2019-20 से “सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत चावल का फोर्टिफिकेशन और इसका वितरण” पर केंद्र प्रायोजित प्रायोगिक योजना को 3 साल की अवधि के लिए लागू किया गया था। ग्यारह (11) राज्यों – आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड ने प्रायोगिक योजना के तहत अपने चिन्हित जिलों (प्रति राज्य एक जिला) में फोर्टिफाइड चावल का सफलतापूर्वक वितरण किया।
नई दिल्ली, जून 2026। भारत ने विश्व के सबसे बड़े जनगणना अभियान की दिशा में… Read More
ग्रे मार्केट क्या है और यह कैसे काम करता है? वित्तीय और कारोबारी दुनिया में… Read More
रवि किशन को लेकर फिर बढ़ी चर्चा, फैंस की नजर हर अपडेट पर भोजपुरी सिनेमा… Read More
पटना में खान सर और संजय कुमार झा को लेकर चर्चाओं का दौर तेज बिहार… Read More
दिल्ली के मालवीय नगर में लगी आग, दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं राष्ट्रीय… Read More
ICC क्या है? क्रिकेट जगत की सबसे बड़ी संस्था की पूरी जानकारी क्रिकेट की दुनिया… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment