प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज एक नई योजना, पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री की विकास पहल (पीएम-डिवाइन) को वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 15वें वित्त आयोग के शेष चार वर्षों के लिए मंजूरी दे दी है। 100 प्रतिशत केन्द्रीय वित्त पोषण के साथ पीएम-डिवाइन नाम की नई योजना केन्द्रीय क्षेत्र की एक योजना है और इसे पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय (डोनर) द्वारा लागू किया जाएगा।
पीएम-डिवाइन योजना में 2022-23 से 2025-26 (15वें वित्त आयोग की अवधि के शेष वर्षों) तक चार साल की अवधि में 6,600 करोड़ रुपये का परिव्यय होगा।
पीएम-डिवाइन परियोजनाओं को वर्ष 2025-26 तक पूरा करने का प्रयास किया जाएगा ताकि इस वर्ष के बाद कोई प्रतिबद्ध देनदारी न हो। इसका तात्पर्य मुख्य रूप से 2022-23 और 2023-24 में योजना के तहत प्रतिबंधों के लिए अधिकतम प्रयास करना है, जबकि 2024-25 और 2025-26 के दौरान खर्च जारी रहेगा, मुख्य ध्यान पीएम-डिवाइन परियोजनाओं को पूरा करने पर दिया जाएगा।
पीएम-डिवाइन योजना बुनियादी ढांचे के निर्माण, उद्योगों, सामाजिक विकास परियोजनाओं को सहयोग देगी और युवाओं व महिलाओं के लिए आजीविका सृजित करेगी, जिससे रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
पीएम-डिवाइन को पूर्वोत्तर परिषद या केंद्रीय मंत्रालयों/एजेंसियों के माध्यम से डोनर मंत्रालय द्वारा लागू किया जाएगा। पीएम-डिवाइन के तहत स्वीकृत परियोजनाओं का पर्याप्त संचालन और रख-रखाव सुनिश्चित करने के उपाय किए जाएंगे ताकि वे टिकाऊ रहें। सरकारी परियोजनाओं के समय और लागत में वृद्धि के निर्माण जोखिमों को सीमित करने के लिए, जहां तक संभव होगा, उन्हें इंजीनियरिंग-खरीद-निर्माण (ईपीसी) के आधार पर लागू किया जाएगा।
पीएम-डिवाइन के उद्देश्य हैं:
पीएम गति शक्ति की भावना में सम्मिलित रूप से बुनियादी ढांचे को निधि देना;
एनईआर द्वारा महसूस की गई जरूरतों के आधार पर सामाजिक विकास परियोजनाओं को समर्थन;
युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका संबंधी कार्यों को सक्षम करना;
विभिन्न क्षेत्रों में विकास अंतराल को भरा जाए।
पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए अन्य एमडीओएनईआर योजनाएं हैं। अन्य एमडीओएनईआर योजनाओं के तहत परियोजनाओं का औसत आकार लगभग 12 करोड़ रुपये ही है। पीएम-डिवाइन योजना बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास परियोजनाओं को सहायता प्रदान करेगी जो आकार में बड़ी हो सकती हैं और अलग-अलग परियोजनाओं के बजाय शुरू से अंत तक विकास समाधान भी प्रदान करेगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पीएम-डिवाइन के तहत एमडीओएनईआर या किसी अन्य मंत्रालय/विभाग की अन्य योजनाओं के साथ परियोजना सहायता का दोहराव नहीं हो।
पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में विकास अंतराल को दूर करने के लिए केन्द्रीय बजट 2022-23 में पीएम-डिवाइन की घोषणा की गई थी। पीएम-डिवाइन की घोषणा सरकार द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को दिए जा रहे महत्व का एक और उदाहरण है।
पीएम-डिवाइन पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों की मात्रा के अतिरिक्त है। यह मौजूदा केन्द्रीय और राज्य योजनाओं का विकल्प नहीं होगा।
हालांकि पीएम-डिवाइन के तहत 2022-23 के लिए स्वीकृत की जाने वाली कुछ परियोजनाएं बजट घोषणा का हिस्सा हैं, आम जनता के लिए पर्याप्त सामाजिक-आर्थिक प्रभाव या स्थायी आजीविका के अवसर वाली परियोजनाएं (जैसे, सभी प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों में बुनियादी ढांचा, सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में व्यापक सुविधाएं आदि) पर भविष्य में विचार किया जा सकता है।
पीएम-डिवाइन की घोषणा का औचित्य यह है कि बुनियादी न्यूनतम सेवाओं (बीएमएस) के संबंध में पूर्वोत्तर राज्यों के पैरामीटर राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे हैं और नीति आयोग, यूएनडीपी और एमडीओएनईआर द्वारा तैयार बीईआर जिला निरंतर विकास उद्देश्य (एसडीजी) सूचकांक 2021-22 के अनुसार महत्वपूर्ण विकास अंतराल हैं। इन बीएमएस कमियों और विकास अंतरालों को दूर करने के लिए नई योजना, पीएम-डिवाइन की घोषणा की गई थी।
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