प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू)’ को 31 दिसंबर 2024 तक जारी रखने के आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) के प्रस्ताव को आज मंजूरी दे दी है जिसके तहत पहले से ही स्वीकृत 122.69 लाख आवासों को 31 मार्च, 2022 तक पूर्ण करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जानी है।
‘पीएमएवाई-यू : सभी के लिए आवास’ भारत सरकार द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों/केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से देश के शहरी क्षेत्रों में सभी पात्र लाभार्थियों को बारहमासी पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए कार्यान्वित किए जा रहे प्रमुख कार्यक्रमों में से एक अहम कार्यक्रम है। यह योजना देश के संपूर्ण शहरी क्षेत्र, अर्थात वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार सभी सांविधिक कस्बों और अधिसूचित नियोजन/विकास क्षेत्रों सहित बाद में अधिसूचित कस्बों को कवर करती है। इस योजना को इन चार कार्यक्षेत्रों के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है: लाभार्थी के नेतृत्व में निर्माण/संवर्धन (बीएलसी), साझेदारी में किफायती आवास (एएचपी), इन-सीटू (स्व-स्थाने) स्लम पुनर्विकास (आईएसएसआर) और क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस)। जहां एक ओर भारत सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करती है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकारें/ केंद्र शासित प्रदेश लाभार्थियों के चयन सहित योजना को लागू करते हैं।
2004-2014 की अवधि के दौरान शहरी आवास योजना के तहत 8.04 लाख आवासों का निर्माण पूरा किया गया था। मोदी सरकार के कार्यकाल में सभी पात्र शहरी निवासियों को अधिक-से-अधिक संख्या में आवास उपलब्ध कराने के मुद्दे पर फोकस किया गया और ‘पीएमएवाई-शहरी’ योजना की परिकल्पना की गई। वर्ष 2017 में मूल अनुमानित मांग 100 लाख आवासों की थी। इस मूल अनुमानित मांग के मुकाबले 102 लाख मकानों का शिलान्यास किया गया/निर्माणाधीन बना दिया गया है। इसके अलावा, इनमें से 62 लाख आवासों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। कुल स्वीकृत 123 लाख आवासों में से 40 लाख आवासों के प्रस्ताव राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से देर से (योजना के अंतिम 2 वर्षों के दौरान) प्राप्त हुए थे, जिन्हें पूरा करने के लिए और दो साल की आवश्यकता है। अत: राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के अनुरोधों को ध्यान में रखकर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘पीएमएवाई-यू’ के कार्यान्वयन की अवधि को 31.12.2024 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।
2004-2014 के 20,000 करोड़ रुपये के मुकाबले वर्ष 2015 से लेकर अब तक स्वीकृत केंद्रीय सहायता 2.03 लाख करोड़ रुपये है। 31 मार्च 2022 तक 1,18,020.46 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता/सब्सिडी पहले ही जारी की जा चुकी है और 31 दिसंबर 2024 तक 85,406 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता/सब्सिडी के रूप में जारी किए जाएंगे।
राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के अनुरोधों को ध्यान में रखकर 31 दिसंबर 2024 तक इस योजना को जारी रखने से बीएलसी, एएचपी और आईएसएसआर कार्यक्षेत्रों के तहत पहले से ही स्वीकृत आवासों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
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